लद्दाख की मांगों पर नहीं बनी बात, सोनम को अब संशोधित मसौदे का इंतजार

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Saima Siddiqui
Saima Siddiqui

 लद्दाख के अधिकारों, भविष्य और पूर्ण राज्य के दर्जे की मांग को लेकर केंद्र सरकार और स्थानीय प्रतिनिधियों के बीच बातचीत में फिलहाल असहमति बरकरार है। पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) ने स्पष्ट किया है कि लद्दाख के नेता गृह मंत्रालय (MHA) के साथ हाल ही में हुई बैठक के नतीजों से संतुष्ट नहीं हैं।

‘प्रस्ताव और मांग में जमीन-आसमान का अंतर’

सोनम वांगचुक ने बताया कि लद्दाख के प्रतिनिधियों ने केंद्र को जो मसौदा सौंपा था और गृह मंत्रालय की ओर से जवाब में जो प्रस्ताव दिया गया है, उनके बीच काफी ज्यादा फासला है। उन्होंने कहा, “यह अंतर कोई 19-20 का नहीं है, बल्कि जमीन और आसमान का है।”

इस भारी अंतर के चलते लद्दाख के नेताओं में चिंता का माहौल है। अब सभी नेता और प्रतिनिधि गृह मंत्रालय की ओर से एक संशोधित मसौदा (Revised Draft) मिलने का इंतजार कर रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि दोनों पक्षों के बीच मतभेद कम करने की क्या गुंजाइश है।

क्या हैं लद्दाख के लोगों की मुख्य मांगें?

लद्दाख के प्रतिनिधि लंबे समय से क्षेत्र के अधिकारों और अपनी पहचान बचाने के लिए आंदोलन कर रहे हैं। सोनम वांगचुक और स्थानीय नेताओं की केंद्र सरकार से मुख्य रूप से चार प्रमुख मांगें हैं:

  1. पूर्ण राज्य का दर्जा: लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश (UT) से हटाकर पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए, ताकि चुनी हुई स्थानीय सरकार अपने क्षेत्र से जुड़े अहम फैसले खुद ले सके।

  2. संविधान की छठी अनुसूची (Sixth Schedule): आदिवासी बहुल लद्दाख में जमीन, स्थानीय संसाधनों और सदियों पुरानी सांस्कृतिक परंपराओं की रक्षा के लिए इसे संविधान की छठी अनुसूची में शामिल किया जाए।

  3. स्थानीय प्रतिनिधित्व: स्थानीय समुदाय यह सुनिश्चित करना चाहता है कि उनके क्षेत्र के भविष्य से जुड़े हर छोटे-बड़े फैसले में उनकी सीधी भागीदारी हो।

  4. नौकरियों में आरक्षण: सरकारी नौकरियों में केवल स्थानीय युवाओं को पर्याप्त अवसर और आरक्षण (Reservation) मिले।

यद्यपि, केंद्र सरकार ने जून 2025 में लद्दाख के लिए नौकरी और स्थानीय पहचान से जुड़े कुछ नियम अधिसूचित किए थे, लेकिन सोनम वांगचुक और आंदोलनकारी नेताओं का मानना है कि यह उनकी व्यापक मांगों का स्थायी समाधान नहीं है।