तापसी ने खूब लड़ी जंग, लेकिन कहानी ने दे दिया धोखा! ‘गांधारी’ का रिव्यू

Gandhari, Movie Review
शालिनी तिवारी
शालिनी तिवारी

चाइल्ड ट्रैफिकिंग और मां-बेटी के रिश्ते के इर्द-गिर्द बुनी गई तापसी पन्नू स्टारर फिल्म ‘गांधारी’ सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। हिंदी सिनेमा में इस गंभीर विषय पर पहले भी कई फिल्में आ चुकी हैं, लेकिन ‘गांधारी’ इसमें बदले की आग, मां की तलाश और एक्शन का तड़का लगाने की कोशिश करती है। हालांकि, तमाम कोशिशों के बावजूद यह फिल्म उम्मीदों पर पूरी तरह खरी नहीं उतरती।

क्या है फिल्म की कहानी?

कहानी बानी (तापसी पन्नू) और गोकुल (इश्वाक सिंह) की है, जिनकी दुनिया अपनी 6 साल की बेटी मिष्ठी के चारों ओर घूमती है। एक सफर के दौरान मिष्ठी का अपहरण हो जाता है। बच्ची को बचाने की जद्दोजहद में बानी पर हमला होता है, जिससे उसकी आंखों की रोशनी कुछ समय के लिए चली जाती है। इसके बाद शुरू होती है एक अंधी मां की अपनी बेटी को ढूंढने की खतरनाक जंग। कहानी का बैकड्रॉप बंगाल और ‘जॉयपुर्रा’ नामक एक काल्पनिक शहर है, जहां चाइल्ड ट्रैफिकिंग का बड़ा नेटवर्क चल रहा है। फिल्म में बहुरुपियों, सुरंगों और रहस्यमयी परंपराओं का तड़का भी लगाया गया है।

अभिनय और निर्देशन

  • तापसी पन्नू: एक्शन सीन्स में तापसी हमेशा की तरह बेहद आश्वस्त और मजबूत नजर आती हैं। लेकिन जब बात बेटी को खोने के बाद एक मां के गहरे दर्द और टूटन को दिखाने की आती है, तो उनका एक्शन हीरो वाला अंदाज उस भावनात्मक बेचैनी को थोड़ा ढक देता है।

  • इश्वाक सिंह और अन्य: इश्वाक सिंह (गोकुल) अपने किरदार में ठीक-ठाक नजर आते हैं, लेकिन स्क्रीन पर उनका प्रभाव तापसी के सामने थोड़ा फीका पड़ जाता है। मीता वशिष्ठ (झुनू अंबा) और छाया कदम अपने अभिनय से जरूर ध्यान खींचती हैं।

  • निर्देशन: देवाशीष मखीजा ने ‘जॉयपुर्रा’ की दुनिया और उसके विजुअल माहौल को काफी दिलचस्प बनाया है, लेकिन फिल्म की सुस्त रफ्तार और जरूरत से ज्यादा लंबे एक्शन सीन्स इसकी कहानी के तनाव को कम कर देते हैं।

लेखन और पटकथा की कमियां

कनिका ढिल्लों के लेखन में आइडिया की कोई कमी नहीं थी, लेकिन फोकस की भारी कमी साफ दिखाई देती है। फिल्म में एक साथ कई ट्रैक—बेटी का अपहरण, चाइल्ड ट्रैफिकिंग, पुलिस जांच और बानी का अतीत—चलने लगते हैं, जिससे कहानी बिखर जाती है। सबसे बड़ी कमजोरी बानी और मिष्ठी के बीच के भावनात्मक जुड़ाव को मजबूती से स्थापित न कर पाना है, जिसकी वजह से मां का संघर्ष अंदर तक असर नहीं छोड़ पाता।

देखें या नहीं?

अगर आप तापसी पन्नू के एक्शन अवतार और थ्रिलर फिल्मों के शौकीन हैं, तो यह फिल्म आपको कुछ हद तक पसंद आ सकती है। लेकिन अगर आप एक ऐसी गहरी और भावुक कहानी की तलाश में हैं जो आपको अंदर से झकझोर दे, तो यह फिल्म आपको थोड़ी निराश कर सकती है।

  • रेटिंग: 2/5 (दमदार एक्शन और अच्छे आइडिया के बावजूद कमजोर पटकथा के कारण औसत रह जाती है फिल्म)