बारिश का कोटा रहा अधूरा, मानसून ने 125 साल में बनाया कौन-सा रिकॉर्ड?

देश के कई राज्यों से मानसून की विदाई शुरू हो चुकी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा अपडेट के अनुसार, अब तक पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और पूरी दिल्ली से मानसून पूरी तरह से लौट चुका है। इसके अलावा, उत्तर प्रदेश और गुजरात के भी कुछ हिस्सों से मानसून की वापसी हो चुकी है। तकनीकी रूप से देखा जाए तो भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून यानी बारिश का मौसम अब समाप्त हो गया है।
इस साल जून से सितंबर के बीच हुई मानसूनी बारिश के आंकड़े चिंताजनक हैं। मौसम विभाग के मुताबिक, इस दौरान सामान्य से लगभग 13 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। बारिश में इतनी बड़ी कमी को सूखे की स्थिति के तौर पर देखा जाता है। आंकड़ों के अनुसार, साल 2001 के बाद से यह चौथी सबसे कम मानसूनी बारिश है, जबकि 1901 के बाद से यह 13वीं सबसे कम बारिश वाला मानसून रहा है।
सर्दियों की बारिश पर IMD का क्या है अनुमान?
दक्षिण-पश्चिम मानसून के बाद अब मौसम विभाग ने सर्दियों के मानसून (उत्तर-पूर्वी मानसून) को लेकर पूर्वानुमान जारी किया है। IMD के मुताबिक, 15 से 21 अक्टूबर के बीच उत्तर-पूर्वी मानसून दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में प्रवेश करेगा, जिससे स्थिति कुछ बेहतर होने की उम्मीद है।
अक्टूबर से दिसंबर की अवधि के दौरान तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा क्षेत्र, केरल और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में ‘सामान्य’ बारिश होने का अनुमान है।
अक्टूबर-दिसंबर में भारत के अन्य हिस्सों का मिजाज
देश के बाकी हिस्सों के लिए IMD का पूर्वानुमान बहुत राहत देने वाला नहीं है। अक्टूबर से दिसंबर के बीच भारत के अधिकतर हिस्सों में ‘सामान्य से कम’ बारिश होने की आशंका है।
हालांकि, उत्तर-पश्चिम भारत (पंजाब, हरियाणा के कुछ हिस्से, उत्तराखंड, हिमाचल और जम्मू-कश्मीर) और प्रायद्वीपीय भारत के दक्षिणी हिस्सों में इस दौरान सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है। पंजाब और प्रायद्वीपीय भारत के कई जिलों को इस गर्मियों के मानसून में भारी बारिश की कमी के कारण सूखे जैसे हालात का सामना करना पड़ा था।
अल नीनो के कारण कम हुई बारिश
इस साल जून से सितंबर के बीच भारत में दीर्घावधि औसत (LPA) की 87.4 फीसदी ही बारिश हुई। मौसम विभाग के अनुसार, देश में कुल 759.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य बारिश 868.6 मिलीमीटर मानी जाती है।
आईएमडी (IMD) ने अपने मासिक पूर्वानुमान में स्पष्ट किया है कि इस साल बारिश की कमी का मुख्य कारण ‘अल नीनो’ (El Nino) का प्रभाव था। उष्णकटिबंधीय प्रशांत क्षेत्र में जून महीने में अल नीनो की स्थिति उभरी थी, जो समय के साथ और मजबूत होती गई। मौसम विभाग का कहना है कि मौजूदा समय में अल नीनो की स्थिति मजबूत बनी हुई है और इसके मार्च 2027 तक बने रहने की संभावना है।
बता दें कि इससे पहले 29 मई को जारी पूर्वानुमान में आईएमडी ने 90 फीसदी बारिश की उम्मीद जताई थी, जबकि 13 अप्रैल को विभाग ने 92 फीसदी बारिश का अनुमान लगाया था।

