Vibe Movie Review: कुणाल खेमू की कॉमेडी, प्रीति जिंटा का रौबदार अंदाज

मूवी रिव्यू: वाइब (Vibe) डायरेक्टर: कुणाल खेमू स्टारकास्ट: कुणाल खेमू, प्रीति जिंटा, स्पर्श श्रीवास्तव, वंशिका धीर, यशपाल शर्मा, दिनेश लाल यादव निरहुआ श्रेणी: हिंदी, कॉमेडी, ड्रामा अवधि: 2 घंटे 25 मिनट क्रिटिक रेटिंग: 3/5
लेखक और निर्देशक के रूप में कुणाल खेमू (Kunal Khemu) ने ‘मडगांव एक्सप्रेस’ के बाद एक बार फिर कॉमेडी का सुरक्षित लेकिन बेहद मनोरंजक रास्ता चुना है। ‘वाइब’ (Vibe) किसी गंभीर सामाजिक मुद्दे पर ज्ञान देने के बजाय दर्शकों को ढाई घंटे तक हंसाने और गुदगुदाने पर भरोसा करती है। एक सीरियस जॉनर (स्पाई थ्रिलर) को कॉमेडी के मजेदार सांचे में ढालकर कुणाल ने यह साबित कर दिया है कि वह अपनी कॉमिक टाइमिंग और स्क्रीनप्ले के साथ लगातार प्रयोग करने में सक्षम हैं।
क्या है ‘वाइब’ की कहानी?
फिल्म की कहानी दो जिगरी दोस्तों- हार्दिक (कुणाल खेमू) और बग्स (स्पर्श श्रीवास्तव) के इर्द-गिर्द घूमती है। बग्स एक एआई सॉफ्टवेयर (AI Software) बनाने वाली बड़ी कंपनी में काम करता है, जबकि हार्दिक हाल ही में रिहैब सेंटर से बाहर आया है। ड्रग्स के दलदल से निकलने में बग्स ने हार्दिक की पूरी मदद की है और उसे अपनी कंपनी में नौकरी भी दिला दी है।
लापरवाह हार्दिक की जिंदगी में नया मोड़ तब आता है, जब कंपनी में एक इंटर्न करीना (वंशिका धीर) की एंट्री होती है। हार्दिक को जिंदगी की नई उम्मीदें दिखने लगती हैं, लेकिन तभी एक बड़ा ट्विस्ट आता है। दोनों दोस्त अनजाने में एक ऐसे मामले में उलझ जाते हैं, जिसका सीधा कनेक्शन ‘नेशनल सिक्योरिटी’ (राष्ट्रीय सुरक्षा) से है। अचानक ये आम युवा एक हाई-स्टेक मिशन का हिस्सा बन जाते हैं, जिसकी कमान सख्त मैडम एच (प्रीति जिंटा) के हाथों में है।
मैडम एच अपने अनुभवी जासूसों रावल (यशपाल शर्मा) और बंसी (दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’) के जरिए हार्दिक और बग्स को ट्रेनिंग देना शुरू करती हैं। लेकिन हालात ऐसे बनते हैं कि ट्रेनिंग पूरी होने से पहले ही इन दोनों अनाड़ी दोस्तों को मोर्चे पर उतरना पड़ता है। अब वे देश को बचा पाते हैं या खुद किसी बड़ी मुसीबत में फंसते हैं, यही फिल्म का दिलचस्प हिस्सा है।
स्क्रीनप्ले और निर्देशन: फर्स्ट हाफ मजेदार, सेकंड हाफ में थोड़ा भटकी कहानी
हॉलीवुड हो या बॉलीवुड, स्पाई थ्रिलर्स आमतौर पर गंभीर होती हैं। लेकिन कुणाल खेमू ने इस चिर-परिचित कहानी को कॉमिक पंचेज और किरदारों की मस्ती से एक नई ताजगी दी है। ओपनिंग क्रेडिट्स से ही फिल्म का मिजाज साफ हो जाता है। एक दिलचस्प वॉइस-ओवर कहानी को आगे बढ़ाता है और फर्स्ट हाफ में दोनों दोस्तों की केमिस्ट्री जबरदस्त हास्य पैदा करती है।
हालांकि, फिल्म के सेकंड हाफ में जब नैशनल सिक्योरिटी और टेररिस्ट एंगल हावी होने लगता है, तब कॉमेडी का डोज थोड़ा हल्का पड़ जाता है और एक्शन सेंटर स्टेज ले लेता है। कहानी कुछ देर के लिए अपने मूल कॉमिक ट्रैक से भटकी हुई महसूस होती है, लेकिन क्लाइमैक्स में कुणाल इसे वापस अपने मजेदार टोन पर लाने में सफल रहते हैं।
शानदार म्यूजिक और बैकग्राउंड स्कोर
अमित त्रिवेदी का म्यूजिक फिल्म के अतरंगे और मॉडर्न मिजाज पर एकदम फिट बैठता है। वहीं, जॉन स्टीवर्ट एडुरी का बैकग्राउंड स्कोर फिल्म की रफ्तार को बांधे रखता है। यह एक्शन सीक्वेंस में जोश और कॉमिक पलों में मस्ती बढ़ाने का शानदार काम करता है।
अभिनय: कुणाल और स्पर्श की केमिस्ट्री ने जीता दिल
एक्टिंग के मामले में कुणाल खेमू एक बार फिर बाजी मार ले जाते हैं। उन्होंने ‘हिंदी फिल्मों वाले टिपिकल हीरो’ बनने के बजाय जानबूझकर एक डरपोक और बेवकूफ शख्स का किरदार चुना और उसे पूरी ईमानदारी से निभाया। ‘लापता लेडीज’ फेम स्पर्श श्रीवास्तव (Sparsh Shrivastava) का सहज और सरल अभिनय फिल्म का बड़ा प्लस पॉइंट है। कुणाल और स्पर्श की आपसी नोकझोंक फिल्म की जान है।
मैडम एच के रूप में प्रीति जिंटा (Preity Zinta) का रौब और आत्मविश्वास शानदार लगा है। उन्हें एक लंबे अरसे बाद इस तरह के अलहदा अंदाज में देखना सुखद है। डेब्यू कर रहीं वंशिका धीर अपने किरदार में सहज लगी हैं, जबकि यशपाल शर्मा और निरहुआ ने अपने किरदारों के साथ पूरा न्याय किया है।
क्यों देखें?
अगर आप ‘गो गोवा गॉन’ या ‘मडगांव एक्सप्रेस’ जैसी कॉमिक फिल्मों के शौकीन हैं और वीकेंड पर एक लाइट-हार्टेड स्पाई-कॉमेडी देखना चाहते हैं, तो कुणाल खेमू और स्पर्श श्रीवास्तव की मजेदार केमिस्ट्री के लिए ‘वाइब’ जरूर देखी जा सकती है।
