दोस्त ने नहीं दी बर्थडे पार्टी तो भड़का वकील: भेज दिया लीगल नोटिस

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संजीव पॉल
संजीव पॉल

दमोह: दोस्त अगर जन्मदिन की पार्टी न दें, तो थोड़ी नाराजगी या हंसी-मजाक होना आम बात है, लेकिन मध्य प्रदेश के दमोह में एक बर्थडे पार्टी का विवाद सीधा कानूनी नोटिस तक पहुंच गया है। जिला न्यायालय के एक अधिवक्ता ने अपने साथी वकील पर जन्मदिन की पार्टी देने का वादा तोड़कर मुकरने का आरोप लगाया है। नाराज दोस्त ने बकायदा अपने सीनियर वकील के जरिए एक लीगल नोटिस भेजा है और 41,250 रुपये की क्षतिपूर्ति की मांग कर डाली है।

अब दोनों वकील आमने-सामने हैं। एक पक्ष पार्टी न मिलने पर अदालत का दरवाजा खटखटाने की चेतावनी दे रहा है, तो दूसरा पक्ष कह रहा है कि पार्टी पहले ही दी जा चुकी है और अब वह नोटिस का जवाब कानूनी तरीके से ही देगा।

10 अगस्त के जन्मदिन से शुरू हुआ था विवाद

यह पूरा विवाद दमोह जिला न्यायालय के अधिवक्ता गोविंद तिवारी के जन्मदिन से जुड़ा है। गोविंद तिवारी का 10 अगस्त को जन्मदिन था। इसके बाद उनके साथी अधिवक्ताओं और कानून के छात्रों ने उनसे पार्टी की मांग की। आरोप है कि गोविंद तिवारी ने अगले रविवार को पार्टी देने का वादा किया था।

जब तय दिन पर पार्टी नहीं मिली, तो दोस्तों ने दोबारा दबाव बनाया। दावा किया जा रहा है कि इसके बाद 23 अगस्त को पार्टी देने का भरोसा दिया गया। मामला इतना पक्का करने की कोशिश की गई कि पार्टी देने को लेकर एक लिखित इकरारनामा (एग्रीमेंट) तक तैयार किया गया, जिस पर कुछ वरिष्ठ अधिवक्ताओं के हस्ताक्षर भी मौजूद हैं।

रेस्टोरेंट का बिल और मानसिक परेशानी का इलाज

पार्टी की उम्मीद लगाए बैठे विशाल सिंह राजपूत का कहना है कि 23 अगस्त की तारीख भी बीत गई और उन्हें पार्टी नहीं मिली। उन्हें लगा कि गोविंद तिवारी अब पार्टी देने के मूड में नहीं हैं। इसी बात से नाराज होकर विशाल सिंह ने अपने वरिष्ठ अधिवक्ता कमल सिंह ठाकुर के जरिए गोविंद तिवारी को लीगल नोटिस भिजवा दिया।

नोटिस में किए गए दावे बेहद दिलचस्प हैं:

  • नोटिस में कहा गया है कि पार्टी नहीं मिलने की वजह से उन्हें मजबूरन अपने दोस्तों के साथ एक रेस्टोरेंट में जाकर खाना खाना पड़ा, जिसका बिल 1,750 रुपये आया।

  • विशाल सिंह राजपूत का दावा है कि पार्टी का वादा टूटने से वे इतने ‘मानसिक रूप से परेशान’ हो गए कि उन्हें इलाज के लिए एक निजी अस्पताल जाना पड़ा। इस इलाज पर कथित तौर पर 39,500 रुपये खर्च हुए।

  • इन दोनों खर्चों (1,750 + 39,500) को जोड़कर कुल 41,250 रुपये की क्षतिपूर्ति मांगी गई है।

विशाल सिंह ने चेतावनी दी है कि अगर सात दिन के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो वे आगे की कानूनी कार्रवाई करेंगे।

‘मैं पार्टी दे चुका हूं, नोटिस का जवाब नोटिस से दूंगा’

दूसरी तरफ, आरोपी बनाए गए अधिवक्ता गोविंद तिवारी ने पार्टी न देने के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि उन्होंने बांदकपुर रोड स्थित एक रेस्टोरेंट में पार्टी आयोजित की थी और उनके पास इसके बिल भी मौजूद हैं।

गोविंद तिवारी ने मजाकिया अंदाज में कहा कि उन्हें नोटिस मिल गया है और अब वह उसका विधिवत जवाब देंगे। उनका साफ कहना है कि अब “नोटिस का जवाब नोटिस से ही दिया जाएगा।”

वहीं, गोविंद तिवारी का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष नगाइच का मानना है कि यह दो दोस्तों के बीच का मामूली विवाद है। उन्होंने कहा कि सबसे पहले इसे आपसी बातचीत और मध्यस्थता के जरिए सुलझाने का प्रयास किया जाएगा। अगर दोनों पक्ष चाहें तो यह मामला आसानी से सुलझ सकता है।

फिलहाल यह अनोखा विवाद दमोह के वकील समुदाय में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना दिलचस्प होगा कि यह मामला अदालत की दहलीज तक पहुंचता है या फिर ‘आपसी मध्यस्थता’ में कोई नई पार्टी देकर सुलझ जाता है।