BPSC AEDO Exam में सेंटर के अंदर का खेल! ऑपरेटर गिरफ्तार

पटना: बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। अप्रैल 2026 में हुई BPSC की AEDO परीक्षा में फर्जीवाड़े की जांच कर रही आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने बायोमीट्रिक ऑपरेटर अतुल राज पांडेय को गिरफ्तार किया है। जांच में उसके परीक्षा केंद्र के भीतर तैनात होने और परीक्षार्थियों को अनुचित मदद पहुंचाने से जुड़े डिजिटल साक्ष्य सामने आने की बात कही गई है।
मामला इसलिए अहम है क्योंकि जांच का एक सिरा परीक्षा केंद्र के अंदर काम करने वाले बायोमीट्रिक स्टाफ तक पहुंचा है। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि परीक्षा में धांधली का नेटवर्क कितने केंद्रों तक फैला था और इसमें और कौन-कौन लोग शामिल थे।
सेंटर के अंदर से खेल
EOU के मुताबिक अतुल राज पांडेय की तैनाती पटना के कंकड़बाग स्थित रघुनाथ उच्च बालिका विद्यालय परीक्षा केंद्र पर बायोमीट्रिक ऑपरेटर के तौर पर थी। जांच एजेंसी का आरोप है कि उसने अपनी तैनाती और परीक्षा व्यवस्था तक मिली पहुंच का इस्तेमाल सॉल्वर गैंग के लिए किया।
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी का संपर्क परीक्षा में फर्जी परीक्षार्थियों को बैठाने और उत्तर उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क से था।
मोबाइल और चैट से मिले सुराग
जांच में डिजिटल साक्ष्यों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। EOU ने अतुल का मोबाइल परीक्षा केंद्र से जब्त किया था। इसके अलावा उसकी महिला सहकर्मी दीपिका कुमारी के मोबाइल फोन से भी परीक्षा में फर्जीवाड़े से जुड़े डेटा मिलने की बात सामने आई है।
फॉरेंसिक जांच में व्हाट्सऐप चैट और अन्य डिजिटल सामग्री की पड़ताल की गई। एजेंसी के अनुसार इनसे फर्जी परीक्षार्थियों और उत्तर उपलब्ध कराने से जुड़े संपर्कों के संकेत मिले हैं।
यही डिजिटल कड़ियां जांच को परीक्षा केंद्र के अंदर तैनात कर्मचारियों से बाहर मौजूद कथित सॉल्वर नेटवर्क तक ले जा सकती हैं।
एएन कॉलेज से मिला था शुरुआती सुराग
मामले की जांच का शुरुआती महत्वपूर्ण सुराग पटना के एएन कॉलेज परीक्षा केंद्र से मिला था। वहां बायोमीट्रिक स्टाफ अंशुप्रिया को रोशन कुमार नाम के परीक्षार्थी को उत्तर वाली पर्ची देते पकड़े जाने की बात सामने आई थी।
इसके बाद जांच आगे बढ़ी और अलग-अलग कड़ियों को जोड़ते हुए अतुल राज पांडेय का नाम सामने आया। जांच एजेंसी के अनुसार, पूछताछ में परीक्षा केंद्रों को आर्थिक लाभ के बदले प्रभावित करने से जुड़ी जानकारी मिली।
इसी परीक्षा में अनियमितताओं के सामने आने के बाद BPSC ने परीक्षा रद्द कर दी थी।
तकनीकी अनुभव बना जांच का अहम पहलू
जांच में अतुल राज के पुराने कामकाज को भी खंगाला जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक वह पहले जैमर और बायोमीट्रिक सेवाएं देने वाली कुछ कंपनियों से जुड़ा रहा था और मैनपावर उपलब्ध कराने का काम भी करता था।
जांच एजेंसी को शक है कि परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था, बायोमीट्रिक प्रक्रिया और वहां तैनात कर्मचारियों की कार्यप्रणाली की जानकारी उसके लिए नेटवर्क में उपयोगी साबित हुई।
अगर जांच में यह आरोप साबित होते हैं तो मामला सिर्फ एक कर्मचारी की संलिप्तता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह सवाल भी उठेगा कि निजी एजेंसियों के जरिए परीक्षा केंद्रों पर तैनात तकनीकी और सहायक कर्मचारियों की पृष्ठभूमि की जांच कितनी प्रभावी थी।
23 अप्रैल को दर्ज हुई थी FIR
मामले में 23 अप्रैल 2026 को श्रीकृष्णापुरी थाने में FIR दर्ज की गई थी। इसके बाद जांच EOU के स्तर पर आगे बढ़ी। अतुल राज पांडेय की गिरफ्तारी इसी जांच की कड़ी बताई जा रही है।
अब जांच एजेंसी के सामने सबसे बड़ा सवाल नेटवर्क की पूरी संरचना सामने लाने का है। परीक्षा केंद्रों पर किसे तैनात किया गया, किसके संपर्क में कौन था, कितने परीक्षार्थियों को तौर पर फायदा पहुंचाने की कोशिश हुई और इसके पीछे आर्थिक लेन-देन कितना था, इन सवालों के जवाब जांच की अगली दिशा तय करेंगे।
