बस्तर में पीएम मोदी के बयान पर सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने क्या कहा

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अजमल शाह
अजमल शाह

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा छत्तीसगढ़ के बस्तर (Bastar) में सुरक्षाबलों के साथ दिवाली मनाते हुए एक बार फिर ‘दिमागी नक्सल’ (Dimagi Naxal) वाला बयान दिए जाने पर सियासी संग्राम छिड़ गया है। इस बयान को लेकर प्रमुख विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (SP) ने पीएम मोदी और भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर तीखा पलटवार किया है।

“संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने का काम किया”

सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने पीएम मोदी के इस बयान पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दर्ज कराई है। उन्होंने बीजेपी सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा, “जब से केंद्र और राज्यों में बीजेपी की सरकार बनी है, तब से लगातार संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने का काम किया जा रहा है। आज चुनाव आयोग, सीबीआई (CBI) और ईडी (ED) जैसी एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।”

सपा प्रवक्ता ने जोर देकर कहा कि देश का नौजवान और विपक्ष मिलकर लोकतंत्र को बचाने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहा है। उनके मुताबिक, लोकतंत्र और आम जनता के अधिकारों के लिए सड़क पर लड़ने वाले लोगों के लिए देश के प्रधानमंत्री की ओर से इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना बिल्कुल भी उचित नहीं है। उन्होंने साफ किया कि यह लड़ाई जारी रहेगी और किसी भी कीमत पर विपक्ष पीछे नहीं हटेगा।

बस्तर में पीएम मोदी ने क्या कहा था?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिवाली के मौके पर बस्तर के जंगलों में तैनात जवानों के बीच पहुंचे थे। वहां उन्होंने जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि यह पहली ऐसी दिवाली है, जब देश का हर जिला नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त हो चुका है।

इसी दौरान उन्होंने कहा, “जंगलों से हथियारों से लैस नक्सली तो खत्म हो गए हैं, लेकिन अब ‘दिमागी नक्सली’ (Dimagi Naxal) बच्चों और युवाओं को गुमराह करने का काम कर रहे हैं। इन लोगों ने नई पीढ़ी के दिमाग में घुसपैठ कर ली है, जिससे निपटने की जरूरत है।”

तीसरी बार ‘दिमागी नक्सल’ का जिक्र

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबसे पहले 15 अगस्त 2026 को लाल किले की प्राचीर से अपने स्वतंत्रता दिवस भाषण में ‘दिमागी नक्सल’ (Urban Naxal/Mental Naxalism) शब्द का इस्तेमाल किया था। इसके बाद उन्होंने 5 सितंबर को दिल्ली यूनिवर्सिटी के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) के 100वें स्थापना दिवस कार्यक्रम में भी इसी तरह का बयान दिया था।

अब बस्तर में दिवाली मनाते हुए तीसरी बार इस बयान को दोहराए जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा है कि बीजेपी सरकार अपने राजनीतिक विरोधियों और सरकार की नीतियों का विरोध करने वाले बुद्धिजीवियों को निशाना बनाने के लिए इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल कर रही है।