एनसीपी की यूपी में बढ़ती पैठ, प्रदेश अध्यक्ष हरिश्चंद्र सिंह की भूमिका अहम

ncp
अजमल शाह
अजमल शाह

उत्तर प्रदेश की सियासत में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) का अजित पवार गुट लंबे समय से सीमित उपस्थिति वाला दल माना जाता रहा है। महाराष्ट्र केंद्रित इस पार्टी के लिए यूपी जैसे विशाल राज्य में जड़ें जमाना आसान नहीं रहा। लेकिन पिछले कुछ समय में पार्टी के संगठनात्मक विस्तार की कोशिशें तेज हुई हैं। इस बदलाव का श्रेय बड़े पैमाने पर प्रदेश अध्यक्ष हरिश्चंद्र सिंह को दिया जा रहा है।

पार्टी सूत्रों और कार्यकर्ताओं के अनुसार, हरिश्चंद्र सिंह ने प्रदेश इकाई को सक्रिय रखने की दिशा में लगातार प्रयास किए हैं। जिला और मंडल स्तर पर संपर्क बढ़ाया गया, बैठकें आयोजित की गईं और नए चेहरों को जोड़ने की कोशिश की गई। महाराष्ट्र में पार्टी की ताकत और एनडीए के साथ गठबंधन के बावजूद यूपी में विस्तार आसान नहीं था। फिर भी संगठनात्मक स्तर पर कुछ हलचल दिखाई दे रही है।

कार्यकर्ताओं का कहना है कि पहले जहां पार्टी की उपस्थिति कुछ जिलों तक सीमित थी, वहीं अब कई क्षेत्रों में इकाई गठित करने और स्थानीय मुद्दों पर सक्रिय रहने की कोशिश हो रही है। हरिश्चंद्र सिंह के नेतृत्व में प्रदेश स्तर पर बैठकों का सिलसिला बढ़ा है। वे विभिन्न क्षेत्रों का दौरा कर कार्यकर्ताओं से संवाद कर रहे हैं और पार्टी की नीतियों को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यूपी में एनसीपी के लिए मुख्य चुनौती अपनी अलग पहचान बनाना है। यहां सपा, बसपा, भाजपा और कांग्रेस जैसी स्थापित ताकतें हैं। ऐसे में छोटी पार्टियों के लिए जगह बनाना कठिन होता है। अजित पवार गुट के पास महाराष्ट्र में सरकारी भागीदारी का लाभ है, लेकिन यूपी में इसे जमीनी स्तर पर बदलने के लिए लंबा संगठनात्मक काम करना होगा। हरिश्चंद्र सिंह इसी दिशा में प्रयास कर रहे हैं।

पार्टी के अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि प्रदेश अध्यक्ष के रूप में उन्होंने कार्यकर्ताओं को प्रेरित रखने और स्थानीय स्तर पर उपस्थिति दर्ज कराने पर ध्यान केंद्रित किया है। कुछ जिलों में नए सदस्य जुड़ने और इकाई सक्रिय होने के दावे किए जा रहे हैं। हालांकि, चुनावी नतीजों के स्तर पर अभी बड़ा बदलाव दिखना बाकी है। 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी अपनी उपस्थिति बढ़ाने की कोशिश में जुटी हुई है।

हरिश्चंद्र सिंह के नेतृत्व को पार्टी के अंदर सकारात्मक रूप से देखा जा रहा है। कार्यकर्ता मानते हैं कि उनके सक्रिय रवैये से पार्टी की प्रदेश इकाई में नई ऊर्जा आई है। महाराष्ट्र में अजित पवार गुट की पहचान मजबूत होने के बाद यूपी में भी संगठन को मजबूत करने की कोशिशें तेज हुई हैं।

यह स्पष्ट है कि यूपी की सियासत में एनसीपी अभी भी छोटी ताकत है। लेकिन संगठनात्मक विस्तार की दिशा में हरिश्चंद्र सिंह के प्रयासों को पार्टी के अंदर सराहा जा रहा है। आने वाले समय में यह देखा जाना बाकी है कि ये प्रयास चुनावी स्तर पर कितना असर दिखा पाते हैं।