यूपी की रहस्यमयी सियासी सीट, BJP-SP-BSP आज तक नहीं जीत पाईं चुनाव

उत्तर प्रदेश की सियासत में पिछले दो विधानसभा चुनावों से भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दबदबा कायम है। इससे पहले राज्य में समाजवादी पार्टी (SP) और बहुजन समाज पार्टी (BSP) भी अपनी पूर्ण बहुमत की सरकारें बना चुकी हैं। लेकिन पश्चिमी यूपी में एक विधानसभा सीट ऐसी है, जहां इन तीनों प्रमुख दलों को आज तक जीत नसीब नहीं हुई है। बागपत जिले की छपरौली विधानसभा सीट राष्ट्रीय लोकदल (RLD) और ‘चौधरी परिवार’ का ऐसा अभेद्य किला है, जिसे बड़े से बड़ा सियासी समीकरण भी नहीं भेद पाया है।
रालोद के सिंबल का एकछत्र राज
छपरौली सीट के अस्तित्व में आने के बाद से ही यहां चौधरी परिवार का गहरा प्रभाव रहा है। 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में जब पूरे उत्तर प्रदेश में भगवा लहर थी, तब भी इस सीट की जनता ने राष्ट्रीय लोकदल के प्रत्याशी पर ही भरोसा जताया। 2017 में तो छपरौली पूरे प्रदेश में एकमात्र ऐसी सीट थी, जहां से रालोद ने जीत दर्ज की थी।
पिछले तीन विधानसभा चुनावों के नतीजे
पिछले तीन चुनावों (2012, 2017, 2022) में छपरौली सीट पर हुए प्रमुख मुकाबलों में रालोद ने ही बाजी मारी है। नीचे दी गई तालिका में पिछले तीन चुनावों के प्रमुख उम्मीदवारों और उन्हें मिले वोटों का विवरण है:
| वर्ष | विजेता (पार्टी) | प्राप्त वोट | उपविजेता (पार्टी) | प्राप्त वोट |
| 2022 | अजय कुमार (रालोद) | 1,11,880 | सहेंद्र सिंह रमाला (बीजेपी) | 82,372 |
| 2017 | सहेंद्र सिंह रमाला (रालोद) | 65,124 | सतेंद्र सिंह (बीजेपी) | 61,282 |
| 2012 | वीर पाल (रालोद) | 69,394 | देव पाल सिंह (बसपा) | 47,823 |
2022 का चुनाव रालोद ने सपा के साथ गठबंधन में लड़ा था। वहीं, 2017 में रालोद के टिकट पर चुनाव जीतने वाले सहेंद्र सिंह रमाला बाद में बीजेपी में शामिल हो गए थे। 2022 में उन्होंने बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन रालोद के अजय कुमार से हार गए। 2017 के चुनाव में सपा के मनोज चौधरी को 39,841 और बसपा की राजबाला को 30,241 वोट मिले थे। 2012 में तीसरे स्थान पर रहे सपा के मनोज कुमार को 14,103 और बीजेपी के वेदपाल को महज 4,534 वोट हासिल हुए थे।
1977 से शुरू हुआ था ऐतिहासिक सफर
छपरौली सीट के ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की बात करें तो 1977 और 1980 में जनता पार्टी (JNP) के टिकट पर नरेंद्र सिंह ने जीत दर्ज की थी। 1985 में लोकदल (LKD) से सरोज वर्मा और 1989 में जनता दल से नरेंद्र सिंह विधायक बने। 1991 में जनता दल के टिकट पर खुद चौधरी अजीत सिंह ने यहां से चुनाव जीता। 1993 में एक बार फिर नरेंद्र सिंह और 1996 में गजेंद्र कुमार मुन्ना ने जीत हासिल की। इसके बाद 2002, 2007 और 2022 के चुनावों में इस सीट से रालोद के अजय कुमार विधायक चुने गए।
