Jeevan Ya Bheema Con: डबल रोल फीका, बीमा-कॉमेडी ने किया निराश

अरशद वारसी, संजीदा शेख और विजय राज जैसे मंजे हुए कलाकारों से सजी क्राइम-कॉमेडी फिल्म ‘जीवन या भीमा कॉन?’ सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। अभिषेक डोगरा के निर्देशन में बनी इस फिल्म से दर्शकों को काफी उम्मीदें थीं, क्योंकि इसमें एक मजेदार क्राइम-कॉमेडी बनाने के लिए तमाम जरूरी एंगल मौजूद थे। हालांकि, फिल्म उम्मीदों पर खरी उतरने में नाकाम साबित होती है और स्क्रीन पर कमजोर नजर आती है।
क्या है फिल्म की कहानी?
फिल्म की कहानी जीवन (अरशद वारसी) और योजना (संजीदा शेख) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो कर्ज के भारी बोझ तले दबे हुए हैं। जीवन ने अपनी नौकरी छोड़कर एक रेस्टोरेंट शुरू किया था, जो चल नहीं पाया और कर्ज बढ़ता चला गया। ऐसे में जीवन को अपना हमशक्ल ‘भीमा’ मिलता है, जिसके बाद वह दो करोड़ की बीमा पॉलिसी को हथियाने का प्लान बनाता है। योजना भी इस काम में उसका साथ देती है। लेकिन यह खेल तब और बड़ा हो जाता है जब इसमें विनायक (विजय राज) और उसके साथी मन्नू (ब्रिजेंद्र काला) की एंट्री होती है, जिससे कहानी अपराध की दुनिया में मुड़ जाती है।
अभिनय और निर्देशन की कमियां
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अरशद वारसी: डबल रोल में अरशद ने दोनों किरदारों को अलग दिखाने की कोशिश की है, लेकिन कमजोर संवाद (Dialogues) और खराब परिस्थितियों के चलते उनकी कॉमिक टाइमिंग वो असर नहीं छोड़ पाती जिसके लिए वह जाने जाते हैं।
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संजीदा शेख: योजना के किरदार में संजीदा ने इमोशनल और कॉमिक सीन्स में मेहनत की है, लेकिन उनका किरदार लेखक द्वारा गहराई से नहीं गढ़ा गया।
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विजय राज और ब्रिजेंद्र काला: फिल्म में ये शानदार कलाकार भी अपनी मौजूदगी से कहानी को नहीं बचा पाते, क्योंकि इन्हें भी काफी कमजोर और औसत डायलॉग मिले हैं।
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निर्देशन: अभिषेक डोगरा का निर्देशन फिल्म का सबसे कमजोर पहलू है। ज्यादातर दृश्य एक ही कमरे या लोकेशन पर फिल्माए गए हैं, जहां किरदार सिर्फ बातें करते नजर आते हैं। दूसरे हिस्से में फिल्म जरूरत से ज्यादा खिंचने लगती है और जबरदस्ती हंसाने की कोशिश की जाती है।
देखें या नहीं?
शुरुआत में फिल्म का कॉन्सेप्ट दिलचस्प लग सकता है, लेकिन धीरे-धीरे यह अपनी रफ्तार और कसावट दोनों खो देती है। अगर आप अरशद वारसी के बड़े फैन हैं, तब भी इस फिल्म से ज्यादा उम्मीदें न रखें। सामान्य दर्शकों के लिए यह सिनेमाघरों में समय बिताने का एक कमजोर विकल्प साबित हो सकती है।
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रेटिंग: 2/5 (कमजोर पटकथा और सुस्त रफ्तार के कारण निराश करती है)
