ताइवान पर ट्रंप की नरमी? शी जिनपिंग के दौरे से पहले हथियार डील टली

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के आगामी वाशिंगटन दौरे से पहले अमेरिका ताइवान को की जाने वाली बड़ी हथियार बिक्री की घोषणा टालने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। ‘साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट’ (SCMP) की रिपोर्ट के मुताबिक, इस फैसले को नवंबर में शेनझेन में होने वाले एपेक (APEC) शिखर सम्मेलन तक टाला जा सकता है।
सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस रोक को साल के अंत तक बढ़ा सकते हैं, क्योंकि एपेक के अलावा दिसंबर में फ्लोरिडा में होने वाले जी-20 (G20) सम्मेलन के दौरान भी दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय बातचीत प्रस्तावित है।
ट्रंप के सामने विकल्प और ‘हॉक्स’ का दबाव
रिपोर्ट के अनुसार, ताइवान को हथियारों की बिक्री पर हस्ताक्षर टालने के लिए ट्रंप प्रशासन कई विकल्पों पर मंथन कर रहा है। यह फैसला राष्ट्रपति ट्रंप, चीन विरोधी कड़े रुख वाले अमेरिकी नेताओं (China Hawks) और ताइवान के लॉबिस्टों के बीच एक समझौते के रूप में सामने आ सकता है:
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कार्यकाल के अंत तक टालने का विचार: एक सूत्र के मुताबिक, ट्रंप ने अपने मौजूदा कार्यकाल के अंत यानी 2028 के आखिर या जनवरी 2029 तक इस फैसले को टालने का विचार भी रखा था। हालांकि, प्रशासन के भीतर सख्त रुख रखने वाले नेताओं के भारी विरोध के बाद उन्हें पीछे हटना पड़ा।
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छोटे पैकेज का ‘टुकड़ा-टुकड़ा’ फॉर्मूला: ताइवान को पूरी तरह नाराज होने से बचाने के लिए वाशिंगटन और एपेक सम्मेलन के बीच एक छोटे हथियार पैकेज की घोषणा का सुझाव दिया गया है। बीजिंग को पहले से इसकी सूचना देकर यह सुनिश्चित करने की योजना है कि इसे किसी सहमति के उल्लंघन के रूप में न देखा जाए।
हथियारों की डिलीवरी में पहले से ही भारी बैकलॉग
सूत्रों का कहना है कि अगर आधिकारिक मंजूरी में देरी होती भी है, तो इसका हथियारों की वास्तविक डिलीवरी समय-सीमा पर बहुत सीमित असर पड़ेगा।
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अमेरिकी रक्षा उद्योग इस समय आपूर्ति श्रृंखला की बाधाओं और कुशल श्रमिकों की कमी से जूझ रहा है।
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इसके अलावा, अमेरिकी रक्षा ठेकेदार पश्चिम एशिया (Middle East) सहित सक्रिय युद्ध क्षेत्रों और अमेरिकी सेना के अपने खाली हो चुके भंडारों को भरने को प्राथमिकता दे रहे हैं।
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इस वजह से ताइवान के पुराने ऑर्डर्स पहले से ही मैन्युफैक्चरिंग कतार में अटके हुए हैं।
बीजिंग का कड़ा रुख और पुराना इतिहास
बीजिंग ने शी जिनपिंग के दौरे से पहले ताइपे को किसी भी नए हथियार की बिक्री रोकने के लिए निजी चैनलों से अमेरिका पर दबाव बनाया है। चीन ताइवान को अपना अभिन्न अंग मानता है और जरूरत पड़ने पर सैन्य बल के इस्तेमाल की बात भी दोहराता रहा है।
अमेरिका में हथियार बिक्री टालने का यह कोई पहला मामला नहीं है:
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इससे पहले मई में ट्रंप के चीन दौरे से ठीक पहले अमेरिकी प्रशासन ने कांग्रेस द्वारा मंजूर 14 अरब डॉलर के हथियार पैकेज (जिसमें PAC-3 पैट्रियट और NASAMS मिसाइल सिस्टम शामिल थे) पर रोक लगा दी थी।
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पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने 2011 से 2015 के बीच और जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने 2007 से 2008 के दौरान भी ताइवान को हथियारों की बिक्री रोकी थी।
सैन्य संवाद और आर्म्स-कंट्रोल वार्ता बहाली की उम्मीद
दोनों देशों के बीच सैन्य संबंधों की बहाली इस बात पर टिकी है कि ताइवान को लेकर वाशिंगटन क्या रुख अपनाता है। शी जिनपिंग की यात्रा के दौरान दोनों देश सैन्य-से-सैन्य (Mil-to-Mil) संचार चैनलों को मजबूत करने की घोषणा कर सकते हैं। इसके अलावा, साल 2024 में ताइवान को हथियार बेचने के विवाद के चलते रुकी हुई हथियार-नियंत्रण (Arms-Control) वार्ताओं को भी दोबारा शुरू करने पर बातचीत चल रही है।
