हरिश्चंद्र सिंह: लाइक्स के लिए देवी-देवताओं का मजाक क्यों?

सोशल मीडिया पर रातों-रात वायरल होने और ‘लाइक्स’ (Likes) बटोरने की होड़ ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष हरिश्चंद्र सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर हिंदू देवी-देवताओं और त्योहारों का मजाक उड़ाने वाले आपत्तिजनक कंटेंट पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका स्पष्ट मानना है कि अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर धार्मिक आस्था के साथ खिलवाड़ कतई बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।
सस्ती लोकप्रियता के लिए अपनी ही आस्था का अपमान?
हरिश्चंद्र सिंह ने इस बात पर सबसे ज्यादा जोर दिया कि कई बार खुद हिंदू समुदाय के युवा ही महज कुछ लाइक्स और सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए ऐसे विवादित कंटेंट बनाते और शेयर करते हैं।
-
उन्होंने सवाल उठाया कि सोशल मीडिया पर वायरल होने की चाह में कोई व्यक्ति अपनी ही धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े प्रतीकों का मजाक क्यों बनाए?
-
सिंह ने कहा कि कथित ‘आधुनिकता’ (Modernity) के नाम पर अपनी परंपराओं, संस्कृति और धार्मिक भावनाओं का अपमान करना कहीं से भी उचित नहीं है। क्रिएटर्स को समझना चाहिए कि उनका मजाक किसी की गहरी आस्था को ठेस पहुंचा सकता है।
सख्त कार्रवाई और अकाउंट सस्पेंड करने की मांग
NCP यूपी अध्यक्ष ने सरकार और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स) से ऐसे मामलों में सख्त रवैया अपनाने की मांग की है। उन्होंने सुझाव दिया है कि:
-
देवी-देवताओं या धार्मिक त्योहारों से संबंधित आपत्तिजनक पोस्ट की तुरंत समीक्षा होनी चाहिए।
-
जानबूझकर धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले गंभीर मामलों में संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट को तुरंत सस्पेंड कर देना चाहिए।
अभिव्यक्ति की आजादी बनाम धार्मिक जिम्मेदारी
हरिश्चंद्र सिंह का यह बयान एक बड़े मुद्दे की तरफ इशारा करता है कि क्या वायरल होने की दौड़ में सामाजिक और धार्मिक संवेदनशीलता की कोई सीमा तय होनी चाहिए? आज के समय में कुछ ही सेकंड का रील या वीडियो लाखों लोगों तक पहुंच जाता है, ऐसे में संवेदनशील विषयों को महज मनोरंजन का हिस्सा बना देना खतरनाक हो सकता है।
हालांकि, किसी भी दंडात्मक कार्रवाई के लिए यह तय करना भी जरूरी है कि कोई पोस्ट वास्तव में धार्मिक घृणा फैला रही है या केवल किसी को पसंद नहीं आई है। इसके लिए स्पष्ट कानूनी नियम और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता होगी। फिलहाल, सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर तीखी बहस छिड़ चुकी है।
