बीमारू से विकास की राह पर यूपी, योगी राज में बदली तस्वीर

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सुरेन्द्र चौरसिया, बीजेपी विधायक, रामपुर कारखाना
सुरेन्द्र चौरसिया, बीजेपी विधायक, रामपुर कारखाना

लंबे समय तक देश की राजनीति में ‘बीमारू’ राज्य के रूप में पहचाना जाने वाला उत्तर प्रदेश आज अपनी विकास यात्रा के एक नए दौर से गुजर रहा है। एक समय था जब कमजोर बुनियादी ढांचा, खराब कनेक्टिविटी और कानून-व्यवस्था की बदहाली निवेश की राह में सबसे बड़ी बाधा माने जाते थे। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश ने जिस गति से अपनी तस्वीर बदली है, उसने विकास की एक नई इबारत लिख दी है।

आज यूपी में विकास की चर्चा सिर्फ लखनऊ और नोएडा की सीमाओं तक सिमटी नहीं है, बल्कि पूर्वांचल से लेकर बुंदेलखंड और पश्चिमी यूपी से तराई तक सड़कों, एक्सप्रेसवे और औद्योगिक गलियारों का जाल बिछ रहा है। सरकार का स्पष्ट विजन है कि विकास का लाभ प्रदेश के हर हिस्से तक पहुंचे और प्रत्येक जिले की अपनी एक मजबूत आर्थिक पहचान स्थापित हो।

योगी सरकार के कार्यकाल में एक्सप्रेसवे नेटवर्क को महज तेज यातायात के साधन के रूप में नहीं, बल्कि आर्थिक विकास की मुख्य रीढ़ के रूप में स्थापित किया गया है। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे और गंगा एक्सप्रेसवे जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाएं प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों को निर्बाध कनेक्टिविटी से जोड़ रही हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जोर इन एक्सप्रेसवे के आसपास औद्योगिक कॉरिडोर विकसित करने पर है, ताकि उद्योग, लॉजिस्टिक्स और रोजगार की अपार संभावनाएं पैदा की जा सकें। अब सड़क का मतलब सिर्फ यात्रा नहीं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक बाजार से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम बन गया है।

उत्तर प्रदेश के इस बदलते स्वरूप में ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ODOP) योजना ने एक अहम भूमिका निभाई है। इस विकेंद्रीकृत विकास मॉडल के जरिए सरकार ने हर जिले के पारंपरिक उत्पादों, हस्तशिल्प और कला को एक नई ब्रांडिंग दी है। विकास का यह मॉडल बड़े शहरों में भारी उद्योग लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय क्षमता को सीधे आर्थिक अवसर में तब्दील कर रहा है। इसी के चलते छोटे शहरों और कस्बों में भी निवेश और रोजगार के नए अवसर पनप रहे हैं, जिससे ग्रामीण और अर्ध-शहरी अर्थव्यवस्था को जबरदस्त मजबूती मिल रही है।

किसी भी सरकार की सफलता बड़े प्रोजेक्ट्स के साथ-साथ इस बात पर भी निर्भर करती है कि आम आदमी के जीवन में कितना सकारात्मक बदलाव आया है। प्रदेश में जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं से ग्रामीण परिवारों तक पाइप से शुद्ध पेयजल पहुंचाया जा रहा है, जिससे ग्रामीण जीवन स्तर सुधरा है और महिलाओं का रोजमर्रा का संघर्ष कम हुआ है। गांव की गली से लेकर बड़े शहरों तक सड़क, बिजली, स्वास्थ्य और आवास जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार विकास की मुख्य धारा को अंतिम पायदान तक ले जा रहा है।

यह सारा बुनियादी और आर्थिक विकास तभी सफल है जब प्रदेश में निवेशकों को एक सुरक्षित और स्थिर माहौल मिले। योगी सरकार ने कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ कर ‘सेफ्टी, स्टेबिलिटी और स्पीड’ के मॉडल पर काम किया है। हाल ही में हुई यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट इस बात का प्रमाण है कि विदेशी निवेशक भी अब उत्तर प्रदेश को एक सुरक्षित निवेश गंतव्य मान रहे हैं। एक किसान, कारीगर, छोटा व्यापारी और युवा उद्यमी जब इस स्थानीय अर्थव्यवस्था का सक्रिय हिस्सा बनता है, तभी विकास सही मायनों में व्यापक होता है।

यकीनन इस यात्रा में अभी कई पड़ाव बाकी हैं, लेकिन अगर एक्सप्रेसवे और ODOP की यह मुहिम इसी रफ्तार से आगे बढ़ती रही, तो आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश महज सबसे बड़ी आबादी वाले राज्य के बजाय देश की प्रमुख आर्थिक महाशक्ति के रूप में जाना जाएगा।