चुनाव से पहले मायावती का ‘स्कूल कार्ड’, बच्चों की आवाज पर सरकारों को घेरा

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Saima Siddiqui
Saima Siddiqui

लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 का वक्त जैसे-जैसे करीब आ रहा है, राजनीतिक दलों की नजर युवाओं और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी टिकती जा रही है। बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने सरकारी स्कूलों की स्थिति और बच्चों की बुनियादी सुविधाओं को लेकर सरकार पर निशाना साधा है।

मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि बच्चों को बेहतर शिक्षा और स्कूलों में जरूरी सुविधाएं दिलाने के लिए उन्हें सड़कों पर उतरकर आवाज उठानी पड़ रही है। उन्होंने सरकारों से अपील की कि बच्चों की मांगों को गंभीरता से सुना जाए और उनके खिलाफ किसी तरह के बल प्रयोग से बचा जाए।

मायावती ने उठाया ‘जेन-अल्फा’ का मुद्दा

मायावती ने अपने पोस्ट में 2013 के बाद जन्मी पीढ़ी का जिक्र करते हुए उसे ‘जेन-अल्फा’ कहा। उन्होंने कहा कि इस पीढ़ी के बच्चे और उनके माता-पिता बेहतर शिक्षा और भविष्य की उम्मीद रखते हैं, लेकिन कई जगह सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी अब भी बड़ी समस्या है।

उन्होंने खास तौर पर उत्तर प्रदेश और उत्तर भारत के राज्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि स्कूलों की स्थिति को लेकर बच्चे और उनके अभिभावक अपनी आवाज उठा रहे हैं।

भवन से लेकर शौचालय तक सुविधाओं का सवाल

बीएसपी प्रमुख ने सरकारी स्कूलों में भवन, पर्याप्त शिक्षकों, पीने के पानी, शौचालय और साफ-सफाई जैसी बुनियादी सुविधाओं का मुद्दा उठाया।

उनका कहना है कि बच्चों का समय पढ़ाई और खेलकूद में बीतना चाहिए, लेकिन उन्हें स्कूलों की मूलभूत जरूरतों के लिए आंदोलन करना पड़ रहा है। मायावती ने सरकारों से इन मांगों को समस्या के बजाय शिक्षा व्यवस्था सुधारने के अवसर के रूप में देखने की अपील की।

सरकारी स्कूलों की अनदेखी का आरोप

मायावती ने आरोप लगाया कि अलग-अलग सरकारों ने सरकारी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया। उन्होंने सरकारी स्कूलों को बंद किए जाने के मुद्दे का भी विरोध किया और कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में कमजोर तथा वंचित वर्गों के हितों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

आंबेडकर के ‘शिक्षित बनो’ संदेश का जिक्र

मायावती ने डॉ. भीमराव आंबेडकर के ‘शिक्षित बनो’ संदेश का हवाला देते हुए शिक्षा को बहुजन समाज के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने दावा किया कि बीएसपी सरकारों के दौरान उत्तर प्रदेश में कमजोर और वंचित वर्गों के कल्याण के साथ शिक्षा पर भी ध्यान दिया गया था।

उनका तर्क है कि शिक्षा के जरिए वंचित तबकों को सम्मान, अवसर और बेहतर जीवन की राह मिल सकती है।

बच्चों पर कार्रवाई नहीं, मांगों पर सुनवाई की अपील

मायावती ने उत्तर प्रदेश समेत दूसरे राज्यों की सरकारों से कहा कि शिक्षा से जुड़ी मांगों को संवेदनशीलता के साथ सुना जाए। उन्होंने स्कूलों की बुनियादी समस्याओं को दूर करने के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की।

साथ ही उन्होंने स्कूल सुविधाओं को लेकर आवाज उठा रहे बच्चों के खिलाफ बल प्रयोग नहीं करने की अपील की। उनके मुताबिक, बच्चों की शिकायतों को सुनकर शिक्षा व्यवस्था की कमियों को दूर करना ही इस तरह के विरोध का बेहतर जवाब है।

चुनावी राजनीति में शिक्षा का मुद्दा

मायावती का यह बयान ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां धीरे-धीरे तेज हो रही हैं। युवाओं, छात्रों और शिक्षा से जुड़े मुद्दे आने वाले चुनाव में राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।