क्या है Form-7 विवाद, सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को दिया जांच का निर्देश

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गौरव त्रिपाठी
गौरव त्रिपाठी

उत्तर प्रदेश में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान लोगों के नाम काटने के लिए बड़ी संख्या में फॉर्म-7 जमा किए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग (EC) को जांच के आदेश दिए हैं। अदालत ने आयोग से कहा है कि वह यूपी में फॉर्म-7 से जुड़ी इन शिकायतों की जांच कर जरूरी सुधार करे और अपनी रिपोर्ट दाखिल करे।

एक खास समुदाय को निशाना बनाने का आरोप

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि यूपी के एक विधानसभा क्षेत्र में एक विशेष समुदाय के लोगों को निशाना बनाकर 32 फॉर्म-7 जमा किए गए थे। इनमें से दो फॉर्म पर बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के हस्ताक्षर भी मौजूद थे। वकील ने दलील दी कि तेलंगाना और कर्नाटक में ऐसी ही शिकायतों पर एफआईआर (FIR) दर्ज करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन उत्तर प्रदेश में अब तक ऐसी कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

याचिकाकर्ता ने याद दिलाया कि 5 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने यूपी, छत्तीसगढ़ और केरल में बड़ी संख्या में फॉर्म-7 जमा होने की शिकायतों पर जवाब मांगा था। उनका दावा है कि छत्तीसगढ़ और केरल के मामलों का समाधान हो चुका है, लेकिन यूपी में यह समस्या अब भी बनी हुई है।

चुनाव आयोग का पक्ष: ‘किसी का नाम नहीं काटा गया’

चुनाव आयोग की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील डीएस नायडू ने अदालत में स्वीकार किया कि केरल और छत्तीसगढ़ में बड़ी संख्या में फॉर्म-7 जमा हुए थे। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि आयोग के अधिकारियों ने जब इनकी जांच की, तो ये आवेदन गलत पाए गए। नायडू ने अदालत को आश्वस्त किया कि इन आवेदनों के आधार पर किसी भी व्यक्ति का नाम वोटर लिस्ट से नहीं काटा गया है।

यूपी के मुद्दे पर चुनाव आयोग ने कहा कि यदि कोई शिकायत है, तो उसे औपचारिक रूप से दर्ज कराया जाना चाहिए। शिकायत मिलने पर आयोग उसकी पूरी जांच करेगा।

सुप्रीम कोर्ट का निर्देश

तीन जजों की पीठ ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह यूपी में वोटर लिस्ट से जुड़ी जिन गड़बड़ियों का दावा कर रहे हैं, उसकी जानकारी सीधे चुनाव आयोग को सौंपें। इसके साथ ही पीठ ने आयोग को निर्देश दिया कि जिन मामलों का अब तक समाधान नहीं हुआ है, उनकी जांच की जाए और आवश्यक सुधार कर कोर्ट में रिपोर्ट पेश की जाए।

केरल में SIR की मियाद बढ़ाने से इनकार

इस सुनवाई के दौरान अदालत ने केरल में SIR प्रक्रिया पूरी करने की समय सीमा बढ़ाने से इनकार कर दिया। याचिकाकर्ता की मांग थी कि कई लोगों को अभी भी वोटर लिस्ट में अपना नाम जुड़वाने या सुधार कराने की ज़रूरत है। इस पर पीठ ने स्पष्ट किया कि ऐसे लोग सीधे चुनाव आयोग को अपना आवेदन दे सकते हैं और आयोग उनके मामलों की जांच करेगा।