10 सीटें जहां 400 से भी कम वोटों से तय हुई हार-जीत, देखें पूरी लिस्ट

लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की सियासी बिसात बिछनी शुरू हो चुकी है और सभी प्रमुख राजनीतिक दल अपनी चुनावी रणनीतियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। लेकिन 2027 की लड़ाई को समझने के लिए 2022 के विधानसभा चुनाव के आंकड़ों का विश्लेषण बेहद जरूरी है। 403 सदस्यीय यूपी विधानसभा में कई सीटों पर मुकाबला इतना कांटे की टक्कर का रहा कि महज कुछ सौ वोटों का इधर-उधर होना विधायक और नतीजों की तस्वीर बदल सकता था।
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) के विश्लेषण और भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 2022 में 15 ऐसी सीटें थीं जहां जीत-हार का अंतर 1,000 वोट से भी कम रहा। वहीं 49 सीटों पर जीत का अंतर 5,000 वोटों से कम था, यानी राज्य की लगभग हर आठवीं सीट पर बेहद कड़ा मुकाबला हुआ।
सबसे कम अंतर से फैसले वाली टॉप-10 सीटें
2022 के चुनाव में सबसे नजदीकी मुकाबला बिजनौर की धामपुर सीट पर दर्ज किया गया, जहां बीजेपी के अशोक कुमार राणा ने सपा के नईम उल हसन को महज 203 वोटों से मात दी। टॉप-10 करीबी सीटों में से 6 पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और 4 पर विपक्षी गठबंधन (सपा/रालोद) के बीच सीधा घमासान रहा।
| रैंक | विधानसभा सीट | विजेता प्रत्याशी (पार्टी) | उपविजेता प्रत्याशी (पार्टी) | जीत का अंतर (वोट) |
| 1 | धामपुर | अशोक कुमार राणा (BJP) | नईम उल हसन (SP) | 203 |
| 2 | कुर्सी | सकेंद्र प्रताप वर्मा (BJP) | राकेश कुमार वर्मा (SP) | 217 |
| 3 | चांदपुर | स्वामी ओमवेश (SP) | कमलेश सैनी (BJP) | 234 |
| 4 | नहटौर | ओम कुमार (BJP) | मुंशीराम (RLD) | 258 |
| 5 | रामनगर | फरीद महफूज किदवई (SP) | शरद कुमार अवस्थी (BJP) | 261 |
| 6 | इसौली | मोहम्मद ताहिर खान (SP) | ओम प्रकाश पांडेय (BJP) | 269 |
| 7 | बिलासपुर | बलदेव सिंह औलख (BJP) | अमरजीत सिंह (SP) | 307 |
| 8 | बड़ौत | कृष्ण पाल मलिक (BJP) | जयवीर (RLD) | 315 |
| 9 | नकुड़ | मुकेश चौधरी (BJP) | धर्म सिंह सैनी (SP) | 315 |
| 10 | कटरा | वीर विक्रम सिंह (BJP) | राजेश यादव (SP) | 357 |
(स्रोत: ADR – Analysis of Vote Share & Margin of Victory, भारतीय निर्वाचन आयोग)
दूसरी तरफ: रिकॉर्ड वोटों के अंतर से दर्ज हुई जीत
जहां एक तरफ 10 सीटों पर 400 से भी कम वोटों से हार-जीत तय हुई, वहीं राज्य में कुछ ऐसी सीटें भी रहीं जहां उम्मीदवारों ने 1 लाख से 2 लाख से अधिक वोटों के भारी अंतर से रिकॉर्ड जीत हासिल की।
| रैंक | विधानसभा सीट | विजेता प्रत्याशी | पार्टी | जीत का अंतर (वोट) |
| 1 | साहिबाबाद | सुनील कुमार शर्मा | BJP | 2,14,835 |
| 2 | नोएडा | पंकज सिंह | BJP | 1,81,513 |
| 3 | दादरी | तेजपाल सिंह नागर | BJP | 1,38,218 |
| 4 | मथुरा | श्रीकांत शर्मा | BJP | 1,09,803 |
| 5 | गोरखपुर शहर | योगी आदित्यनाथ | BJP | 1,03,390 |
2027 के चुनाव में क्यों अहम होंगी ये ‘स्विंग सीटें’?
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, जिन सीटों पर जीत का फासला महज कुछ सौ वोटों का होता है, उन्हें चुनावी भाषा में ‘स्विंग सीटें’ (Swing Seats) कहा जाता है। 2027 के चुनाव में इन सीटों पर पार्टियों का मुख्य फोकस रहेगा क्योंकि:
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बूथ मैनेजमेंट: ऐसे करीबी मुकाबलों में पन्ना प्रमुख और बूथ स्तर का प्रबंधन सीधे तौर पर नतीजे प्रभावित करता है।
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उम्मीदवार का चयन: स्थानीय स्तर पर प्रत्याशी की निजी छवि और स्वीकार्यता 200-500 वोटों का अंतर आसानी से पाट सकती है।
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मतदान प्रतिशत: कुछ फीसदी अधिक या कम वोटिंग सीधे तौर पर ऐसे कड़े मुकाबलों का रुख मोड़ देती है।
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स्थानीय व जातीय समीकरण: स्थानीय स्तर पर किसी एक छोटे जातीय समूह की नाराजगी या समर्थन जीत-हार की दिशा तय कर देता है।
