पूर्व शिक्षिका से अमेरिकी सांसद तक, पिया डांडिया की कहानी क्यों है खास?

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Jyoti Atmaram Ghag
Jyoti Atmaram Ghag

अमेरिका में हुए मध्यावधि (Midterm) चुनावों के नतीजों के बीच भारतीय मूल के लोगों के लिए एक बेहद गर्व करने वाली खबर सामने आई है। राजस्थान की राजधानी जयपुर से ताल्लुक रखने वाले अप्रवासी भारतीय माता-पिता की बेटी पिया डांडिया ने फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से शानदार जीत हासिल कर बड़ा इतिहास रच दिया है। उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी के कारोबारी उम्मीदवार केसी अस्कर (Casey Askar) को करारी शिकस्त दी है।

इस जीत के साथ ही पिया डांडिया अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) के लिए निर्वाचित होने वाली दूसरी भारतीय-अमेरिकी महिला बन गई हैं। उनसे पहले यह उपलब्धि केवल प्रमिला जयपाल ही हासिल कर पाई हैं।

जयपुर से अमेरिका तक का सफर

पिया डांडिया के माता-पिता 1980 के दशक में राजस्थान के जयपुर से अमेरिका जाकर बस गए थे। उनके पिता डॉ. रोहित डांडिया ने अमेरिका में बतौर डॉक्टर अपनी सेवाएं दीं, जबकि उनकी मां ने 40 वर्ष की उम्र में जुपिटर में एक मोंटेसरी स्कूल की स्थापना की थी। इस स्कूल की शुरुआत मुख्य रूप से पिया की शुरुआती शिक्षा को ध्यान में रखकर की गई थी।

पिया का पालन-पोषण भारतीय संस्कृति और पारंपरिक संस्कारों के बीच हुआ। उनके माता-पिता बचपन में उन्हें नियमित रूप से भारत भेजते थे, ताकि वह अपने भाई-बहनों के साथ समय बिता सकें और अपनी जड़ों से जुड़ी रहें। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि भारत की उन यात्राओं ने उनके जीवन को एक नई दिशा दी और दुनिया को देखने का उनका नजरिया बदला।

दिल्ली की झुग्गी-बस्तियों में पढ़ाया और हार्वर्ड से की पढ़ाई

पिया डांडिया ने हार्वर्ड विश्वविद्यालय से ‘गवर्नमेंट’ विषय में पढ़ाई की और इसके बाद बोस्टन विश्वविद्यालय से शिक्षा में स्नातकोत्तर (Master’s) की डिग्री हासिल की। हार्वर्ड में अपने पहले साल की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने गर्मी की छुट्टियों का समय दिल्ली की झुग्गी-बस्तियों में बिताया था। ‘आशा कोऑपरेटिव सोसायटी’ के साथ जुड़कर उन्होंने 7 से 17 साल के वंचित बच्चों को अंग्रेजी पढ़ाई थी। उन्होंने एक बार अनुभव साझा करते हुए कहा था कि उस दौर ने उन्हें सिखाया कि लोगों के बीच अंतर क्षमताओं का नहीं, बल्कि परिस्थितियों का होता है।

इसके बाद उन्होंने ‘टीच फॉर अमेरिका’ कार्यक्रम के तहत अध्यापन किया और महज 28 साल की उम्र में न्यूयॉर्क के हार्लेम में ‘डेमोक्र्रेसी प्रेप एंड्योरेंस हाई स्कूल’ की संस्थापक प्रिंसिपल बनीं। वर्ष 2020 में उन्हें व्हाइट हाउस फेलो चुना गया, जिसके तहत उन्होंने व्हाइट हाउस की घरेलू नीति परिषद और अमेरिकी शिक्षा विभाग में काम किया। इसके अलावा उन्होंने एप्पल में सार्वजनिक क्षेत्र से जुड़ी पहलों का नेतृत्व भी किया था।

कड़े मुकाबले और वित्तीय चुनौतियों को दी मात

फ्लोरिडा पॉलिटिक्स की रिपोर्ट के अनुसार, मतदाता पंजीकरण के लिहाज से यह क्षेत्र मूल रूप से रिपब्लिकन पार्टी के पक्ष वाला माना जाता है, जहां डेमोक्रेट्स के मुकाबले रिपब्लिकन वोटर ज्यादा संख्या में हैं। इसके बावजूद चुनावी राजनीति में अपने पहले ही प्रयास में पिया ने बाजी पलट दी।

चुनावी अभियान के दौरान उन्हें आर्थिक मोर्चे पर भी कड़ी टक्कर मिली। 14 अक्टूबर तक पिया के कैंपेन को लगभग 46 लाख डॉलर का चंदा मिला था, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी केसी अस्कर ने करीब 74 लाख डॉलर जुटाए थे। हालांकि, अस्कर के उस फंड का एक बड़ा हिस्सा उनके द्वारा अपने ही अभियान को दिए गए कर्ज (लगभग 68 लाख डॉलर) से आया था। पिया ने अपने चुनाव प्रचार में महंगाई, भ्रष्टाचार, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और बंदूक सुरक्षा जैसे आम जनता से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाया।

प्रमिला जयपाल ने दी बधाई

पिया डांडिया की इस ऐतिहासिक जीत पर भारतीय-अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल ने उन्हें सोशल मीडिया के जरिए बधाई दी। उन्होंने लिखा कि सदन में तीसरी दक्षिण एशियाई-अमेरिकी महिला (प्रमिला जयपाल समेत) के स्वागत को लेकर वह बेहद उत्साहित हैं। पिया वर्तमान में पाम बीच गार्डन्स में अपने पति नवनीत अलग और बेटे साहिब के साथ रहती हैं। उनकी इस जीत के साथ अमेरिकी संसद में ‘समोसा कॉकस’ (भारतीय-अमेरिकी सांसदों का समूह) की ताकत और मौजूदगी दोनों बरकरार रहेंगी।