बांग्लादेश की मांग पर भारत का जवाब, हसीना के लौटने की तारीख तय नहीं

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना (Sheikh Hasina) के प्रत्यर्पण (Extradition) का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। बांग्लादेश की लगातार उठ रही औपचारिक मांगों के बीच भारत ने अपना रुख पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है।
बांग्लादेश की राजधानी ढाका में आयोजित ‘बंगाल की खाड़ी संवाद 2026’ (Bay of Bengal Dialogue) में भारतीय उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने दो टूक शब्दों में कहा है कि शेख हसीना के प्रत्यर्पण को लेकर कोई समयसीमा (Deadline) फिक्स नहीं की जा सकती।
‘प्रत्यर्पण संधि के तहत चल रही कानूनी समीक्षा’ भारतीय उच्चायुक्त ने स्पष्ट किया कि भारत और बांग्लादेश के बीच 2013 में प्रत्यर्पण संधि हुई थी, जिसमें 2016 में कई संशोधन किए गए थे।
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त्रिवेदी ने कहा कि इस संधि के प्रावधानों के अनुसार, प्रत्यर्पण के मामले में कानूनी प्रक्रिया और समीक्षा फिलहाल जारी है।
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उन्होंने स्पष्ट किया कि इस कानूनी प्रक्रिया के पूरी होने के बाद ही शेख हसीना के प्रत्यर्पण पर कोई अंतिम फैसला लिया जाएगा, इसलिए फिलहाल इसके लिए कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई जा सकती।
भारत ने क्यों दी थी शरण? शेख हसीना को भारत में शरण देने के मुद्दे पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में उच्चायुक्त त्रिवेदी ने विस्तार से हालात बताए।
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उन्होंने कहा कि अगस्त 2024 में जब बांग्लादेश में छात्र आंदोलन उग्र हुआ और हिंसा-आगजनी के चलते सरकार गिरी, तब शेख हसीना देश की प्रधानमंत्री थीं।
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बिगड़ते हालात में उन्हें देश छोड़ना पड़ा और वह बांग्लादेश के ही विमान से भारत आई थीं।
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त्रिवेदी ने स्पष्ट किया, “वह खुद भारत आई थीं, भारतीय वायुसेना या थलसेना ने उन्हें रेस्क्यू (बचाकर) करके नहीं निकाला था।”
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उन्होंने कहा कि चूंकि वह उस समय एक संप्रभु राष्ट्र की प्रधानमंत्री थीं, इसलिए उन्हें भारत में एंट्री देने के अलावा कोई और विकल्प नहीं था। उच्चायुक्त ने अंदेशा जताया कि अगर उन्हें भारत आने नहीं दिया जाता, तो आज न जाने भारत और बांग्लादेश में क्या हालात होते।
हसीना के कारण दोनों देशों के संबंधों में आई खटास शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद बांग्लादेश और भारत के कूटनीतिक रिश्तों में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया है।
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8 अगस्त 2024 को मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने कार्यभार संभाला। इस 18 महीने के कार्यकाल में दोनों देशों के संबंध काफी तनावपूर्ण रहे।
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अंतरिम सरकार के दौरान शेख हसीना की अवामी लीग पार्टी को भंग कर दिया गया और राजनयिक नोट भेजकर भारत से उनके प्रत्यर्पण की मांग की गई।
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इसके बाद 12 फरवरी 2025 को हुए चुनावों (जिनमें अवामी लीग को हिस्सा नहीं लेने दिया गया) में जीत हासिल कर तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) सत्ता में आई।
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अब नई तारिक रहमान सरकार ने भी भारत से शेख हसीना के प्रत्यर्पण की जोरदार मांग की है।
शेख हसीना और पूर्व गृह मंत्री को मिल चुकी है मौत की सजा अगस्त 2024 से ही भारत में रह रहीं शेख हसीना की मुश्किलें उनके देश में कम होने का नाम नहीं ले रही हैं।
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नवंबर 2025 में बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) ने उन्हें मौत की सजा सुनाई है।
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उन पर 2024 के छात्र आंदोलन को उकसाने, हत्या का आदेश देने, प्रदर्शनकारियों पर अत्याचार रोकने में विफल रहने और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप साबित होने का दावा किया गया है।
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उनके साथ तत्कालीन गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को भी मौत की सजा सुनाई गई है।
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मामले में पूर्व पुलिस प्रमुख चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून सरकारी गवाह बन गए, जिसके चलते उन्हें 5 साल की सजा दी गई है।
अब बांग्लादेश की मौजूदा सरकार इसी सजा पर अमल करने के लिए शेख हसीना को भारत से वापस सौंपने का दबाव बना रही है।

