‘घमासान’ मूवी रिव्यू: जानिए कैसी है अरशद वारसी और प्रतीक गांधी की एक्टिंग

Ghamasaan Movie Review
साक्षी चतुर्वेदी
साक्षी चतुर्वेदी

निर्देशक तिग्मांशु धूलिया एक बार फिर अपनी नई फिल्म ‘घमासान’ के साथ दर्शकों के बीच आए हैं। यह फिल्म सीधे ओटीटी प्लेटफॉर्म Zee5 पर रिलीज हुई है। मध्य भारत और बुंदेलखंड के बीहड़ इलाकों की पृष्ठभूमि पर बनी यह कहानी डकैतों और पुलिस के बीच लुका-छिपी के खेल पर आधारित है, जो आंशिक रूप से कुख्यात डकैत ‘ददुआ’ की जिंदगी से प्रेरित बताई जाती है।

क्या है फिल्म की कहानी?

फिल्म की कहानी बुंदेलखंड के जंगलों और घाटियों में रची गई है, जहां पिछले 30 सालों से ‘महाराज’ (अरशद वारसी) नाम के एक खूंखार डकैत और उसके गिरोह का आतंक और दबदबा कायम है। ग्रामीण उससे डरते भी हैं और इलाके की राजनीति पर भी उसकी गहरी पकड़ है। पुलिस के पास उसकी कोई स्पष्ट तस्वीर न होने के कारण उसे पकड़ना मुश्किल हो रहा है।

कहानी में मोड़ तब आता है जब इलाके में चुनाव नजदीक होने पर एक ईमानदार आईपीएस अधिकारी आदित्य (प्रतीक गांधी) को शांति व्यवस्था बनाए रखने और महाराज पर नकेल कसने के लिए भेजा जाता है। इसके बाद शुरू होता है सत्ता की खींचतान, धोखे, विश्वासघात और पुलिस-डकैत के बीच चूहे-बिल्ली का रोमांचक खेल।

मूवी रिव्यू: कैसी है फिल्म?

तिग्मांशु धूलिया अपनी देसी कहानियों और जमीनी किरदारों के लिए जाने जाते हैं, और इस फिल्म में भी उन्होंने ग्रामीण परिवेश का माहौल बहुत खूबसूरती से गढ़ा है। फिल्म के कुछ हिस्से और सस्पेंस भरे सीन काफी दिलचस्प हैं। हालांकि, स्क्रीनप्ले हर जगह एक जैसा मजबूत नहीं रहता। कुछ सीक्वेंस बिखरे हुए और थोड़े कमजोर लगते हैं, जिससे थ्रिलर का रोमांच बीच-बीच में धीमा पड़ जाता है। फिल्म में दिखाई गई हिंसा काफी खौफनाक है, लेकिन एक्शन सीक्वेंस थोड़े साधारण प्रतीत होते हैं। करीब ढाई घंटे की इस फिल्म की एडिटिंग को थोड़ा और कसा जा सकता था।

अभिनय  

अभिनय के मोर्चे पर कलाकारों ने अपनी तरफ से पूरा जोर लगाया है। ‘महाराज’ के खूंखार और गंभीर किरदार में अरशद वारसी बेहद प्रभावशाली नजर आते हैं। वहीं, एक कर्तव्यनिष्ठ और ईमानदार आईपीएस अधिकारी के रूप में प्रतिक गांधी ने भी अपने किरदार के साथ पूरा न्याय किया है। इसके अलावा जतिन गोस्वामी और राजपाल यादव जैसे कलाकारों ने भी अपने छोटे-छोटे रोल्स में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है।

यदि आपको तिग्मांशु धूलिया की ग्रामीण पृष्ठभूमि वाली और डकैत शैली की फिल्में पसंद हैं, तो आप इसे एक बार देख सकते हैं। हालांकि, बिखरी हुई पटकथा के कारण यह उनकी सर्वश्रेष्ठ फिल्मों में शुमार नहीं हो पाती है।

क्रिटिक रेटिंग: 2.5/5