भूख, सूखा और ब्रिटिश राज का कहर, ‘राणाबाली’ में दिखेगा मौत वाला इतिहास

साउथ सिनेमा के सुपरस्टार विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना की अपकमिंग फिल्म ‘राणाबाली’ (Ranabaali) इन दिनों लगातार सुर्खियों में बनी हुई है। इस फिल्म में भारत के इतिहास की एक ऐसी भीषण त्रासदी की कहानी रुपहले पर्दे पर नजर आने वाली है, जिसके बारे में आज भी बहुत कम लोग जानते हैं। ‘राणाबाली’ में ‘द ग्रेट मद्रास अकाल’ (The Great Madras Famine) का दौर दिखाया जाएगा। यह वो भयानक त्रासदी थी, जब भयंकर सूखे और अकाल की वजह से किसानों की सारी फसलें बर्बाद हो गई थीं और लगभग 80 से 90 लाख लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी।
फिल्म ‘राणाबाली’ के जरिए मेकर्स इसी खौफनाक इतिहास और उस दौर की सच्चाई को दर्शकों के सामने पेश करने की तैयारी में हैं।
कब हुई थी यह भयानक त्रासदी?
‘द ग्रेट मद्रास अकाल’ को भारत में आई अब तक की सबसे बड़ी त्रासदियों में गिना जाता है। साल 1876 से 1878 के बीच लोगों को इस भयंकर अकाल की मार झेलनी पड़ी थी।
दरअसल, इस अकाल की शुरुआत साल 1875 में ही हो गई थी, जब दक्षिण भारत में बारिश का स्तर सामान्य से काफी नीचे गिर गया था। साल 1876 आते-आते हालात पूरी तरह बेकाबू होने लगे। ‘एडवांसिंग अर्थ एवं स्पेस साइंसिस’ में प्रकाशित एक रिसर्च के मुताबिक, 1876 के दौरान दक्षिण भारत में सिर्फ 41% तक ही बारिश हुई थी। पानी की कमी के चलते खेतों में फसलें सूख गईं और भुखमरी फैलने लगी।
ब्रिटिश हुकूमत और अकाल का कहर
साल 1876 के बाद से दक्षिण भारत के कई बड़े इलाकों में सूखा पड़ गया। मद्रास (चेन्नई) और उसके आसपास के इलाकों से शुरू हुए इस अकाल का असर इतना व्यापक था कि यह उत्तर में पंजाब के कई हिस्सों तक पहुंच गया।
मद्रास में मचे इस हाहाकार का इकलौता कारण सिर्फ प्राकृतिक सूखा नहीं था, बल्कि इसके पीछे अंग्रेजी हुकूमत की क्रूर नीतियां भी जिम्मेदार थीं। उस दौरान भारत में ब्रिटिश शासन था और पूरी प्रशासनिक व्यवस्था उनके ही हाथों में थी। सूखे के बावजूद अंग्रेजों ने अनाज की जमाखोरी की और प्रभावित इलाकों में अनाज के दाम इतने महंगे कर दिए कि आम जनता की पहुंच से वो बाहर हो गया। इसका सीधा और जानलेवा असर गरीब किसानों और आम जनता पर पड़ा।
80 से 90 लाख लोगों ने गंवाई जान
‘द ग्रेट मद्रास अकाल’ में वास्तव में कितने लोगों की मौत हुई, इसका कोई सटीक सरकारी आंकड़ा आज तक मौजूद नहीं है। हालांकि, अलग-अलग रिसर्च और रिपोर्ट्स में सामने आया है कि इस अकाल के दौरान करीब 90 लाख लोगों ने तड़प-तड़प कर अपनी जान गंवा दी थी।
‘Kiwix Server’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह अकाल लगभग 6.7 लाख वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ था, जिसकी वजह से करोड़ों लोगों को इसके परिणाम भुगतने पड़े। मरने वालों की संख्या में सबसे बड़ा आंकड़ा मासूम बच्चों और बुजुर्गों का था, जो भूख और कुपोषण का शिकार हो गए।
अब दशकों बाद, विजय देवरकोंडा की ‘राणाबाली’ इसी दर्दनाक इतिहास के पन्नों को एक बार फिर से पलटने जा रही है।

