तिजारा चुनाव में ड्रामा, हाईकोर्ट का दखल और रात 10 बजे तक वोटिंग

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अजमल शाह
अजमल शाह

राजस्थान के तिजारा नगर परिषद का सभापति चुनाव किसी सस्पेंस और थ्रिलर फिल्म की कहानी को भी पीछे छोड़ गया। हिमाचल प्रदेश से लेकर हरियाणा तक पार्षदों की दौड़, पुलिस पर गंभीर आरोप, बस का शीशा तोड़कर बाहर निकलते जनप्रतिनिधि और हाईकोर्ट के दखल के बाद रात 10 बजे तक चली वोटिंग। इस पूरे हाई-वोल्टेज सियासी ड्रामे के बाद आखिरकार कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार रामावतार सैनी ने बेहद करीबी अंतर से सभापति पद पर कब्जा जमा लिया है।

निर्दलीयों के हाथ में थी जीत की चाबी

तिजारा नगर परिषद में कुल 35 पार्षद हैं, जिनमें 31 निर्दलीय, एक कांग्रेस और तीन भाजपा समर्थित हैं। जीत पूरी तरह से निर्दलीयों के हाथ में थी।

  • चुनाव की घोषणा होते ही कांग्रेस 18 निर्दलीय पार्षदों को लेकर हिमाचल प्रदेश के कसौल पहुंच गई और निर्दलीय रामावतार सैनी को अपना समर्थन दे दिया।

  • दूसरी तरफ, भाजपा ने 16 निर्दलीय पार्षदों को अपने पाले में किया और सुभाष चंद सैनी को मैदान में उतार दिया।

बस का शीशा टूटा, पुलिस पर लगे गंभीर आरोप

असली ड्रामा तब शुरू हुआ जब हिमाचल के कसौल से कांग्रेस समर्थित पार्षदों का काफिला तिजारा के लिए रवाना हुआ। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि रास्ते में हरियाणा के पंचकूला (पिंजौर) टोल प्लाजा के पास पुलिस और अन्य लोगों ने उनकी बस को रोक लिया।

  • पार्षदों के आरोप: कांग्रेस पार्षद बबीता सैनी और हेमलता सैनी ने आरोप लगाया कि उन्हें जबरन बस से उतारने की कोशिश की गई, एक रिसॉर्ट में बंधक बनाया गया और हथियारों के बल पर डराया-धमकाया गया।

  • लाइव लोकेशन और टूटी खिड़की: कांग्रेस समर्थकों का दावा है कि लाइव लोकेशन मिलने के बाद जब वे बस के पास पहुंचे, तो पार्षदों ने बस का शीशा तोड़ दिया और उसी टूटी खिड़की से बाहर निकलकर अपनी जान बचाई।

  • पुलिस की सफाई: हालांकि, पंचकूला पुलिस ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने किसी को हिरासत में नहीं लिया था, वे केवल एक सूचना के आधार पर तथ्यों की जांच कर रहे थे।

हाईकोर्ट का दखल बना टर्निंग पॉइंट

मतदान का समय नजदीक आ रहा था और कांग्रेस पार्षद हरियाणा में फंसे थे। ऐसे में कांग्रेस जिला अध्यक्ष बलराम यादव ने तुरंत हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मतदान की समय सीमा बढ़ाने का ऐतिहासिक आदेश दिया। पहले दोपहर, फिर शाम और अंततः रात 10 बजे तक मतदान कराने की व्यवस्था की गई। यह फैसला पूरे चुनाव का सबसे बड़ा ‘टर्निंग पॉइंट’ साबित हुआ।

सांसें रोक देने वाले नतीजे

करीब 20 घंटे की जद्दोजहद और सियासी खींचतान के बाद कांग्रेस समर्थक पार्षद तिजारा के मतदान केंद्र पर पहुंचे। देर रात तक चली वोटिंग प्रक्रिया में कुल 35 पार्षदों ने मतदान किया।

जब मतपेटियां खुलीं, तो मुकाबला बेहद रोमांचक निकला:

  • रामावतार सैनी (कांग्रेस समर्थित): 18 वोट

  • सुभाष चंद सैनी (भाजपा समर्थित): 16 वोट

  • अवैध मत: 1 वोट

इस तरह, हरियाणा से लेकर राजस्थान तक चले इस भारी सियासी संघर्ष और ड्रामे के बाद कांग्रेस समर्थित रामावतार सैनी ने तिजारा नगर परिषद के सभापति की कुर्सी पर अपना कब्जा जमा लिया।