छात्रों को बड़ी राहत, जाति वैधता लंबित होने पर नाम नहीं कटेगा

मुंबई हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने उन तमाम छात्रों को बड़ी राहत दी है, जो जाति वैधता प्रमाण पत्र (Caste Validity Certificate) समय पर जमा न कर पाने के कारण अपने एडमिशन रद्द होने के डर में थे। कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया है कि यदि किसी छात्र ने समय पर जाति वैधता के लिए आवेदन कर दिया है और उसका दावा सत्यापन समिति के पास लंबित है, तो केवल इस आधार पर उसका प्रवेश रद्द नहीं किया जा सकता।
ST छात्रों को मिली बड़ी राहत, 6 महीने में लेना होगा निर्णय
न्यायमूर्ति उर्मिला जोशी-फालके और न्यायमूर्ति राज वाकोडे की खंडपीठ के समक्ष विभिन्न छात्रों की याचिकाओं पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने साफ किया कि प्रशासनिक देरी की वजह से छात्रों की शिक्षा और भविष्य पर विपरीत प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए। अदालत ने जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समितियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे लंबित दावों पर छह महीने के भीतर अनिवार्य रूप से अपना निर्णय लें।
क्या था पूरा मामला?
नागपुर जिले के छात्र अचल रवींद्र श्रीराम ने अपना एडमिशन बचाने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनके लिए जाति वैधता प्रमाण पत्र जमा करने की अंतिम तिथि 8 सितंबर थी और समय पर प्रमाण पत्र न मिलने के कारण उनका प्रवेश रद्द होने की आशंका थी।
सुनवाई के दौरान अदालत का ध्यान राज्य सरकार के 4 सितंबर 2026 के एक शासन निर्णय (GR) पर भी दिलाया गया। इस GR के तहत कुछ वर्ग के छात्रों को प्रमाण पत्र जमा करने के लिए तीन महीने का विस्तार (Extension) दिया गया था, लेकिन हैरानी की बात यह थी कि अनुसूचित जनजाति (ST) के छात्रों को इस लाभ से बाहर रखा गया था।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी: ST छात्रों को बाहर क्यों रखा?
न्यायालय ने इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई कि राज्य सरकार के आदेश में इस बात का कोई ठोस और स्पष्ट कारण नहीं दिया गया है कि ST छात्रों को इस मोहलत से क्यों वंचित रखा गया। कोर्ट ने संबंधित छात्रा के मामले में भी समिति को छह महीने के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया और तब तक उसका एडमिशन सुरक्षित रखने को कहा। हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि छात्रा का अंतिम प्रवेश जाति वैधता दावे के फाइनल फैसले के अधीन ही रहेगा।
इसी तरह के 10 से अधिक मामलों में उच्च न्यायालय ने छात्रों को समान राहत दी है। इस फैसले से उन तमाम छात्रों ने राहत की सांस ली है, जिन्होंने समय रहते आवेदन तो कर दिया था, लेकिन सरकारी लेटलतीफी के कारण अपने करियर को लेकर आशंकित थे।
