रीवा में बाढ़ का कहर: पानी में बही जीवनभर की गृहस्थी, 10 दिन से घरों में कैद

Rewa Flood
संजीव पॉल
संजीव पॉल

रीवा: मध्य प्रदेश के रीवा में बाढ़ और भारी जलभराव ने भयानक तबाही मचाई है। शहर के घोघर और पचमठा इलाकों में घरों के अंदर कई फीट तक पानी भर जाने से लोगों की पूरी गृहस्थी उजड़ गई है। हर साल जलभराव का दंश झेलने वाले स्थानीय लोगों का गुस्सा अब प्रशासन की अनदेखी और लापरवाही पर फूट पड़ा है।

पानी की भेंट चढ़ी महीनों की मेहनत

घोघर और पचमठा क्षेत्रों से सामने आई तस्वीरें बाढ़ की भयावहता बयान कर रही हैं। घरों में अचानक पानी घुसने से लोगों का रखा महीनों का राशन, कपड़े और महंगे इलेक्ट्रॉनिक सामान पूरी तरह बर्बाद हो गए हैं। प्रभावित परिवारों का कहना है कि उनकी जीवनभर की जमा-पूंजी और महीनों की मेहनत पानी में बह गई है। हालांकि अब जलस्तर धीरे-धीरे कम हो रहा है, लेकिन नुकसान की भरपाई करना आसान नहीं होगा।

गायत्री नगर बना ‘टापू’, 10 दिन से कैद हैं लोग

जलभराव के कारण रीवा का गायत्री नगर पूरी तरह से ‘टापू’ में तब्दील हो गया है। यहां की सड़कें गहरे पानी में डूबी हुई हैं और पिछले 10 दिनों से लोग अपने ही घरों में कैद होने को मजबूर हैं। संपर्क कट जाने के कारण लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों का आवश्यक सामान तक नसीब नहीं हो रहा है, जिससे हालात और गंभीर हो गए हैं।

स्थानीय लोगों का आक्रोश और प्रमुख मांगें

हर साल होने वाले इस जलभराव के पीछे प्रशासन के केवल ‘अस्थायी इंतजामों’ को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। भीषण मुसीबत झेल रहे स्थानीय रहवासियों ने अब केवल राहत सामग्री के बजाय समस्या के स्थायी समाधान की मांग की है। उनकी प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:

  • अवैध अतिक्रमण हटे: नालों और जल निकासी के रास्तों पर बने अवैध अतिक्रमण को तुरंत हटाया जाए।

  • नालों का चौड़ीकरण: जल निकासी को सुगम बनाने के लिए क्षेत्र के सभी प्रमुख नालों को चौड़ा किया जाए।

  • रिवर फ्रंट की चौड़ाई: रिवर फ्रंट क्षेत्र में पानी के प्राकृतिक बहाव को रोकने वाले अवरोध हटाकर पर्याप्त चौड़ाई सुनिश्चित की जाए।

  • स्थायी ड्रेनेज व्यवस्था: शहर में ऐसा पुख्ता ड्रेनेज सिस्टम बने, ताकि हल्की बारिश में भी बाढ़ जैसे हालात पैदा न हों।