40 परीक्षाएं, 9 MPPSC प्रीलिम्स, फिर मिली सरकारी नौकरी, मेहनत रंग लाई

manoj-pal-mppsc-success-story-40-exams
Prabhash Bahadur Civil Services Mentor
Prabhash Bahadur Civil Services Mentor

नर्मदापुरम: प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में एक-दो नहीं, करीब 12 साल गुजारने वाले नर्मदापुरम के मनोज पाल की कहानी उन अभ्यर्थियों के लिए खास है जो लगातार असफलताओं के बाद तैयारी छोड़ने का मन बना लेते हैं। ग्राम खपरिया के रहने वाले मनोज ने करीब 40 प्रतियोगी परीक्षाएं दीं। कई बार वह चयन के बेहद करीब पहुंचे, लेकिन अंतिम सूची में जगह नहीं बना सके।

फिर मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की राज्य सेवा परीक्षा 2024 में उनकी मेहनत रंग लाई। मनोज का चयन सहायक संचालक, वित्त विभाग के पद पर हुआ। यह सफलता उनके लिए सिर्फ एक परीक्षा पास करने का परिणाम नहीं, बल्कि लंबे समय तक आर्थिक दबाव, काम और पढ़ाई के बीच संतुलन और लगातार असफलताओं से जूझने के बाद हासिल मुकाम है।

12वीं में 50 फीसदी अंक, गांव से शुरू हुआ सफर

मनोज की शुरुआती पढ़ाई गांव में हुई। उन्होंने 12वीं तक की शिक्षा गांव से हासिल की और करीब 50 प्रतिशत अंकों के साथ परीक्षा पास की। परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि आगे की पढ़ाई बिना किसी परेशानी के जारी रखी जा सके।

इसके बावजूद मनोज ने नर्मदापुरम जाकर कॉलेज की पढ़ाई शुरू की। पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए उन्होंने बच्चों को पढ़ाना शुरू किया। इसी दौरान प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी जारी रखी।

कोरोना में मजदूरी तक करनी पड़ी

मनोज के संघर्ष का सबसे मुश्किल दौर कोरोना महामारी के दौरान आया। काम और आय के साधन प्रभावित होने के बाद उनके सामने तैयारी जारी रखने का संकट खड़ा हो गया।

आर्थिक स्थिति बिगड़ी तो वह गांव लौटे और मजदूरी कर पैसे जुटाए। इसके बाद इंदौर पहुंचे, जहां उन्होंने MPPSC की तैयारी शुरू की। यहां भी पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए बच्चों को पढ़ाया और कोचिंग में काम किया।

इन वर्षों में मनोज के लिए पढ़ाई का मतलब सिर्फ किताबों के सामने बैठना नहीं था। पढ़ाई के साथ कमाई और घर की जिम्मेदारियों को संभालना भी उनकी दिनचर्या का हिस्सा रहा।

करीब 40 परीक्षाओं में आजमाई किस्मत

मनोज ने अपने लंबे प्रतियोगी परीक्षा सफर में लगभग 40 परीक्षाओं में हिस्सा लिया। इनमें पुलिस आरक्षक, वनरक्षक, पटवारी, लेखापरीक्षक और संचालक सहित कई भर्ती परीक्षाएं शामिल रहीं।

उन्होंने कर्मचारी चयन आयोग की मल्टी-टास्किंग स्टाफ, संयुक्त उच्चतर माध्यमिक स्तर और संयुक्त स्नातक स्तर की परीक्षाओं में भी प्रयास किया। इसके अलावा MPPSC की राज्य सेवा, पंजीयक, सहायक प्राध्यापक समेत अन्य परीक्षाओं में भी हिस्सा लिया।

कई परीक्षाओं में वह आगे तक पहुंचे, लेकिन अंतिम चयन नहीं हो सका। इसके बावजूद उन्होंने तैयारी नहीं छोड़ी।

MPPSC में 9 बार प्रीलिम्स पास

मनोज के सफर का सबसे उल्लेखनीय हिस्सा MPPSC परीक्षा से जुड़ा है। उन्होंने राज्य सेवा परीक्षा में नौ बार प्रयास किया और नौों बार प्रीलिम्स परीक्षा पास की।

इनमें से आठ बार वह मुख्य परीक्षा में सफल होकर इंटरव्यू तक पहुंचे, जबकि सात बार इंटरव्यू भी दिया। इसके बावजूद अंतिम चयन लगातार दूर रहा।

आखिरकार राज्य सेवा परीक्षा 2024 में उनका चयन सहायक संचालक, वित्त विभाग के पद पर हुआ और करीब 12 साल की तैयारी का इंतजार खत्म हुआ।

परिवार भी कहने लगा था, अब काम शुरू करो

मनोज निम्न-मध्यमवर्गीय कृषक परिवार से आते हैं। परिवार ने उनकी तैयारी में भरोसा बनाए रखा, लेकिन लगातार कई वर्षों तक नौकरी नहीं मिलने से चिंता बढ़ना स्वाभाविक था।

मनोज के मुताबिक, परिवार में यह बात भी होने लगी थी कि उम्र बढ़ रही है और बहनों की शादी जैसी जिम्मेदारियां भी हैं। ऐसे में कोई काम शुरू करके घर की आर्थिक मदद करनी चाहिए।

यह दबाव सिर्फ आर्थिक नहीं था। लगातार असफल होने वाले अभ्यर्थी के लिए परिवार और समाज के सवाल भी तैयारी का हिस्सा बन जाते हैं। मनोज के सामने भी यही स्थिति थी।

तानों के बीच नहीं छोड़ी तैयारी

मनोज बताते हैं कि वह पशुपालक गड़रिया समाज से आते हैं और आसपास के लोगों को उनसे बहुत बड़ी उम्मीद नहीं थी। परीक्षा परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं आने पर उन्हें कई बार निराशा हुई।

लेकिन उनके लिए पीछे लौटना आसान विकल्प नहीं था। वह नहीं चाहते थे कि परिवार को उनकी असफलताओं को लेकर लोगों के ताने सुनने पड़ें। यही सोच उन्हें लगातार तैयारी करते रहने के लिए प्रेरित करती रही।

सुबह 6 बजे लाइब्रेरी, रात तक पढ़ाई

मनोज की तैयारी का तरीका भी काफी अनुशासित रहा। वह सुबह करीब 6 बजे लाइब्रेरी पहुंच जाते थे और रात तक पढ़ाई करते थे। दिन में खाना बनाने और खाने के लिए लौटते और फिर लाइब्रेरी चले जाते।

रात करीब 12 से 1 बजे तक पढ़ाई करने के बाद वह सुबह बच्चों को पढ़ाने के लिए कोचिंग जाते थे। इसके बावजूद रोजाना करीब 6 से 8 घंटे अपनी पढ़ाई को देते थे।

तैयारी के दौरान उन्होंने मॉक टेस्ट पर जोर दिया। पुराने प्रश्नपत्रों का विश्लेषण किया, अपनी गलतियों को पहचाना और दोस्तों के साथ विषयों पर चर्चा की। उनका फोकस सिर्फ पढ़ने पर नहीं, बल्कि अपनी तैयारी की कमियों को लगातार पहचानकर सुधारने पर रहा।

‘स्थिति बदलनी है तो पूरी ताकत से मेहनत करें’

“करीब 12 साल की तैयारी और लगभग 40 प्रतियोगी परीक्षाओं के बाद मिली यह सफलता उनके लंबे संघर्ष की कहानी बताती है।”

उनका कहना है कि अगर कोई व्यक्ति अपनी स्थिति बदलने का फैसला करता है तो उसे पूरी ताकत से मेहनत करनी चाहिए। अपनी ताकत और कमजोरियों को पहचानना और लगातार सुधार करना जरूरी है।

मनोज पाल के लिए करीब 40 परीक्षाओं का सफर आखिरकार एक नियुक्ति पत्र पर जाकर खत्म हुआ। लेकिन इस कहानी की सबसे बड़ी संख्या 40 नहीं है। नौ बार MPPSC प्रीलिम्स पास करने के बाद भी सात इंटरव्यू के बावजूद अंतिम चयन न होने पर तैयारी जारी रखना उनके संघर्ष की असली तस्वीर दिखाता है।