रुपया 97 के करीब ; तेल कंपनियों को सीधे डॉलर, सट्टेबाजी पर सख्ती

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में जारी तेज गिरावट को थामने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शनिवार को कड़े कदमों का ऐलान किया है। एक डॉलर की कीमत 96.78 रुपये तक पहुंच गई है, जो मई में दर्ज 96.95 रुपये के ऑल-टाइम लो (रिकॉर्ड निचले स्तर) के बिल्कुल करीब है। मुद्रा बाजार में रुपये के कमजोर होने पर दांव लगाने वाले ट्रेडर्स पर लगाम कसने के लिए केंद्रीय बैंक ने ट्रेडिंग नियमों को बेहद सख्त कर दिया है। इसके अलावा, विदेशी मुद्रा की मांग घटाने के लिए 12 अक्टूबर से सरकारी तेल कंपनियों को सीधे रिजर्व बैंक की ओर से डॉलर उपलब्ध कराए जाएंगे।
सट्टेबाजी रोकने के लिए RBI के 3 बड़े नियम
मुद्रा बाजार में बिना किसी वास्तविक जरूरत के डॉलर-रुपये की खरीद-बिक्री पर दांव लगाने वालों पर शिकंजा कसते हुए रिजर्व बैंक ने तीन प्रमुख दिशा-निर्देश जारी किए हैं:
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ट्रेडिंग लिमिट में 95% की कटौती: बिना किसी वास्तविक आयात या निर्यात (Underlying Exposure) के डॉलर-रुपया कॉन्ट्रैक्ट की सीमा को $100 मिलियन से घटाकर सीधे $5 मिलियन कर दिया गया है।
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कैंसिल करके दोबारा बुक करने पर रोक: ट्रेडर्स द्वारा कॉन्ट्रैक्ट कैंसिल करने के बाद उसी एक्सपोजर पर बार-बार नया कॉन्ट्रैक्ट बुक करने के चलन को बंद कर दिया गया है। अब एक बार सौदा रद्द होने पर दोबारा बुकिंग नहीं की जा सकेगी।
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20% कैश मार्जिन अनिवार्य (FERR): यदि कोई ट्रेडर $2 मिलियन से अधिक का डॉलर खरीद कॉन्ट्रैक्ट करता है, तो उसे कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू का 20 प्रतिशत कैश RBI के पास मार्जिन के रूप में जमा रखना होगा।
12 अक्टूबर से तेल कंपनियों को सीधे डॉलर देगा RBI
रुपये पर दबाव कम करने के लिए केंद्रीय बैंक ने तेल कंपनियों के लिए विशेष व्यवस्था की है। 12 अक्टूबर से इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) को डॉलर की आपूर्ति सीधे रिजर्व बैंक करेगा। ये तीनों कंपनियां कच्चे तेल के आयात के लिए हर रोज खुले बाजार से भारी मात्रा में डॉलर खरीदती हैं, जिससे बाजार में रुपये पर सीधा दबाव बनता है। अब यह मांग ओपन मार्केट से हट जाएगी, जिससे रुपये को सहारा मिलेगा।
4 हफ्ते में 51 अरब डॉलर घटा विदेशी मुद्रा भंडार
रुपये की गिरावट की रफ्तार को थामने के लिए रिजर्व बैंक लगातार अपने खजाने से डॉलर बेच रहा है। इस दखल के कारण भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में पिछले चार हफ्तों के भीतर 51 अरब डॉलर की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
2 अक्टूबर को समाप्त हुए हफ्ते में ही विदेशी मुद्रा भंडार 12.95 अरब डॉलर घटकर 734.60 अरब डॉलर पर आ गया। इससे पहले 4 सितंबर को भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 785.70 अरब डॉलर के रिकॉर्ड उच्चतम स्तर पर था।
गिरावट की मुख्य वजहें और आम जनता पर असर
रुपये में जारी गिरावट के पीछे तीन प्रमुख कारण हैं:
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विदेशी निवेशकों (FII) की बिकवाली: विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय शेयर बाजार से लगातार पूंजी निकालकर अमेरिकी बाजार में ले जा रहे हैं।
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कच्चे तेल की कीमतें: अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल महंगा होने के कारण भारत का आयात बिल बढ़ रहा है।
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मजबूत अमेरिकी डॉलर: अमेरिका में ब्याज दरें ऊंची बने रहने के चलते वैश्विक स्तर पर डॉलर मजबूत स्थिति में है।
रुपये के कमजोर होने से विदेश यात्रा, विदेशों में पढ़ाई, इलेक्ट्रॉनिक्स और आयातित सामान महंगे हो जाएंगे। साथ ही कच्चे तेल के महंगा होने से घरेलू बाजार में ईंधन कीमतों पर दबाव बढ़ेगा। हालांकि, बाजार जानकारों का मानना है कि RBI के इन कड़े नियमों से करेंसी मार्केट में सट्टेबाजी थमेगी और रुपये को 97 प्रति डॉलर के स्तर को पार करने से रोकने में मदद मिलेगी।

