जलता घर… रीता बहुगुणा जोशी के यूपी कांग्रेस अध्यक्ष रहते क्या हुआ था?

उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस (Congress) ने बड़ा संगठनात्मक दांव चलते हुए रामपुर खास की विधायक आराधना मिश्रा ‘मोना’ (Aradhana Mishra ‘Mona’) को उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (UPCC) का नया अध्यक्ष बनाया है। पार्टी ने इस नियुक्ति के जरिए एक तरफ जहां 12 फीसदी ब्राह्मण वोट बैंक को साधा है, वहीं दूसरी तरफ आधी आबादी (महिला मतदाताओं) को भी सीधा संदेश दिया है।
उत्तर प्रदेश कांग्रेस के 139 साल से अधिक पुराने इतिहास में आराधना मिश्रा प्रदेश अध्यक्ष बनने वाली केवल दूसरी महिला नेता हैं। उनसे पहले यह पद डॉ. रीता बहुगुणा जोशी (Rita Bahuguna Joshi) के पास था। रीता बहुगुणा जोशी का कार्यकाल 2007 से 2012 तक रहा, जो राज्य की सियासत में बेहद संघर्षपूर्ण, आक्रामक और ऐतिहासिक उतार-चढ़ावों से भरा माना जाता है।
2007 से 2012: मायावती सरकार से सीधा टकराव और जेल यात्रा
रीता बहुगुणा जोशी जब 2007 में यूपी कांग्रेस की अध्यक्ष बनीं, तब राज्य में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की पूर्ण बहुमत वाली सरकार थी और मायावती मुख्यमंत्री थीं। रीता जोशी ने उस दौर में विपक्ष की बेहद आक्रामक भूमिका निभाई:
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विवादित बयान और गिरफ्तारी: मुरादाबाद में एक जनसभा के दौरान दलित महिलाओं पर हो रहे कथित अत्याचारों का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री मायावती के खिलाफ बेहद तीखी और आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी थी।
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जेल और घर पर हमला: इस बयान के बाद भारी सियासी बवाल मचा। उन्हें गिरफ्तार कर मुरादाबाद जेल भेजा गया, जबकि लखनऊ स्थित उनके आवास पर उपद्रवियों ने तोड़फोड़ और आगजनी तक कर दी थी। बाद में इस मामले में उन्हें सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगनी पड़ी थी।
2009 लोकसभा चुनाव: 21 सीटें जीतकर रचा था इतिहास
रीता बहुगुणा जोशी के कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि 2009 का लोकसभा चुनाव रहा।
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चमत्कारी प्रदर्शन: इस चुनाव में कांग्रेस ने यूपी की 68 लोकसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे और चौंकाने वाला प्रदर्शन करते हुए 21 सीटों पर जीत दर्ज की।
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1999 के बाद सर्वश्रेष्ठ नतीजा: 1999 के बाद उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का यह सबसे बेहतरीन चुनावी प्रदर्शन था।
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इस जीत का सेहरा कांग्रेस आलाकमान ने राहुल गांधी और प्रदेश अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी के आक्रामक प्रचार और मजबूत संगठनात्मक रणनीति के सिर बांधा, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर रीता जोशी का राजनीतिक कद काफी बढ़ गया।
2012 विधानसभा चुनाव और अध्यक्ष पद से विदाई
2009 की अप्रत्याशित सफलता के बाद 2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से काफी उम्मीदें थीं:
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रालोद से गठबंधन: कांग्रेस ने इस चुनाव में चौधरी अजित सिंह की राष्ट्रीय लोकदल (RLD) के साथ गठबंधन किया।
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सीटों का आंकड़ा: कांग्रेस ने राज्य की 403 विधानसभा सीटों में से 355 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, लेकिन पार्टी केवल 28 सीटों पर ही जीत हासिल कर सकी।
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हालांकि 2007 के मुकाबले (22 सीटें) पार्टी को 6 सीटों का मामूली फायदा हुआ था, लेकिन 2009 के लोकसभा नतीजों के आधार पर यह प्रदर्शन निराशाजनक माना गया। नतीजों की जिम्मेदारी लेते हुए रीता बहुगुणा जोशी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। बाद में 2016 में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया था।
अब आराधना मिश्रा के सामने क्या हैं चुनौतियां?
रीता बहुगुणा जोशी की तरह आराधना मिश्रा भी एक मजबूत राजनीतिक परिवार और ब्राह्मण समाज से आती हैं। लेकिन 2007-2012 की तुलना में आज यूपी में कांग्रेस की संगठनात्मक स्थिति काफी कमजोर है।
विधानसभा में पार्टी के पास बेहद सीमित संख्या बल है। ऐसे में आराधना मिश्रा के सामने न सिर्फ बिखरे हुए संगठन को बूथ स्तर तक खड़ा करने की चुनौती होगी, बल्कि सपा के साथ गठबंधन में सीटों के सम्मानजनक तालमेल और महिला वोटर्स को कांग्रेस के पाले में खींचने की दोहरी जिम्मेदारी भी रहेगी।

