CJP का 5 सितंबर प्रदर्शन टला, सरकार के 3 वादों के बाद बनी बात

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार द्वारा तीन प्रमुख मांगों को पूरा करने का भरोसा जताए जाने के बाद, CJP ने 5 सितंबर को प्रस्तावित अपना राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन वापस लेने का ऐलान कर दिया है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई अहम सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की तरफ से पेश सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सरकार ने CJP नेताओं से बातचीत कर तीन वादे किए हैं—छात्रों पर दर्ज FIR रद्द होंगी, कोई नई FIR दर्ज नहीं होगी, और छात्रों के परिजनों को मुआवजा दिया जाएगा। सरकार इन तीनों वादों को पूरा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
सरकार ने क्या मांगे मानीं?
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को जानकारी दी कि केंद्र और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई बातचीत सकारात्मक रही है। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि वह अनुच्छेद 142 के तहत अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल करते हुए 20 जुलाई के प्रदर्शनों से संबंधित सभी 13 FIR को रद्द करने का आदेश जारी करे, क्योंकि दिल्ली पुलिस अब इन्हें आगे नहीं बढ़ाना चाहती है।
हालांकि, SG मेहता ने स्पष्ट किया कि पुलिस 2873 ऐसे लोगों के खिलाफ एक नई FIR दर्ज करना चाहती है, जिनका पहले से आपराधिक इतिहास रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि बिहार, महाराष्ट्र, असम और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों ने भी इस मामले में इसी तरह की अर्जियां दाखिल की हैं।
मुआवजे के लिए सरकार ने मांगे 3 महीने
प्रदर्शन के दौरान सुसाइड करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने के मुद्दे पर SG मेहता ने कहा कि सरकार अपने वादे पर कायम है। हालांकि, इसके लिए एक व्यवस्थित रूपरेखा (Modality) तैयार करनी होगी, जिसके लिए सरकार को तीन महीने का समय चाहिए।
इस पर CJP की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील वृंदा ग्रोवर ने सवाल किया कि क्या इन तीन महीनों के भीतर मुआवजे का भुगतान भी कर दिया जाएगा? इसके जवाब में SG मेहता ने हामी भरते हुए कहा, “हां, भुगतान भी होगा।”
CJP ने मार्च लिया वापस, सरकार की तारीफ
सॉलिसिटर जनरल द्वारा सरकार का रुख स्पष्ट करने के बाद, उन्होंने अदालत में मौजूद CJP नेताओं से 5 सितंबर के प्रस्तावित प्रदर्शन पर फैसला लेने का आग्रह किया। इसके बाद CJP के सह-संयोजक सौरभ दास ने अदालत में कहा कि सरकार के सकारात्मक आश्वासन और सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित किए जा रहे न्यायिक आदेश की पवित्रता को ध्यान में रखते हुए, CJP अपने 5 सितंबर के मार्च के आह्वान को वापस लेना उचित समझती है।
सौरभ दास ने सरकार के सकारात्मक रुख की तारीफ की और अपने वकीलों का आभार भी जताया। इस पूरे घटनाक्रम पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने भी संतोष जताते हुए टिप्पणी की, “यदि दोनों पक्ष अच्छी भावना और सकारात्मक रुख दिखाएं, तो हर बात सुलझाई जा सकती है।”
