पूर्वांचल में किसकी हवा? योगी या अखिलेश, जनता का मूड क्या है

उत्तर प्रदेश की सियासत में साल 2027 के विधानसभा चुनाव की बिछी बिसात के बीच पूर्वांचल का राजनीतिक तापमान तेजी से बढ़ने लगा है। गोरखपुर से लेकर आजमगढ़, बलिया और जौनपुर तक फैले इस बेल्ट में मतदाताओं के मुद्दे, प्राथमिकताएं और राजनीतिक पसंद बेहद दिलचस्प और बंटी हुई नजर आ रही हैं। कोई मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सुदृढ़ कानून-व्यवस्था और विकास मॉडल की तारीफ कर रहा है, तो कोई अखिलेश यादव के नेतृत्व में बदलाव, रोजगार और सामाजिक न्याय की उम्मीद जता रहा है।
यह जानने के लिए कि पूर्वांचल के मतदाता इस वक्त क्या सोच रहे हैं, हमारे संवाददाताओं ने चार प्रमुख जिलों—गोरखपुर, आजमगढ़, बलिया और जौनपुर—के विभिन्न वर्गों के लोगों से बात कर एक ग्राउंड-वॉक्स (Ground-Vox) रिपोर्ट तैयार की है।
Ground Vox Note: यह ग्राउंड रिपोर्ट 27 अगस्त से 3 सितंबर 2026 के बीच गोरखपुर, आजमगढ़, बलिया और जौनपुर में लोगों से बातचीत पर आधारित है।
गोरखपुर: कानून-व्यवस्था बनाम रोजगार की बहस
मुख्यमंत्री के गढ़ माने जाने वाले गोरखपुर में विकास और सुरक्षा मुख्य मुद्दे हैं, लेकिन युवाओं के बीच रोजगार को लेकर कसक भी साफ दिखती है:
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चंपा भट्ट : “मेरे लिए सबसे बड़ा मुद्दा कानून-व्यवस्था और विकास है। योगी सरकार में गोरखपुर में काफी काम दिखा है, इसलिए मेरी पसंद बीजेपी है।”
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सुमित रंजन : “सरकार ने काम किया है, लेकिन रोजगार का सवाल बड़ा है। चुनाव तक देखेंगे कि बीजेपी इस मोर्चे पर क्या करती है।”
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अन्य प्रतिक्रियाएं: कई महिला मतदाताओं ने महिला सुरक्षा को आधार बनाते हुए योगी सरकार के प्रशासनिक मॉडल पर भरोसा जताया, तो कुछ युवाओं ने महंगाई और नौकरियों के मुद्दे पर बदलाव की इच्छा भी जाहिर की।
आजमगढ़: विकास, पीडीए और बदलाव की सुगबुगाहट
सपा के गढ़ और पूर्वांचल के अहम केंद्र आजमगढ़ में बेरोजगारी और क्षेत्रीय विकास के मुद्दे हावी हैं:
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राकेश सिंह : “यहां बेरोजगारी बड़ा मुद्दा है। सरकार चाहे बीजेपी की हो या सपा की, युवाओं के लिए नौकरी और अच्छे कॉलेज मिलने चाहिए।”
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आलम : “मैं अखिलेश यादव को मौका देना चाहूंगा क्योंकि विपक्ष को भी सरकार चलाने का अवसर मिलना चाहिए। अखिलेश की ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) वाली राजनीति से जनता को जुड़ाव महसूस होता है।”
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अन्य प्रतिक्रियाएं: कुछ मतदाताओं का मानना है कि योगी सरकार में धार्मिक पर्यटन और बुनियादी ढांचे पर काम हुआ है, लेकिन स्थानीय विधायक के काम और रोजगार के वादों पर ही अंतिम फैसला तय होगा।
बलिया: सख्त प्रशासन और महंगाई के बीच उलझन
विद्रोही स्वभाव वाले बलिया में प्रशासनिक सख्ती और रोजमर्रा के खर्चों को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आईं:
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पंडिंत दीनानाथ : “योगी सरकार में प्रशासन ज्यादा सख्त हुआ है। मुझे यह कानून-व्यवस्था वाला मॉडल पसंद है, इसलिए बीजेपी मेरी पहली पसंद है।”
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सुरैया : “सख्ती ठीक है, लेकिन घर चलाने के लिए रोजगार और महंगाई से राहत भी चाहिए। युवा बाहर जाकर काम करने को मजबूर हैं।”
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अन्य प्रतिक्रियाएं: गांवों में बिजली और सड़क की स्थिति सुधरने से संतुष्ट वर्ग जहां सरकार के साथ है, वहीं सत्ता में बदलाव को लोकतंत्र के लिए जरूरी मानने वाले मतदाता सपा के पक्ष में भी विचार कर रहे हैं।
जौनपुर: युवाओं की उम्मीदें और जमीनी मुद्दे
जौनपुर में सरकारी नौकरियों की पारदर्शिता, स्थानीय विकास और नेतृत्व को लेकर मतदाताओं में गहरी जागरूकता दिखाई दी:
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मुन्नी देवी : “सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले युवाओं की चिंता दूर होनी चाहिए। भर्ती समय पर और पूरी तरह निष्पक्ष हो, यही मेरी सबसे बड़ी प्राथमिकता है।”
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सहजराम : “योगी सरकार के कार्यकाल में प्रशासन पर पकड़ मजबूत दिखी है, लेकिन सपा भी अगर संगठन को बूथ स्तर पर मजबूत करती है तो मुकाबला कड़ा होगा।”
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अन्य प्रतिक्रियाएं: अधिकांश मतदाताओं का कहना है कि वे केवल पार्टी देखकर नहीं, बल्कि स्थानीय सड़कों, अस्पतालों, स्कूलों और उम्मीदवारों के कामकाज के आधार पर अपना वोट तय करेंगे।
पूर्वांचल की इस जमीनी यात्रा से यह साफ है कि 2027 का चुनाव एकतरफा नहीं होने वाला है। जहां एक तरफ कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा और बुनियादी ढांचे के मोर्चे पर योगी आदित्यनाथ सरकार को मजबूत बढ़त मिलती दिख रही है, वहीं दूसरी तरफ बेरोजगारी, महंगाई और बदलाव की चाह के मुद्दों पर अखिलेश यादव के पक्ष में भी एक मजबूत सुगबुगाहट मौजूद है। असली मुकाबला इस बात पर होगा कि कौन सा दल चुनाव नजदीक आने पर जनता के इन अलग-अलग मुद्दों को साधने में कितना सफल होता है।
