बस्तर में जवानों संग दिवाली मनाने पहुंचे मोदी, नक्सलवाद पर कही बड़ी बात

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शालिनी तिवारी
शालिनी तिवारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस वर्ष दीपावली का पर्व छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित रहे क्षेत्र बस्तर में सुरक्षाबलों के साथ मनाया। जवानों के बीच पहुंचकर प्रधानमंत्री ने उनके त्याग और समर्पण की सराहना की। इस दौरान उन्होंने दावा किया कि देश में नक्सलवाद का आतंक अब खत्म हो चुका है और विकास की नई शुरुआत हुई है। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने पिछली सरकारों पर सुरक्षाबलों की अनदेखी का आरोप भी लगाया।

‘आप सब मेरे परिवार का हिस्सा हैं’

सुरक्षाबलों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज जब पूरा देश और दुनिया भर में करोड़ों भारतीय प्रकाश का पर्व मना रहे हैं, तब वे अपने परिवार (जवानों) के बीच दीवाली मनाने बस्तर पहुंचे हैं।

उन्होंने कहा, “सीमा पर और देश के भीतर राष्ट्र की रक्षा करने वाले, राष्ट्र के प्रहरी, मां भारती के वीर, आप सब बेटे-बेटियां मेरे परिजन हैं। हिमालय की गोद में कारगिल से लेकर लेपचा तक, समंदर किनारे सर क्रीक से लेकर आईएनएस विक्रांत (INS Vikrant) तक, वीर जवानों के साथ मनाई गई मेरी हर दीवाली यादगार रही है।”

नक्सलवाद पर जीत का दावा

साल 2026 की दीवाली को विशेष बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह पहली दीवाली है जब देश नक्सलवाद और माओवादी आतंक के खिलाफ दशकों पुरानी लड़ाई जीत चुका है।

उन्होंने कहा, “यह पहली दीवाली है जब देश का हर जिला नक्सलवाद से मुक्त है और करोड़ों देशवासी वामपंथी उग्रवाद के भय को परास्त कर चुके हैं।” पीएम मोदी ने इस असाधारण उपलब्धि का श्रेय जवानों और सुरक्षाकर्मियों के अदम्य साहस को दिया।

पिछली सरकारों और ‘नामदारों’ पर तीखा हमला

अपने संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने पुरानी सरकारों की नीतियों पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने उस दौर का स्मरण किया जब देश के करीब 20 राज्यों के 230 से ज्यादा जिले नक्सलवाद की चपेट में थे।

साल 2010 की घटनाओं का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “यहीं पास में दंतेवाड़ा में नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में हमारे 76 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए थे। उसी साल एक अन्य घटना में 44 निर्दोष नागरिकों की हत्या हुई थी। छत्तीसगढ़ में ही 1 हजार से ज्यादा जवानों का बलिदान हुआ।”

उन्होंने बिना नाम लिए विपक्षी नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा, “यह धरती हमारे वीरों के रक्त से लाल हो गई थी, लेकिन महलों में रहने वाले किसी भी ‘नामदार’ की सिसकी नहीं सुनाई दी, उनकी आंखों से एक भी आंसू नहीं निकला।”