संविधान और वोट के अधिकार की लड़ाई के लिए क्यों चुना गया सीतापुर? जानें इनसाइड स्टोरी

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साक्षी चतुर्वेदी
साक्षी चतुर्वेदी

संविधान और मताधिकार की रक्षा की मांग को लेकर सीतापुर के सिधौली विधानसभा क्षेत्र के गनेशपुर में गांधी जयंती पर शुरू हुआ तीन दिवसीय उपवास सत्याग्रह अब चर्चा का विषय बन गया है। लोक आंदोलन न्यास की कार्यकारी अध्यक्षा एवं वरिष्ठ समाजसेवी कल्पना ईनामदार के अनशन और इंडियन पीपल्स फ्रंट (IPF) के अध्यक्ष पं. शेखर दीक्षित की मौजूदगी ने इस आंदोलन को एक व्यापक राजनीतिक और सामाजिक मुद्दे से जोड़ दिया है। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों को लेकर शुरू हुए इस आंदोलन के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इसके लिए सीतापुर को ही क्यों चुना गया?

सीतापुर और ग्रामीण इलाके को चुनने की रणनीति

गनेशपुर में सत्याग्रह का आयोजन किसी बड़े शहर या राजधानी के बजाय ग्रामीण इलाके में किया गया। आयोजकों के अनुसार, सत्याग्रह में हजारों महिलाओं के साथ किसान, ग्रामीण और विभिन्न संगठनों के लोग पहुंचे। इससे आंदोलन के जरिए ग्रामीण समाज, खासकर महिलाओं और आम मतदाताओं तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश दिखाई देती है।

मतदाता सूची से जुड़े सवाल ग्रामीण क्षेत्रों के लिए भी महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि सूची में नाम होना या गलत तरीके से नाम कटना सीधे मतदान के अधिकार को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, सीतापुर को चुनने के पीछे आयोजकों की कोई स्पष्ट रणनीति सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है।

कल्पना ईनामदार और शेखर दीक्षित की भूमिका

इस पूरे आंदोलन में कल्पना ईनामदार अनशन के जरिए नैतिक और सामाजिक चेहरा बनी हैं। उन्होंने संविधान की रक्षा के लिए आखिरी सांस तक लड़ने की बात कही है। उनका कहना है कि इस आंदोलन का उद्देश्य किसी पर व्यक्तिगत आरोप लगाना नहीं, बल्कि चुनाव और मतदाता सूची से जुड़े ठोस दस्तावेजी सवालों की निष्पक्ष जांच कराना है।

वहीं, IPF अध्यक्ष पं. शेखर दीक्षित इस मुद्दे को राजनीतिक जवाबदेही और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जोड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि वोट के अधिकार पर डाका मतलब बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के संविधान पर डाका है। शेखर दीक्षित ने चुनाव आयोग पर अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर किसी विशेष राजनीतिक दल को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई है।

निष्पक्ष जांच की उठी मांग

राष्ट्रीय किसान मंच के प्रभारी मोहित मिश्रा ने भी इस आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि मतदाता सूची और चुनावों से जुड़े जिन मामलों में ठोस सवाल उठे हैं, उनकी सक्षम संवैधानिक, वैधानिक या न्यायिक मंच पर निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

आगे की राह: 31 अक्टूबर को नैमिष में जनसभा

सीतापुर से शुरू हुए इस अभियान की अगली दिशा भी अहम मानी जा रही है। आयोजकों के अनुसार, आज (31 अक्टूबर) नैमिष में एक बड़ी जनसभा प्रस्तावित है। इसके बाद नवंबर में फिर उपवास सत्याग्रह का क्रम चलने की चर्चा है।

फिलहाल सीतापुर का गनेशपुर संविधान, मताधिकार और चुनावी प्रक्रिया को लेकर एक नई बहस का केंद्र बन गया है। अब सभी की नजरें नैमिष जनसभा और आंदोलन के अगले चरण पर टिकी हैं।