पश्चिम यूपी में किसकी हवा? योगी या अखिलेश, Gen Z का मूड क्या कहता है

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शकील अहमद सैफी
शकील अहमद सैफी

2027 विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सियासी हलचल तेज है। बीजेपी जहां विकास, कानून-व्यवस्था और रोजगार को अपनी ताकत के तौर पर पेश कर रही है, वहीं विपक्ष बेरोजगारी, महंगाई, सरकारी भर्तियों और बदलाव के मुद्दे उठा रहा है। युवा वोटर दोनों पक्षों के दावों को अपने रोजमर्रा के अनुभव की कसौटी पर परख रहा है।

यह जानने के लिए कि पश्चिम यूपी का Gen Z मतदाता इस वक्त क्या सोच रहा है, हमारे संवाददाताओं ने आगरा, मेरठ, बागपत, बिजनौर, बरेली और रामपुर में युवाओं से बातचीत की। सवाल सीधा था: अगला मुख्यमंत्री कौन? योगी आदित्यनाथ या अखिलेश यादव, और क्यों?

आगरा

आर्यन शर्मा, 22 वर्ष
“योगी सरकार में काम दिखा है, लेकिन नौकरी मिल जाए तो ज्यादा अच्छा लगेगा।”

नेहा वर्मा, 21 वर्ष
“लड़कियों के लिए सेफ माहौल जरूरी है। इस मामले में योगी सरकार ठीक लगती है।”

अभिषेक चौहान, 24 वर्ष
“सरकारी भर्ती समय पर होनी चाहिए। तैयारी करते-करते उम्र निकल जाती है।”

साक्षी गुप्ता, 20 वर्ष
“अभी तो मैं किसी के साथ पूरी तरह नहीं हूं। चुनाव के समय देखेंगे।”

मोहित यादव, 23 वर्ष
“अखिलेश को भी मौका मिलना चाहिए, लेकिन रोजगार पर ठोस काम दिखाना पड़ेगा।”

मेरठ

प्रियांशु त्यागी, 23 वर्ष
“कानून-व्यवस्था में फर्क दिखता है। ये बात योगी के पक्ष में जाती है।”

रिया मलिक, 21 वर्ष
“महंगाई रोज महसूस होती है। घर में सबसे ज्यादा इसी की बात होती है।”

अमन सैनी, 24 वर्ष
“भर्ती निकलती है, फिर पेपर का चक्कर शुरू हो जाता है। ये बदलना चाहिए।”

कशिश चौधरी, 20 वर्ष
“मुझे सरकार से ज्यादा अपना करियर दिख रहा है। जिसकी नौकरी की बात भरोसे से होगी, उसी को देखूंगी।”

हर्षित राणा, 22 वर्ष
“योगी मजबूत लगते हैं, लेकिन युवाओं को सिर्फ भाषण नहीं, नौकरी चाहिए।”

बागपत

रोहित तोमर, 24 वर्ष
“यहां खेती भी मुद्दा है और युवाओं की नौकरी भी। दोनों चीजें साथ चाहिए।”

शिवानी मलिक, 21 वर्ष
“गांवों में सड़क और बिजली बेहतर हुई है, ये पॉजिटिव है।”

अंकित हुड्डा, 23 वर्ष
“मेरे दोस्त ज्यादातर बाहर नौकरी के लिए जा रहे हैं। यही सबसे बड़ा सवाल है।”

नंदिनी चौधरी, 20 वर्ष
“अखिलेश बदलाव की बात करते हैं, इसलिए युवाओं में उनकी भी सुनाई देती है।”

सुमित कश्यप, 22 वर्ष
“वोट चेहरा देखकर नहीं, अपने इलाके में काम देखकर दूंगा।”

बिजनौर

फैसल अंसारी, 23 वर्ष
“पढ़ाई पूरी कर लो, उसके बाद नौकरी की टेंशन शुरू हो जाती है।”

मानसी चौहान, 21 वर्ष
“लड़कियों के लिए सुरक्षा और अच्छी एजुकेशन मेरे लिए सबसे पहले है।”

दीपक कुमार, 24 वर्ष
“सरकारी नौकरी में पारदर्शिता चाहिए। बस इतना हो जाए, काफी है।”

आयुषी शर्मा, 20 वर्ष
“योगी जी का प्रशासन वाला काम ठीक लगता है, लेकिन रोजगार पर और काम चाहिए।”

शाहरुख खान, 22 वर्ष
“अभी तय नहीं है भाई। चुनाव तक कौन क्या करता है, वो देखेंगे।”

बरेली

विवेक सक्सेना, 24 वर्ष
“शहर में बदलाव दिखा है, लेकिन नौकरी के लिए अभी भी बाहर जाना पड़ता है।”

अंजलि गंगवार, 21 वर्ष
“महंगाई और नौकरी दोनों बहुत बड़ा मुद्दा हैं। घर पर इन्हीं की चर्चा होती है।”

राहुल राज, 23 वर्ष
“योगी को कानून-व्यवस्था का फायदा मिलेगा, इसमें कोई शक नहीं।”

पायल कश्यप, 20 वर्ष
“अखिलेश की बात युवाओं वाली लगती है, लेकिन उनका प्लान कितना चलेगा, ये देखना है।”

निखिल यादव, 22 वर्ष
“मैं किसी पार्टी का पक्का वोटर नहीं हूं। इस बार काम देखकर फैसला करूंगा।”

रामपुर

आदित्य सक्सेना, 23 वर्ष
“मेरे लिए नौकरी और पढ़ाई सबसे जरूरी है। बाकी चीजें बाद में।”

अफरीन खान, 21 वर्ष
“सरकार कोई भी हो, युवाओं के लिए मौके बढ़ने चाहिए।”

शुभम यादव, 24 वर्ष
“योगी की सख्ती ठीक लगती है, लेकिन रोजगार वाला हिस्सा कमजोर है।”

फरहीन अली, 20 वर्ष
“अखिलेश को लेकर युवाओं में उम्मीद है, लेकिन अभी फैसला जल्दी होगा।”

करण चौहान, 22 वर्ष
“अभी दोनों में से किसी को नहीं चुन रहा। चुनाव पास आएगा तो मूड साफ होगा।”

छह जिलों की इस Ground-Vox में एक बात बार-बार सामने आती है: Gen Z के लिए मुख्यमंत्री का चेहरा महत्वपूर्ण है, लेकिन नौकरी उससे भी बड़ी चिंता है। सरकारी भर्ती, पेपर लीक, महंगाई, शिक्षा, महिला सुरक्षा और स्थानीय विकास जैसे मुद्दे युवाओं के फैसले में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

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आगरा: विकास की रफ्तार और नौकरी की चिंता

ताज नगरी आगरा के युवाओं का कहना है कि शहर में बुनियादी ढांचे और सड़कों का विकास साफ नजर आता है, लेकिन रोजगार का संकट अब भी सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है। कई युवाओं का मानना है कि कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर मौजूदा सरकार ने बेहतर काम किया है, जिससे सुरक्षा का माहौल बना है, लेकिन प्राइवेट सेक्टर में जॉब सिक्योरिटी न होने के कारण सरकारी भर्तियों का समय पर होना उनके लिए सबसे जरूरी पैमाना है।

मेरठ: कानून-व्यवस्था बनाम लंबी भर्ती प्रक्रिया

खेल नगरी मेरठ के युवाओं में कानून-व्यवस्था की तारीफ तो देखने को मिली, लेकिन सरकारी नौकरियों की लंबी और जटिल प्रक्रिया (पेपर लीक, कोर्ट कचहरी और रिजल्ट में देरी) को लेकर गहरी निराशा भी दिखी। कुछ युवाओं का यह भी मानना है कि लोकतंत्र में बदलाव होना चाहिए और विपक्ष के चेहरे के तौर पर अखिलेश यादव को भी एक मौका देकर युवाओं के मुद्दों पर परखना चाहिए।

बागपत: खेती से आगे बढ़कर रोजगार की तलाश

जाट बहुल और कृषि प्रधान बागपत में अब सिर्फ किसानों के मुद्दे ही नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य और रोजगार की बात भी प्रमुखता से उठ रही है। यहां के युवाओं का कहना है कि सिर्फ कृषि आधारित चर्चाओं से काम नहीं चलेगा, बल्कि छोटे शहरों के युवाओं के लिए आधुनिक रोजगार के अवसर और बेहतर शिक्षा के साधन भी सरकार की प्राथमिकता में होने चाहिए।

बिजनौर: महिला सुरक्षा और पारदर्शी भर्तियां

बिजनौर में छात्राओं और महिला मतदाताओं ने कानून-व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर संतोष जताया, लेकिन उच्च शिक्षा के बाद रोजगार न मिलने की टीस भी खुलकर सामने आई। युवाओं का साफ कहना है कि सरकारी भर्तियों में पूरी पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर लगाम ही उनके वोट की असली कीमत तय करेगी।

बरेली: बदला हुआ शहर और महंगाई का दबाव

बरेली के युवाओं का मानना है कि शहर का बुनियादी ढांचा बदला है और सड़कों व कनेक्टिविटी में सुधार हुआ है, लेकिन रसोई और घर के बढ़ते बजट (महंगाई) ने रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित किया है। युवाओं के एक वर्ग का रुख अभी तटस्थ है, जो चुनाव नजदीक आने पर स्थानीय उम्मीदवार और जमीनी काम के आधार पर फैसला करने की बात कह रहा है।

रामपुर: बदलाव की सुगबुगाहट और प्रशासनिक सख्ती

रामपुर में युवाओं के बीच मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। जहां एक तरफ कुछ युवा सरकार की प्रशासनिक सख्ती और शांति व्यवस्था को पसंद कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ युवा लड़कों के बीच अखिलेश यादव के नेतृत्व और बदलाव को लेकर सुगबुगाहट तेज है। उनका मानना है कि सरकार चाहे जिसकी हो, शिक्षा, रोजगार और महंगाई जैसे बुनियादी मुद्दों पर सीधा असर दिखना चाहिए।

Gen Z का संदेश: चेहरा नहीं, भविष्य चाहिए

पश्चिम यूपी के इन छह जिलों के युवाओं से बातचीत से एक बात बिल्कुल साफ हो जाती है कि आज का Gen Z मतदाता सिर्फ किसी नेता के चेहरे या पुरानी बहसों के आधार पर वोट देने के मूड में नहीं है। उनके लिए रोजगार, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया, शिक्षा, महंगाई और कानून-व्यवस्था सबसे बड़े पैमाने हैं। चुनाव जैसे-जैसे करीब आएंगे, युवाओं के इन तीखे सवालों के जवाब ही तय करेंगे कि पश्चिम यूपी की राजनीतिक करवट किस दिशा में जाएगी।