रेत के काले कारोबार से भिड़ीं परिणीति चोपड़ा, कैसी है ‘रिपोर्टिंग लाइव’?

क्या कोई महज रेत के लिए किसी इंसान की जान ले सकता है? अगर आपको लगता है ‘नहीं’, तो आप गलत हैं। क्योंकि यह सिर्फ रेत नहीं, ‘ब्राउन गोल्ड’ (Brown Gold) है। देश में धड़ल्ले से चल रहे रेत के अवैध खनन और रेत माफिया के इसी खतरनाक सिंडिकेट की परतें उधेड़ती है Netflix पर रिलीज हुई फिल्म ‘रिपोर्टिंग लाइव’।
राइटर-डायरेक्टर ध्रुव त्रिपाठी ने अपनी इस फिल्म में दिखाया है कि कैसे भ्रष्टाचार की दलदल में धंसा यह धंधा पर्यावरण और इंसानी जान के साथ खिलवाड़ कर रहा है।
रेटिंग: 2.5/5
क्या है फिल्म की कहानी?
फिल्म की कहानी एक बहादुर और जुझारू पत्रकार संध्या यादव (परिणीति चोपड़ा) और उसके कैमरामैन विनोद (देवेन भोजानी) के इर्द-गिर्द घूमती है। एक गांव में पुल टूटने से स्कूली बच्चों की मौत हो जाती है। इसे कवर करने गई संध्या को वहां रेत के अवैध खनन की एक बहुत बड़ी स्टोरी हाथ लगती है।
अवैध खनन के कारण नदियां अपना रुख बदल रही हैं, खेत बंजर हो रहे हैं और पुल ढह रहे हैं। माफिया के खौफ और उनकी पहुंच के चलते कोई मुंह खोलने को तैयार नहीं है। संध्या, शिवा काका (अमोल पालेकर) और मंगेश (पितोबाश त्रिपाठी) की मदद से अपनी जान जोखिम में डालकर इस गोरखधंधे की तह तक जाने की कोशिश करती है।
कैसी है फिल्म?
डायरेक्टर ध्रुव त्रिपाठी ने अपनी पहली ही फिल्म में एक बहुत ही गंभीर और जरूरी मुद्दा उठाया है। फिल्म इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के जरिए माफिया के खौफ को दिखाती है। निर्देशक ने फिल्म को रियलिस्टिक (यथार्थवादी) रखने की अच्छी कोशिश की है।
हालांकि, फिल्म का सबसे कमजोर हिस्सा इसका स्क्रीनप्ले है। इसके ट्विस्ट प्रेडिक्टेबल (जिनका पहले से अंदाजा लगाया जा सके) हैं, इसलिए ये चौंकाते नहीं हैं। इमोशनल सीन भी दर्शकों से उस गहराई तक कनेक्ट नहीं कर पाते। इसके अलावा, फिल्म में अवैध खनन के पीछे की ‘राजनीतिक सांठगांठ’ वाले अहम पहलू को लगभग नजरअंदाज कर दिया गया है।
एक्टिंग में किसने मारी बाजी?
तकनीकी रूप से फिल्म अच्छी है और देवेन भोजानी का काम काफी जानदार है। लेकिन, अमोल पालेकर, शेखर सुमन, आदिल हुसैन और शाश्वत चटर्जी जैसे दिग्गज अभिनेताओं की मौजूदगी के बावजूद, उनका वह प्रभाव पर्दे पर नजर नहीं आता जिसकी उम्मीद थी। परिणीति चोपड़ा से भी इस इंटेंस (गंभीर) रोल में और ज्यादा दमदार परफॉर्मेंस की उम्मीद रह जाती है।
क्यों देखें?
अगर आप इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म (Investigative Journalism) और सामाजिक सरोकार वाले गंभीर मुद्दों पर आधारित फिल्में देखना पसंद करते हैं, तो रेत माफिया के काले सच पर आधारित इस क्राइम-ड्रामा को Netflix पर एक बार देख सकते हैं।

