विजय शाह पर कार्रवाई क्यों नहीं? MP सरकार ने गिनाईं 5 वजहें

Colonel Sofia Qureshi
Saima Siddiqui
Saima Siddiqui

मध्य प्रदेश के कद्दावर मंत्री विजय शाह द्वारा कर्नल सोफिया कुरैशी पर की गई विवादित टिप्पणी के बाद उन पर कानूनी शिकंजा कसता जा रहा है। हालांकि, तमाम कानूनी और राजनीतिक दबाव के बावजूद मध्य प्रदेश सरकार उनके साथ मजबूती से खड़ी नजर आ रही है। राज्य सरकार अब सुप्रीम कोर्ट में पांच ऐसी मुख्य दलीलें पेश करने की तैयारी में है, जिनके आधार पर वह यह साबित करना चाहती है कि मंत्री के खिलाफ अभियोजन (Prosecution) की मंजूरी देने की कोई आवश्यकता नहीं थी।

सरकार की 5 बड़ी कानूनी दलीलें

  1. व्यक्तिगत शिकायत का अभाव: सरकार का तर्क है कि मंत्री के बयान के बाद किसी भी व्यक्ति द्वारा उनके खिलाफ कोई व्यक्तिगत शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। इसके अलावा, मंत्री ने अपने बयान में कर्नल सोफिया कुरैशी का नाम नहीं लिया था और उनका उद्देश्य किसी का अपमान करना नहीं था।

  2. सार्वजनिक माफी: सरकार सुप्रीम कोर्ट में विजय शाह द्वारा मांगी गई माफी का हवाला देगी। मंत्री ने तीन बार सार्वजनिक रूप से और लिखित रूप में अपना खेद जताया है, जिसके चलते आपराधिक मुकदमे का आधार कमजोर हो जाता है।

  3. मानवीय भूल का तर्क: इस पूरे प्रकरण को राज्य सरकार एक ‘मानवीय भूल’ के रूप में पेश करने की तैयारी में है। उनका तर्क है कि बयान देने के पीछे किसी को जानबूझकर निशाना बनाने की मंशा नहीं थी।

  4. साम्प्रदायिक सौहार्द पर असर नहीं: सरकार यह भी स्पष्ट करेगी कि मंत्री के इस बयान से राज्य में न तो कोई साम्प्रदायिक सौहार्द बिगड़ा और न ही ऐसा करने का कोई इरादा था।

  5. कैबिनेट का निर्णय: मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में 25 अगस्त को हुई कैबिनेट बैठक में अभियोजन की मंजूरी न देने का निर्णय लिया गया था, जिसे राज्यपाल मंगूभाई पटेल की भी स्वीकृति मिल चुकी है।

विजय शाह का सियासी कद और आदिवासी राजनीति का समीकरण

यह पूरा विवाद सिर्फ एक कानूनी मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे मध्य प्रदेश की गहरी आदिवासी राजनीति जुड़ी है:

  • चार दशक का राजनीतिक प्रभाव: विजय शाह 1990 से लेकर अब तक लगातार आठ विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं। उमा भारती से लेकर मौजूदा मोहन यादव सरकार तक वे सत्ता के केंद्र में रहे हैं।

  • राजगोंड समुदाय और मकड़ाई घराना: वे मकड़ाई राजघराने से ताल्लुक रखते हैं और राजगोंड समुदाय में उनकी गहरी पकड़ है।

  • चुनावी महत्व: मध्य प्रदेश में लगभग 22% आबादी अनुसूचित जनजाति (ST) की है और 47 सीटें इनके लिए आरक्षित हैं। कई अन्य सीटों पर भी आदिवासी मतदाता हार-जीत तय करते हैं। यही वजह है कि बीजेपी के लिए विजय शाह जैसे कद्दावर आदिवासी चेहरे पर कार्रवाई करना बड़ा राजनीतिक जोखिम साबित हो सकता है।

मामले की पृष्ठभूमि

मई 2025 में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान चर्चा में आईं सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी के संदर्भ में विजय शाह का एक वीडियो सामने आया था, जिसके बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए FIR दर्ज करने के आदेश दिए थे। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां एसआईटी (SIT) रिपोर्ट मांगी गई। हालांकि, राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों को देखते हुए राज्य सरकार और भाजपा नेतृत्व इस मामले में बेहद फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है।