सोने पर ₹1,794 प्रति ग्राम, चांदी पर ₹26,859 प्रति किलो, जानें नया रिफंड

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Gautam Kumar Agarwal
Gautam Kumar Agarwal

भारतीय ज्वैलरी निर्यातकों (Jewellery Exporters) को सरकार की तरफ से एक झटका लगा है। वित्त मंत्रालय ने सोने और चांदी के गहनों के निर्यात (Export) पर मिलने वाले ड्यूटी ड्रॉबैक की दरों में कटौती कर दी है। नई दरों के लागू होने के बाद गोल्ड ज्वैलरी पर मिलने वाले रिफंड में 3.1 प्रतिशत और चांदी के गहनों पर करीब 9 प्रतिशत की कमी आई है।

यह फैसला ऐसे समय आया है जब महज तीन महीने पहले ही जुलाई में सरकार ने बढ़ती लागत से राहत देने के लिए इन दरों को लगभग दोगुना कर दिया था। अब वित्त मंत्रालय ने नई दरों को लेकर आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है।

गोल्ड और सिल्वर पर अब कितना मिलेगा रिफंड?

वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, सोने के गहनों के एक्सपोर्ट पर ड्यूटी ड्रॉबैक रेट अब 1,851.99 रुपये प्रति ग्राम से घटाकर 1,794.11 रुपये प्रति ग्राम कर दिया गया है।

चांदी के गहनों और चांदी से बनी कुछ अन्य वस्तुओं के एक्सपोर्ट पर मिलने वाले रिफंड में बड़ी कटौती हुई है। इसकी दर 29,501.09 रुपये प्रति किलोग्राम से कम करके 26,859.02 रुपये प्रति किलोग्राम तय की गई है।

दरों में कटौती की क्या है वजह?

इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के सचिव सुरेंद्र मेहता ने इस कटौती का मुख्य कारण सोने-चांदी की कीमतों में आई हालिया गिरावट को बताया है। उनके मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने-चांदी के दाम कम होने से इन पर लगने वाली वास्तविक इंपोर्ट ड्यूटी (आयात शुल्क) भी घट गई है।

सुरेंद्र मेहता ने बताया कि ड्यूटी ड्रॉबैक की दरें प्रतिशत के हिसाब से तय नहीं थीं, बल्कि एक निश्चित रकम के रूप में लागू थीं। सोने-चांदी की कीमतें घटने के बाद रिफंड की दरों को सही अनुपात में लाना जरूरी हो गया था, जिसके चलते सरकार ने यह कदम उठाया है।

जुलाई में निर्यातकों को मिला था बंपर फायदा

इससे पहले इसी साल जुलाई में सरकार ने चुनिंदा सोने और चांदी के गहनों के लिए ड्यूटी ड्रॉबैक की दरें लगभग दोगुनी कर दी थीं। उस वक्त सोने के गहनों और उनके हिस्सों पर मिलने वाला रिफंड 773.17 रुपये प्रति ग्राम से बढ़ाकर 1,851.99 रुपये प्रति ग्राम किया गया था। चांदी के गहनों और वस्तुओं पर रिफंड 14,990.66 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़ाकर 29,501.09 रुपये प्रति किलोग्राम कर दिया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य वैश्विक अनिश्चितता और बढ़ती लागत के बीच भारतीय निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाए रखना था।

क्या होता है ड्यूटी ड्रॉबैक?

निर्यातकों को उन इनपुट या कच्चे माल पर चुकाए गए कस्टम और एक्साइज ड्यूटी का रिफंड मिलता है, जिनका इस्तेमाल निर्यात के लिए सामान बनाने में किया जाता है। इस व्यवस्था को ड्यूटी ड्रॉबैक कहा जाता है। इससे प्रोडक्शन कॉस्ट (उत्पादन लागत) का कुछ हिस्सा कारोबारियों को वापस मिल जाता है, जिससे उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपना माल बेचने में आर्थिक मदद मिलती है।