स्वरा-राहुल पर बरसे अनिरुद्धाचार्य, बोले- ‘सनातन को ही टारगेट करते हैं’

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राघवेन्द्र मिश्रा
राघवेन्द्र मिश्रा

बॉलीवुड एक्ट्रेस स्वरा भास्कर के फिल्म ‘पद्मावत’ के जौहर दृश्य पर दिए गए बयान को लेकर उपजे विवाद के बीच प्रसिद्ध कथावाचक अनिरुद्धाचार्य का बड़ा बयान सामने आया है। इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा ‘मनुस्मृति’ का हवाला देकर महिलाओं की स्थिति पर उठाए गए सवालों का भी कड़ा जवाब दिया है। अनिरुद्धाचार्य ने दो टूक कहा है कि सनातन धर्म में ही नारी को देवी और भगवान का दर्जा दिया गया है, लेकिन कुछ लोग बिना समझे सिर्फ सनातन को बदनाम करने के लिए निशाना बनाते हैं।

‘चरित्रवान ही चरित्रवान का सम्मान कर सकता है’

रानी पद्मावती के जौहर और बलिदान पर बात करते हुए अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि पद्मावती जैसी महिलाएं पवित्र नारी थीं, जिन्हें ‘सती’ कहा जाता है। उन्होंने अपने मान-सम्मान की रक्षा के लिए प्राणों का बलिदान दिया। यह इतनी गहरी बात है कि इसे केवल कोई चरित्रवान व्यक्ति ही समझ सकता है। उन्होंने कहा कि जीवन से भी अधिक मूल्यवान व्यक्ति का चरित्र होता है, इसलिए जीवन चला जाए लेकिन चरित्र नहीं जाना चाहिए।

राहुल गांधी के मनुस्मृति वाले बयान पर तीखी प्रतिक्रिया

कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा मनुस्मृति का जिक्र करते हुए महिलाओं की निर्भरता पर उठाए गए सवालों पर अनिरुद्धाचार्य ने कड़ा ऐतराज जताया:

  • चयनित मुद्दों पर चुप्पी: अनिरुद्धाचार्य ने सवाल किया कि राहुल गांधी कभी तीन तलाक, बुर्के या हलाला जैसी प्रथाओं पर बात क्यों नहीं करते? क्या हलाला और तीन तलाक नारी का सम्मान है? इन मुद्दों पर वह कुछ नहीं बोलते, केवल सनातन को टारगेट करते हैं।

  • मनुस्मृति पढ़ने की सलाह: उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को थोड़ा मनुस्मृति पढ़ लेनी चाहिए। उसमें लिखा है—’यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता।’ यदि किसी को सिर्फ बुराई ही देखनी है, तो वह समाज में माता सीता के चरित्र में भी कमियां ढूंढ सकता है।

  • अर्थ का अनर्थ: उन्होंने कहा कि यदि अर्थ का अनर्थ करना हो, तो कोई भी कहीं भी बुराई ढूंढ सकता है। जिन्हें सनातन से कोई लेना-देना नहीं है, वे केवल इसे अपमानित करने का प्रयास करते हैं।

‘सनातन में ही नारी को भगवान का दर्जा’

नारी के सम्मान पर जोर देते हुए कथावाचक ने कहा कि दुनिया के दूसरे धर्मों में ईश्वर या पैगंबर की उपाधि महिलाओं को नहीं दी गई है, जबकि सनातन धर्म में दुर्गा मां, माता सीता और राधा रानी के रूप में देवियों को पूजा जाता है। मंदिर में भगवान के साथ भगवती भी विराजमान होती हैं। नारी का ऐसा सर्वोच्च सम्मान केवल सनातन संस्कृति में ही देखने को मिलता है।