यूपी चुनाव: तराई और पूर्वी जिलों के युवाओं की आवाज, योगी या अखिलेश?

बहराइच, श्रावस्ती, सीतापुर और लखीमपुर खीरी जैसे पूर्वी और तराई जिलों के युवाओं (जेन-जी) के बीच आगामी मुख्यमंत्री पद को लेकर राजनीतिक सुगबुगाहट तेज हो गई है। योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव के बीच सीधे मुकाबले में युवाओं की आवाज किसी तैयार राजनीतिक नारे या दिखावटी जोश तक सीमित नहीं है। संवाददाताओं से बातचीत में सामने आया है कि इस इलाके के युवा सीधे तौर पर बेरोजगारी, बाढ़ के खौफ और अपनी रोजी-रोटी के संघर्ष के आधार पर वोट की चोट करने का मन बना रहे हैं।
गन्ने का बकाया और पलायन बनी जमीनी हकीकत
तराई के इन इलाकों में चुनाव का मतलब सिर्फ राजनीतिक चेहरे चुनना नहीं रह गया है। युवाओं की जुबान पर उनकी रोजमर्रा की दुश्वारियां हावी हैं। बातचीत के दौरान कई ऐसे जमीनी मुद्दे सामने आए, जिन पर युवा सबसे ज्यादा मुखर हैं:
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बाढ़ का कहर: हर साल घरों में घुसने वाला बाढ़ का पानी और उससे होने वाली बर्बादी।
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खेती-किसानी: गन्ने की बकाया राशि का भुगतान न होना और लगातार सूखते तालाब।
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रोजगार का संकट: स्थानीय स्तर पर बेरोजगारी और काम की तलाश में महानगरों की तरफ पलायन करने की मजबूरी।
योगी, अखिलेश या असमंजस?
मुख्यमंत्री पद के चेहरे को लेकर युवाओं की राय मुख्य रूप से तीन हिस्सों में बंटी हुई दिखाई दे रही है:
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सत्ता के पक्षधर: युवाओं का एक वर्ग मौजूदा सरकार के काम से संतुष्ट है, जिनका साफ कहना है कि वे “योगी को वोट देंगे।”
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बदलाव की मांग: रोजगार और जमीनी मुद्दों पर बदलाव की उम्मीद में कुछ युवा मुखरता से कह रहे हैं कि “अखिलेश को एक मौका मिलना चाहिए।”
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तटस्थ वोटर: एक बड़ा वर्ग अभी भी किसी भी पक्ष में खुलकर नहीं बोल रहा है। इनका रुख है कि “अभी तय नहीं… काम और उम्मीदवार देखकर फैसला करेंगे।”
इन जिलों के नौजवान हर साल प्राकृतिक आपदाओं और रोजगार के संकट से जूझते हैं, ऐसे में उनका यह रुख स्पष्ट कर रहा है कि आगामी चुनाव में वे सिर्फ वादों के बजाय जमीनी सच्चाई के आधार पर अपना फैसला सुनाएंगे।
बातचीत एक सितम्बर से 4 सितम्बर के दौरान की है, आप भी जानिए युवा क्या कह रहा है।
- अमन वर्मा, 21
“यहाँ बाढ़ हर साल आती है। घर-खेत सब बह जाता है। योगी जी ने कुछ राहत का काम किया है, इसलिए अभी उन्हीं को वोट देने का मन है।” - साक्षी मिश्रा, 19
“गरीब परिवार हैं ज्यादातर। पलायन बहुत होता है। अखिलेश जी को एक मौका मिलना चाहिए, शायद वो बाढ़ और रोजगार पर ज्यादा ध्यान दें।” - रवि प्रजापति, 23
“नेपाल बॉर्डर के पास रहने वाले लोगों की मुश्किलें अलग हैं। कानून-व्यवस्था थोड़ी सुधरी है, लेकिन विकास अभी भी धीमा है। काम देखकर फैसला करूँगा।” - पूजा यादव, 20
“मेरे पिताजी हर साल बाढ़ में सब कुछ खो देते हैं। कोई भी नेता आए, बस हमारी जिंदगी थोड़ी आसान कर दे। अभी तय नहीं है।” - मोहम्मद आजम, 22
“यहाँ गरीबी और बेरोजगारी दोनों हैं। योगी जी के समय में थोड़ा सुधार दिख रहा है, इसलिए उन्हीं को वोट दूँगा।”
श्रावस्ती से:
- सूरज कुमार, 20
“श्रावस्ती बहुत पिछड़ा जिला है। सड़कें और अस्पताल दोनों की हालत खराब है। योगी जी ने कुछ काम शुरू किया है, इसलिए अभी उन्हीं को वोट दूँगा।” - अनीता देवी, 18
“यहाँ पर्यटन की बहुत संभावना है, लेकिन सुविधाएँ नहीं हैं। अखिलेश जी को मौका मिलना चाहिए, शायद वो बौद्ध सर्किट को आगे बढ़ाएँ।” - विकास मौर्य, 24
“लोग रोजी-रोटी के लिए बाहर चले जाते हैं। स्थानीय मुद्दे हैं—पानी, सड़क और रोजगार। उम्मीदवार देखकर फैसला करूँगा।” - रुखसाना खातून, 21
“मेरी माँ बीमार पड़ती हैं तो इलाज के लिए बहराइच या लखनऊ जाना पड़ता है। कोई भी सीएम बने, बस अस्पताल ठीक कर दे। अभी उलझन में हूँ।” - दीपक यादव, 19
“योगी जी की सरकार ने कानून-व्यवस्था सुधारी है, लेकिन विकास अभी भी कम है। फिर भी उन्हीं को वोट देने का सोच रहा हूँ।”
सीतापुर से:
- अर्जुन सिंह, 22
“गन्ने की खेती है मुख्य। भुगतान में देरी होती है। योगी जी के समय में थोड़ा सुधार हुआ है, इसलिए उन्हीं को वोट दूँगा।” - नेहा वर्मा, 20
“यहाँ बाढ़ और बेरोजगारी दोनों समस्या हैं। अखिलेश जी को एक मौका देना चाहिए। शायद युवाओं के लिए कुछ नया करें।” - राहुल काश्यप, 23
“किसानों की हालत ठीक नहीं है। दोनों सरकारों ने वादे किए, लेकिन जमीन पर कम दिखा। काम देखकर फैसला करूँगा।” - प्रियंका गुप्ता, 19
“मेरे भाई शहर में मजदूरी करते हैं। घर में कोई नौकरी नहीं मिली। जो वाकई रोजगार देगा, उसी को वोट देंगे।” - सुमित यादव, 21
“कानून-व्यवस्था पहले से बेहतर है। योगी जी को ही वोट दूँगा, क्योंकि सुरक्षा का मामला भी महत्वपूर्ण है।”
लखीमपुर खीरी से:
- अजय वर्मा, 24
“किसान और गन्ना सबसे बड़ा मुद्दा है। भुगतान और बाढ़ दोनों परेशान करते हैं। योगी जी के समय में थोड़ा सुधार दिख रहा है, इसलिए उन्हीं को वोट दूँगा।” - शालिनी पटेल, 20
“यहाँ के युवाओं को बाहर जाना पड़ता है। रोजगार नहीं है। अखिलेश जी को मौका मिलना चाहिए, शायद वो कुछ बदलें।” - रविन्द्र सिंह, 22
“जंगल और खेती दोनों हैं, लेकिन सुविधाएँ कम हैं। पिछले कुछ सालों में कानून-व्यवस्था सुधरी है। अभी योगी को ही वोट देने का मन है।” - नेहा खातून, 19
“मेरे परिवार में खेती है। कोई भी आए, बस किसानों की सुन ले। अभी तय नहीं किया है।” - दीपक कुमार, 21
“रोजगार और किसान दोनों मुद्दे बड़े हैं। उम्मीदवार और उनका काम देखकर फैसला करूँगा। फिलहाल किसी के पक्ष में पूरी तरह नहीं हूँ।”
