BJP की राह में कौन-से कांटे हैं और योगी की ताकत कहां काम आ सकती है

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अब कुछ ही महीनों का समय शेष है। त्योहारी सीजन की समाप्ति के साथ ही राज्य में राजनीतिक सरगर्मियां पूरी तरह से तेज होने जा रही हैं। एक ओर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत शीर्ष नेताओं के चुनावी दौरे शुरू होने वाले हैं, तो दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी (SP) और कांग्रेस गठबंधन सीट बंटवारे को लेकर मंथन में जुट गया है।
राष्ट्रीय दलों के अलावा क्षेत्रीय दल भी राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। सत्ता पक्ष के सहयोगी निषाद पार्टी और ओम प्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) अपने-अपने समाज के लिए आरक्षण की मांग उठाकर भाजपा पर दबाव बना रहे हैं। पश्चिमी यूपी में जयंत चौधरी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय लोक दल (RLD) की चुनावी डिमांड भी गठबंधन के समीकरणों में अहम भूमिका निभाएगी।
विधायकों से नाराजगी और प्रशासनिक सुनवाई न होने की शिकायत
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा बीते 10 सालों से उत्तर प्रदेश की सत्ता में है। लंबे समय तक सत्ता में रहने के कारण पार्टी को सत्ता विरोधी लहर (Anti-incumbency) का सामना करना पड़ रहा है। भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के आंतरिक सर्वे में मौजूदा विधायकों के खिलाफ स्थानीय स्तर पर नाराजगी की बात सामने आई है।
संगठन स्तर पर भी चुनौतियां हैं। संगठन महामंत्री बीएल संतोष और राज्य के प्रभारी विनोद तावड़े जैसे वरिष्ठ नेताओं के साथ हुई व्यक्तिगत मुलाकातों में पार्टी कार्यकर्ताओं ने साफ कहा है कि पुलिस थानों और प्रशासन में उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। प्रशासन का यह रवैया पार्टी के लिए चुनावी मौसम में एक बड़ी चुनौती बन सकता है।
डैमेज कंट्रोल: कट सकते हैं 40 फीसदी विधायकों के टिकट
कार्यकर्ताओं और जनता की इस नाराजगी को दूर करने के लिए भाजपा के केंद्रीय नेता लगातार राज्य का दौरा कर रहे हैं। कार्यकर्ताओं को अपनी पीड़ा और समस्याएं शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचाने का मंच दिया जा रहा है।
पार्टी सूत्रों के हवाले से खबर है कि एंटी-इनकम्बैंसी से निपटने के लिए भाजपा आलाकमान कड़े फैसले ले सकता है। इसके तहत राज्य के करीब 40 फीसदी मौजूदा विधायकों के टिकट काटे जाने की संभावना है, ताकि नए चेहरों के जरिए जनता की नाराजगी को दूर किया जा सके।
कानून-व्यवस्था और योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता
प्रशासनिक शिकायतों के बावजूद भाजपा के पास एक बड़ा राजनीतिक हथियार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की व्यक्तिगत लोकप्रियता है। कानून-व्यवस्था (Law and Order) उत्तर प्रदेश में हमेशा से एक अहम चुनावी मुद्दा रहा है। पूर्व में कल्याण सिंह और मायावती जैसे मुख्यमंत्री सख्त प्रशासक के तौर पर जाने जाते रहे हैं।
वर्तमान में अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई को लेकर योगी आदित्यनाथ ने जनता के बीच एक मजबूत धारणा बनाई है। यह छवि चुनाव में भाजपा के लिए सबसे बड़ा ‘प्लस पॉइंट’ मानी जा रही है।
सवर्ण मतदाताओं की नाराजगी और सामाजिक समीकरण
चुनाव से ठीक पहले यूजीसी (UGC) जैसे मुद्दों को लेकर सवर्ण मतदाताओं में नाराजगी की बातें भी सामने आई हैं। हालांकि, भाजपा रणनीतिकारों का मानना है कि यह केंद्र से जुड़ा मसला है और मतदान के दिन तक यह वर्ग पार्टी के पक्ष में ही लामबंद होगा।
सवर्णों को साधने के लिए पार्टी ने हाल ही में राज्यसभा में दो ब्राह्मण और एक राजपूत चेहरे को भेजा है। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि केंद्र सरकार आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) कोटे की आय सीमा (Income Limit) में बदलाव कर सकती है, जिसका सीधा असर यूपी के चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है।

