UP चुनाव : गाजीपुर से अंबेडकरनगर तक BJP के लिए क्यों मुश्किल राह?

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गौरव त्रिपाठी
गौरव त्रिपाठी

उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। राज्य में सत्ता की ‘हट्रिक’ लगाने के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) अभी से मिशन मोड में जुटी हुई है। हालांकि, पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती वे जिले हैं जहां पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में उसे करारी हार का सामना करना पड़ा था। इन इलाकों में पार्टी पिछले दो बड़े चुनावों में एक भी सीट जीतने में कामयाब नहीं हो पाई थी, जो 2027 की रणनीति के लिहाज से काफी अहम माने जा रहे हैं।

गाजीपुर: सातों सीटों पर सपा गठबंधन का कब्जा

गाजीपुर जिले की सभी सातों विधानसभा सीटों पर 2022 के चुनाव में समाजवादी पार्टी और उसके सहयोगियों ने जीत दर्ज की थी। उस चुनाव में सुभासपा (SBSP) ने दो और समाजवादी पार्टी ने पांच सीटों पर कब्जा जमाया था। इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में भी गाजीपुर सीट से सपा के अफजाल अंसारी ने जीत हासिल की। हालांकि, पिछले चुनाव में सपा के साथ रहने वाली सुभासपा अब एनडीए का हिस्सा है, लेकिन गाजीपुर की जमीनी राजनीतिक जमीन पर बीजेपी के लिए यह जिला अब भी सबसे कठिन चुनौतियों में से एक बना हुआ है।

आजमगढ़: सपा के इस गढ़ में सभी दस सीटों पर सूपड़ा साफ

आजमगढ़ को समाजवादी पार्टी का सबसे मजबूत गढ़ माना जाता है। साल 2022 के विधानसभा चुनाव में जिले की दसों सीटों पर सपा ने जीत हासिल की थी, जहां हर सीट पर जीत का अंतर 13 हजार वोटों से अधिक था। इसके दो साल बाद लोकसभा चुनाव में भी यहां सपा का ही परचम लहराया और अखिलेश यादव के परिवार से ताल्लुक रखने वाले धर्मेंद्र यादव ने यहां से जीत दर्ज की। पार्टी संगठन के लिए इन सीटों पर पकड़ मजबूत करना एक बड़ी चुनौती है।

अंबेडकरनगर और कौशांबी में भी विपक्ष का दबदबा

  • अंबेडकरनगर: जिले की पांचों विधानसभा सीटों (कटेहरी, टांडा, आलापुर, जलालपुर और अकबरपुर) पर 2022 के चुनाव में साइकिल की रफ्तार देखने को मिली और सभी सीटों पर सपा ने जीत दर्ज की। इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में भी यहां सपा के लालजी वर्मा ने बाजी मारी।

  • कौशांबी: इस जिले की तीनों सीटों पर भी 2022 में सपा प्रत्याशियों ने जीत हासिल की थी। सबसे हाई-प्रोफाइल मुकाबला सिराथू सीट पर हुआ था, जहां सपा समर्थित उम्मीदवार पल्लवी पटेल ने बीजेपी के दिग्गज नेता और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को शिकस्त दी थी। इसके बाद लोकसभा चुनाव में भी यहां सपा ने अपनी जीत बरकरार रखी।

विपक्ष के इन गढ़ों में लगातार मिल रही हार के बाद अब बीजेपी 2027 के चुनावी रण से पहले अपनी रणनीति को धार देने में जुटी है, ताकि इन इलाकों के सियासी समीकरणों को बदला जा सके।