Prabowo को मिल सकता है प्रतिद्वंद्वी? Dedi Mulyadi पर दुनिया की नजर

इंडोनेशिया की राजनीति में वेस्ट जावा के 55 वर्षीय गवर्नर देदी मुल्यादी (Dedi Mulyadi) की तेजी से बढ़ती लोकप्रियता ने देश के राजनीतिक हलकों में नई हलचल पैदा कर दी है। कभी मोटरसाइकिल टैक्सी ड्राइवर रहे और अब देश के सबसे अधिक आबादी वाले प्रांत का नेतृत्व कर रहे देदी को सोशल मीडिया पर उनकी जबर्दस्त सक्रियता के कारण “गवर्नर कोंटेन” (कंटेंट गवर्नर) के नाम से जाना जाता है। हालिया चुनावी सर्वेक्षणों में राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो (Prabowo Subianto) पर उनकी भारी बढ़त ने इस बात की चर्चाएं तेज कर दी हैं कि क्या वे 2029 के राष्ट्रपति चुनाव में खुद अपनी ही पार्टी ‘गेरिंद्रा’ (Gerindra) के अध्यक्ष और मौजूदा राष्ट्रपति के सामने सीधे प्रतिद्वंद्वी के तौर पर उभर सकते हैं।
सर्वे में मौजूदा राष्ट्रपति से निकले आगे, 95% से अधिक संतुष्टि रेटिंग
सैफुल मुजानी रिसर्च एंड कंसल्टिंग (SMRC) द्वारा जुलाई में किए गए एक सिमुलेशन में देदी मुल्यादी को बहु-उम्मीदवार राष्ट्रपति पसंद परीक्षण में 35 प्रतिशत समर्थन मिला, जबकि राष्ट्रपति प्रबोवो महज 14.5 प्रतिशत पर सिमट गए। इसके बाद अगस्त में टेम्पो डेटा साइंस (Tempo Data Science) के एक सर्वेक्षण में भी यही रुझान दिखा, जहां देदी को 40 प्रतिशत से अधिक और प्रबोवो को करीब 15 प्रतिशत लोगों का समर्थन मिला।
लेम्बागा सुरवेई इंडोनेशिया (LSI) के सर्वेक्षण के अनुसार, वेस्ट जावा में देदी के कामकाज से संतुष्टि का स्तर 95.4 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। हालांकि, अगस्त के अंत में ‘मीडियन’ (Median) द्वारा कराए गए एक देशव्यापी सर्वेक्षण में तस्वीर थोड़ी अलग रही, जिसमें प्रबोवो 32.4 प्रतिशत के साथ पहले, देदी 20.6 प्रतिशत के साथ दूसरे और पूर्व जकार्ता गवर्नर अनीस बासवेदान 20.5 प्रतिशत के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
92 लाख सब्सक्राइबर्स और ‘जमीनी जुड़ाव’ बनी मुख्य ताकत
देदी मुल्यादी के मुख्य यूट्यूब चैनल पर 92 लाख (9.2 मिलियन) से अधिक सब्सक्राइबर्स हैं और उनके वीडियो को हर महीने करोड़ों व्यूज मिलते हैं। वे पारंपरिक भाषणों के बजाय सीधे जनता के बीच पहुंचते हैं—पड़ोस के विवादों में दखल देते हैं, बुजुर्गों को नकद सहायता बांटते हैं और हाल ही में उन्होंने झपटमारों को पकड़ने वालों को 5 करोड़ रुपिया (करीब 3,200 अमेरिकी डॉलर) का निजी इनाम देने का ऐलान कर सुर्खियां बटोरी थीं।
एलएसआई के कार्यकारी निदेशक दयादी हनान के अनुसार, देदी की सबसे बड़ी पूंजी उनकी ‘स्वाभाविकता’ (Authenticity) है, जो पूर्व राष्ट्रपति जोको विडोडो (जोकोवी) की शुरुआती कार्यशैली से मेल खाती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि देदी का यह उभार सिर्फ उनकी सोशल मीडिया छवि का परिणाम नहीं है, बल्कि प्रबोवो प्रशासन की नीतियों से जनता के एक बड़े वर्ग में बन रहे असंतोष और विकल्प की तलाश को भी दर्शाता है।
अधिकार क्षेत्र से बाहर जाने पर ‘ऑफसाइड’ होने के आरोप
देदी की बढ़ती सक्रियता ने अब गेरिंद्रा पार्टी और जकार्ता के सत्ता प्रतिष्ठान में असहजता पैदा करनी शुरू कर दी है। अगस्त में 7.7 तीव्रता के भूकंप के बाद देदी अपने प्रांत की सीमाओं से बाहर जाकर पूर्वी नुसा तेंगारा (East Nusa Tenggara) में खुद राहत सामग्री बांटने पहुंच गए थे। आलोचकों और विश्लेषकों का कहना है कि वे अपनी प्रांतीय सीमाओं से परे जाकर राष्ट्रीय स्तर पर छवि चमकाने की कोशिश कर रहे हैं।
नेशनल रिसर्च एंड इनोवेशन एजेंसी (BRIN) के शोधकर्ता वासिस्तो रहाजो जती के मुताबिक, गेरिंद्रा में प्रबोवो के करीबी घेरे में देदी के इन कदमों को 2029 के आम चुनाव की राजनीतिक तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। देदी 2023 में ही गोलकर पार्टी छोड़कर गेरिंद्रा में शामिल हुए थे।
2029 का गणित: गठबंधन, बगावत या नया मोर्चा?
गेरिंद्रा के दैनिक कार्यकारी अध्यक्ष सुफमी दास्को अहमद ने सर्वेक्षणों के इस अंतर को खारिज करते हुए कहा कि सर्वे के आंकड़े समय-समय पर बदलते रहते हैं। खुद देदी मुल्यादी भी 2029 की अपनी महत्वाकांक्षाओं पर सीधा जवाब देने से बच रहे हैं और उनका कहना है कि वे अभी केवल वेस्ट जावा के विकास और सफल गवर्नर बनने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
उधर, 75 वर्षीय राष्ट्रपति प्रबोवो ने पहले संकेत दिए थे कि यदि उनकी सरकार का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा, तो वे दोबारा चुनाव नहीं लड़ेंगे। आईएसईएएस–युसोफ इशक इंस्टीट्यूट के विजिटिंग सीनियर फेलो बुरहानुद्दीन मेहतोदी का कहना है कि यदि देदी को भविष्य में प्रबोवो का उपराष्ट्रपति उम्मीदवार बनाया जाता है, तो भी यह गठबंधन पूरी तरह सफल नहीं हो सकता, क्योंकि प्रबोवो से नाराज मतदाता अनीस बासवेदान या उपराष्ट्रपति गिबरान राकाबुमिंग राका का रुख कर सकते हैं।
इसके अलावा, संवैधानिक अदालत द्वारा राष्ट्रपति पद के नामांकन के लिए 20 प्रतिशत वोट की अनिवार्य सीमा हटाए जाने के बाद यह रास्ता भी खुल गया है कि अन्य दल देदी को अपने पाले में लाकर राष्ट्रपति उम्मीदवार बना सकते हैं।
प्रशासनिक चुनौतियां और बजट घाटा
लोकप्रियता के बावजूद देदी के प्रशासनिक ट्रैक रिकॉर्ड में कुछ चुनौतियां भी सामने आई हैं। जून में वेस्ट जावा के सरकारी स्कूलों की दाखिला प्रक्रिया में गड़बड़ी के कारण हजारों छात्रों को सीटें नहीं मिल पाई थीं, जिसके बाद देदी को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी पड़ी थी। इसके साथ ही प्रांत के 3.4 ट्रिलियन रुपिया के अनुमानित बजट घाटे को देखते हुए उन्होंने नए प्रोजेक्ट्स पर रोक लगाने का फैसला किया है ताकि भारी कर्ज से बचा जा सके। विश्लेषकों का मानना है कि 2029 तक अपनी इस छवि को बनाए रखना उनके प्रशासनिक परिणामों और राजनीतिक संतुलन पर निर्भर करेगा।

