वक्फ संपत्तियों पर बढ़ी चिंता, ओवैसी के वकील ने SC से मांगी जल्द सुनवाई

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Saima Siddiqui
Saima Siddiqui

वक्फ (संशोधन) अधिनियम (Waqf Amendment Act) को दी गई कानूनी चुनौती के मामले में AIMIM अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता निजाम पाशा ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट से मामले की जल्द सुनवाई की गुहार लगाई है। पाशा ने अदालत से सुनवाई की तारीख तय करने का आग्रह करते हुए चेतावनी दी कि इस अधिनियम के लागू रहने से वक्फ संपत्तियों को लेकर गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।

‘लिमिटेशन एक्ट’ और ‘वक्फ-बाय-यूजर’ पर असर

अधिवक्ता निजाम पाशा ने अदालत को बताया कि ‘लिमिटेशन एक्ट’ (परिसीमा अधिनियम) के लागू होने से उन वक्फ संपत्तियों पर तुरंत असर पड़ेगा, जिन्हें तय समय-सीमा के भीतर परिभाषित नहीं किया गया है। उन्होंने विशेष रूप से ‘वक्फ-बाय-यूजर’ (Waqf-By-User) संपत्तियों—यानी वे संपत्तियां जिनका लंबे समय से धार्मिक या धर्मार्थ कार्यों के लिए उपयोग किया जा रहा है—के प्रभावित होने की बात कही।

पाशा ने अदालत को याद दिलाया कि इस मामले में लगभग डेढ़ साल पहले एक अंतरिम आदेश पारित किया गया था, जो अभी भी लागू है। उन्होंने कहा, “अगर इन मामलों पर सुनवाई नहीं हुई, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। मैं बस सुनवाई के लिए एक तारीख की मांग कर रहा हूं।”

सुनवाई में देरी से अनिश्चितता

याचिकाकर्ता पक्ष ने दलील दी है कि अंतिम सुनवाई न होने के कारण जो अनिश्चितता बनी हुई है, उससे वक्फ संस्थानों, उनकी संपत्तियों और मुस्लिम समुदाय के अधिकारों को अपूरणीय क्षति हो रही है। नए कानून के तहत ‘वक्फ-बाय-यूजर’ संपत्तियां विशेष रूप से खतरे में बताई जा रही हैं।

क्या है वक्फ संशोधन पर विवाद?

सुप्रीम कोर्ट इस समय वक्फ (संशोधन) अधिनियम की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है, जिनमें असदुद्दीन ओवैसी भी एक प्रमुख याचिकाकर्ता हैं। विपक्षी दलों और अल्पसंख्यक संगठनों का तर्क है कि यह नया कानून वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में अनुचित हस्तक्षेप करता है और वक्फ बोर्डों की स्वायत्तता (Autonomy) को कमजोर करता है।

वहीं दूसरी ओर, केंद्र सरकार लगातार इन संशोधनों का बचाव कर रही है। सरकार का कहना है कि वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही (Accountability) लाने के लिए ये संशोधन बेहद जरूरी हैं।

अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं कि वह सुनवाई की तारीख को लेकर क्या फैसला लेता है। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले हफ्तों में इस मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध (List) किया जा सकता है। इस मामले का अंतिम फैसला देशभर में वक्फ संपत्तियों के भविष्य पर दूरगामी प्रभाव डालेगा।