‘ईरान को आसान तरीके से या कड़े रास्ते से…’, ट्रंप के बयान से बढ़ी हलचल

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी सैन्य संघर्ष को जल्द समाप्त करने के स्पष्ट संकेत दिए हैं। मंगलवार को मैरीलैंड के स्पैरो पॉइंट में एंडुरिल इंडस्ट्रीज (Anduril Industries) के एक कार्यक्रम में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को अब ईरान के साथ इस युद्ध को खत्म करना होगा। उन्होंने कहा कि वाशिंगटन जल्द ही यह तय करेगा कि इस टकराव का अंत “सीधे और आसान तरीके से (Nice way)” किया जाए या फिर “कड़े रास्ते से (Not-so-nice way)।”
ट्रंप के इस बयान को या तो कूटनीतिक समझौते या फिर एक और भीषण सैन्य अभियान के जरिए जबरन युद्ध समाप्त कराने के अल्टीमेटम के रूप में देखा जा रहा है।
‘अब मिडिल ईस्ट का बुली नहीं रहा ईरान’: सैन्य ताकत ध्वस्त होने का दावा
कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सेना ईरान के खिलाफ बेहद मजबूत स्थिति में है और ईरान की सैन्य क्षमताओं को काफी हद तक निष्प्रभावी कर दिया गया है। ट्रंप ने कहा, “उनकी कोई सेना अब नजर नहीं आ रही है। उनका पूरा ढांचा तबाह हो चुका है। वे मिडिल ईस्ट के बुली (धौंस जमाने वाले) हुआ करते थे, लेकिन अब वे वैसे नहीं रहे।”
ट्रंप ने दोहराया कि तेहरान को किसी भी सूरत में परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाएगा। अमेरिका में बढ़ती तेल और गैस की कीमतों पर उठ रहे सवालों पर उन्होंने कहा कि दुनिया को सुरक्षित रखने के लिए गैस की बढ़ी हुई कीमतें एक “छोटी कीमत” हैं और युद्ध समाप्त होते ही तेल की कीमतों में भारी गिरावट आएगी।
इस दौरान ट्रंप और एंडुरिल इंडस्ट्रीज ने एक नए ‘सॉफ्टवेयर-डिफाइंड शिपयार्ड’ की योजना का अनावरण भी किया, जो अमेरिकी नौसेना के लिए तेजी से अटैक सबमरीन (हमलावर पनडुब्बियां) बनाने में मदद करेगा।
‘वहां देश कौन चला रहा है, किसी को नहीं पता’
व्हाइट हाउस में ‘मरीन वन’ हेलिकॉप्टर पर सवार होने से पहले पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि तेहरान के साथ संकट से निपटने में उनकी सबसे बड़ी परेशानी यह है कि वहां के नेतृत्व की कई कड़ियों के खात्मे के बाद अब यह किसी को समझ नहीं आ रहा कि देश की कमान किसके हाथ में है।
ट्रंप ने कहा, “उनके पहले स्तर के नेता जा चुके हैं, उनके दूसरे स्तर के नेता भी नहीं रहे। मेरी सबसे बड़ी समस्या यह है कि किसी को पता ही नहीं कि आखिर वहां की सत्ता कौन चला रहा है।”
उल्लेखनीय है कि फरवरी 2026 में शुरू हुए अमेरिका-इजरायल और ईरान के इस सीधे संघर्ष को 8 महीने (करीब 220 दिन) बीत चुके हैं। संघर्ष की शुरुआत में ही ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत हो गई थी, जबकि उनके उत्तराधिकारी मुज्तबा खामेनेई उसी हमले में गंभीर रूप से घायल होने के बाद से सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं।
ईरान का पलटवार: अमेरिकी बयानों में ही अंतर्विरोध
ट्रंप की इस टिप्पणी पर ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पलटवार किया है। बघई ने कहा कि वाशिंगटन भली-भांति जानता है कि ईरान का निर्णय लेने वाला प्रशासनिक ढांचा कैसे काम करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी अधिकारी खुद विरोधाभासी बयानबाजी और भ्रमित संदेश दे रहे हैं।
दूसरी ओर, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने अमेरिका के साथ बातचीत को ‘अर्थहीन’ करार दिया है। उनका कहना है कि एक तरफ अमेरिका और इजरायल के हमले जारी हैं और अमेरिकी सेंट्रल कमांड की नौसैनिक नाकाबंदी के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बनाया जा रहा है, ऐसे में वार्ताओं का कोई औचित्य नहीं बचता।
उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की शर्त: यूरेनियम संवर्धन में करनी होगी बड़ी कटौती
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी मंगलवार देर रात पत्रकारों से बातचीत में वाशिंगटन का रुख साफ किया। वेंस ने कहा कि संघर्ष को समाप्त करने और स्थायी युद्धविराम के लिए ईरान को अपनी परमाणु संवर्धन क्षमता (Nuclear Enrichment Capacity) में “सार्थक” और “बड़ी” कटौती करनी होगी।
वेंस ने जोर देकर कहा कि वाशिंगटन अभी भी कूटनीतिक समाधान के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए ईरान को अपनी यूरेनियम संवर्धन संरचना को सीमित करने जैसी ठोस रियायतें देनी होंगी।
दोनों देशों ने हाल के हफ्तों में युद्ध समाप्त करने और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से पूरी तरह खोलने के लिए राजनयिक प्रस्तावों का आदान-प्रदान किया था, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप ने तेहरान के हालिया प्रस्ताव को अपर्याप्त बताते हुए खारिज कर दिया था। इस बीच, वैश्विक ऊर्जा बाजार में तेल की कीमतों में उछाल के चलते अमेरिकी मध्यावधि चुनावों (Midterm Elections) से पहले बाइडन-ट्रंप प्रशासन पर घरेलू स्तर पर भी दबाव लगातार बढ़ रहा है।

