मजिस्ट्रेट ने नोटिस जारी करने की हिम्मत कैसे की? CJI ने डीएम से माँगा जवाब

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शकील अहमद सैफी
शकील अहमद सैफी

ग्रेटर नोएडा स्थित गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी (GBU) के छात्र अक्षय त्रिपाठी को दिल्ली के जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के प्रदर्शन में शामिल होने के कारण दिए गए 5 लाख रुपये के नोटिस का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। इस मामले पर सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने उत्तर प्रदेश पुलिस और मजिस्ट्रेट की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है और गौतम बुद्ध नगर के जिलाधिकारी से जवाब तलब करने की बात कही है।

याचिकाकर्ता की दलील और CJI की सख्त टिप्पणी

याचिकाकर्ता के वकील ने अखबार की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कोर्ट को बताया कि 1 सितंबर के सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद छात्र के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की गई, जो सीधे तौर पर आदेश की अवमानना है। इसका असर देशभर के प्रदर्शनकारी छात्रों पर पड़ सकता है।

इस दलील पर CJI सूर्यकांत ने सख्त लहजे में कहा, “हम हैरान हैं; जब हम पहले ही इसे रद्द कर चुके हैं और यह निर्देश दे चुके हैं कि पहले से दर्ज एफआईआर पर कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी, तो मजिस्ट्रेट ने नोटिस जारी करने की हिम्मत कैसे की?”

क्या था 5 लाख रुपये का नोटिस?

4 सितंबर को ग्रेटर नोएडा आयुक्तालय के तृतीय कार्यकारी मजिस्ट्रेट कार्यालय ने पुलिस रिपोर्ट के आधार पर अक्षय त्रिपाठी को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 130 के तहत नोटिस जारी किया था। इसमें उनसे 5 लाख रुपये का निजी मुचलका और इतनी ही राशि की दो जमानतें देने को कहा गया था, ताकि 6 महीने तक शांति बनाए रखी जा सके।

पुलिस का आरोप था कि त्रिपाठी CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए छात्रों को उकसा रहे थे और कथित तौर पर ‘सरकार विरोधी व भ्रामक’ जानकारी फैला रहे थे, जिससे कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका थी। हालांकि, मामला तूल पकड़ने और कानूनी पचड़े में फंसने के बाद पुलिस ने 4 सितंबर को ही अपना नोटिस वापस ले लिया था।

छात्र ने किया शांतिपूर्ण प्रदर्शन का दावा

प्रयागराज के मूल निवासी और GBU के छात्र अक्षय त्रिपाठी ने पुलिस के सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय तीन महीने से बंद था और उन्होंने प्रदर्शन में शांतिपूर्ण तरीके से हिस्सा लिया था। एक वीडियो में अक्षय ने यह भी दावा किया कि 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस की कार्रवाई में उन्हें चोटें आई थीं।

छात्र संगठनों ने की कड़ी निंदा

स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने अक्षय के खिलाफ पुलिस की इस कार्रवाई को दमनकारी बताते हुए यूपी सरकार को आड़े हाथों लिया। वहीं, CJP के सह-संयोजक सौरव दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि 1 सितंबर के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत प्रदर्शनकारियों को कानूनी संरक्षण प्राप्त है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अक्षय त्रिपाठी को किसी तरह का बॉन्ड देने की जरूरत नहीं है और वे किसी भी छात्र को प्रशासनिक ज्यादती का निशाना नहीं बनने देंगे।