PMAY Urban 2.0: मजदूरों और प्रवासियों के लिए सस्ते किराये के घर

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शकील अहमद सैफी
शकील अहमद सैफी

केंद्र की मोदी सरकार प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के तहत किफायती किराया आवास योजना पर काम कर रही है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य रोजगार की तलाश में बड़े शहरों का रुख करने वाले गरीब, कम आय वाले परिवारों और प्रवासियों को कम किराए पर सुरक्षित पक्का मकान उपलब्ध कराना है। भारी किराए और आर्थिक तंगी के कारण जिन लोगों को शहरों में रहने में दिक्कत आती है, उन्हें इस योजना के तहत बेहतर जीवन शैली देने की तैयारी है।

इन वर्गों को मिलेगा सीधा लाभ

यह योजना मुख्य रूप से उन लोगों को ध्यान में रखकर बनाई गई है जो शहरों की आर्थिक गतिविधियों में बड़ा योगदान देते हैं। इसके दायरे में दूसरे राज्यों या गांवों से आए लोग, औद्योगिक और कंस्ट्रक्शन साइट्स पर काम करने वाले मजदूर शामिल हैं। इसके अलावा रेहड़ी-पटरी वाले (स्ट्रीट वेंडर्स), ऑटो-रिक्शा चालक, घरेलू सहायक, कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी और शहरों में नौकरी या छोटा-मोटा व्यवसाय करने वाली महिलाओं को इस योजना के तहत कम किराए पर साफ-सुथरा घर मुहैया कराया जाएगा।

आवेदन के लिए जरूरी शर्तें

सरकार ने योजना का लाभ उठाने के लिए कुछ स्पष्ट नियम तय किए हैं:

  • आवेदक या उसके परिवार के किसी भी सदस्य के नाम पर देश में कहीं भी पक्का मकान नहीं होना चाहिए।

  • आवेदन करने वाले के पास वैध आधार कार्ड होना अनिवार्य है।

  • आवेदक के परिवार ने पिछले 20 वर्षों में केंद्र या राज्य सरकार की किसी अन्य आवास योजना का लाभ न उठाया हो।

आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे आवासीय परिसर

इस योजना के तहत केवल रहने के लिए कमरे किराए पर नहीं दिए जाएंगे, बल्कि दैनिक जीवन से जुड़ा बुनियादी ढांचा भी विकसित किया जाएगा। परिसरों में 24 घंटे जलापूर्ति, सीवेज और ड्रेनेज सिस्टम के साथ पक्की सड़कें और स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था होगी। इसके साथ ही कम्युनिटी सेंटर, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और कामकाजी माताओं के बच्चों के लिए क्रेच की सुविधा भी मिलेगी। दैनिक जरूरतों का सामान खरीदने के लिए परिसर के भीतर ही छोटी दुकानों और व्यावसायिक गतिविधियों का भी प्रावधान रहेगा।

पीपीपी मॉडल के जरिए होगा निर्माण

किफायती किराया आवास योजना को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत लागू किया जाएगा। इसे दो तरीकों से जमीन पर उतारा जाएगा। पहले विकल्प के तहत, पहले से बने और खाली पड़े सरकारी मकानों को पीपीपी के जरिए रेंटल हाउसिंग में बदला जाएगा। दूसरे तरीके में, निजी या सार्वजनिक संस्थाएं अपनी खुद की जमीन पर इन किराए के मकानों का निर्माण, संचालन और रखरखाव करेंगी।