चीनी का कोटा और स्टॉक बदलने से मिठाई के दाम पर क्या असर पड़ सकता है

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Gautam Kumar Agarwal
Gautam Kumar Agarwal

नवरात्रि, दुर्गा पूजा, दशहरा और दीवाली जैसे बड़े त्योहारों के करीब आते ही देशभर में मिठाइयों की डिमांड तेज होने लगी है। इसके साथ ही चीनी की खपत भी बढ़ गई है। बाजार में चीनी की बढ़ती मांग के बीच कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग (Department of Food and Public Distribution) ने बड़ा कदम उठाया है। विभाग ने अक्टूबर के शुरुआती 15 दिनों के लिए चीनी की बिक्री का कोटा बढ़ाकर 1.40 मिलियन टन कर दिया है।

यह कोटा सितंबर के शुरुआती 15 दिनों के लिए तय किए गए 1.30 मिलियन टन से अधिक है। सरकार की कोशिश है कि त्योहारी सीजन के दौरान बाजार में चीनी की पर्याप्त सप्लाई बनी रहे, ताकि आम उपभोक्ताओं को महंगाई का सामना न करना पड़े।

जमाखोरी रोकने के लिए हर 15 दिन में तय हो रहा कोटा

चीनी की कीमतों को कृत्रिम रूप से बढ़ने (artificial inflation) से रोकने के लिए सरकार ने इसी साल सितंबर से एक नई व्यवस्था लागू की है। पहले चीनी की बिक्री के लिए पूरे महीने का कोटा एक साथ जारी कर दिया जाता था। इस पुरानी व्यवस्था का फायदा उठाकर कई बड़े कारोबारी महीने के आखिर में चीनी का स्टॉक रोक लेते थे, जिससे बाजार में सप्लाई कम हो जाती थी और कीमतें बढ़ जाती थीं।

अब सरकार हर 15 दिन में बाजार की स्थिति और डिमांड की समीक्षा करती है। इसी आधार पर बाजार में चीनी की उपलब्धता घटाई या बढ़ाई जाती है। इस नई व्यवस्था का मुख्य मकसद सप्लाई चेन को स्थिर रखना और कीमतों में अचानक होने वाले उछाल को रोकना है।

पिछले सालों के मुकाबले कैसा है अक्टूबर का कोटा?

चीनी मिलों और बाजार के आंकड़ों के अनुसार, त्योहारी सीजन हमेशा से चीनी की खपत का पीक समय रहा है। अगर पिछले दो सालों के अक्टूबर महीने के कुल कोटे पर नजर डालें, तो अक्टूबर 2025 के लिए यह कोटा 2.40 मिलियन टन रखा गया था, जबकि अक्टूबर 2024 में यह 2.55 मिलियन टन था। इस बार नई 15-दिवसीय व्यवस्था के तहत शुरुआती दो हफ्तों के लिए 1.40 मिलियन टन की मंजूरी दी गई है।

जुलाई-अगस्त की तेजी के बाद अब गिरे दाम

इससे पहले जुलाई और अगस्त के महीने में चीनी की कीमतों में अचानक तेज उछाल देखने को मिला था। बाजार में सट्टेबाजी वाली खरीदारी और आने वाले महीनों में सप्लाई कम होने की चिंताओं ने रेट बढ़ा दिए थे।

हालात को काबू में करने के लिए सरकार ने तुरंत एक्शन लेते हुए व्यापारियों के लिए चीनी का स्टॉक रखने की सीमा (Stock Limit) तय कर दी थी। इसके साथ ही कच्ची चीनी (रॉ शुगर) के आयात को भी मंजूरी दी गई। इन सख्त कदमों से सप्लाई की स्थिति में सुधार हुआ। इसी का नतीजा है कि फिलहाल चीनी की खुदरा कीमतें अपने रिकॉर्ड स्तर से 11-12% तक गिर चुकी हैं और बाजार में औसतन 57.50 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव पर बिक रही हैं।