मुजफ्फरनगर में बीजेपी या सपा-RLD? 27 से पहले समझिए 6 सीटों का गणित

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र माना जाने वाला मुजफ्फरनगर जिला एक बार फिर 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए तैयार है। जाट, मुस्लिम, दलित और किसान राजनीति की धुरी रहे इस जिले का चुनावी इतिहास हर पांच साल में करवट लेता रहा है।
2017 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने यहां ‘क्लीन स्वीप’ करते हुए सभी छह सीटों (मुजफ्फरनगर सदर, पुरकाजी, चरथावल, बुढ़ाना, खतौली और मीरापुर) पर कब्जा जमाया था। लेकिन 2022 आते-आते यह तस्वीर पूरी तरह बदल गई, जब समाजवादी पार्टी (SP) और राष्ट्रीय लोकदल (RLD) के गठबंधन ने भाजपा को तगड़ी चुनौती देते हुए 6 में से 4 सीटें अपने नाम कर लीं।
अब 2027 के चुनाव से पहले सबसे बड़ा बदलाव रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी का सपा का साथ छोड़कर NDA के पाले में जाना है। आइए समझते हैं मुजफ्फरनगर की 6 विधानसभा सीटों का पिछला रिकॉर्ड और आगामी चुनाव के बदलते समीकरण।
1. मुजफ्फरनगर सदर: भाजपा का मजबूत गढ़
मुजफ्फरनगर सदर सीट उन दो विधानसभाओं में शामिल है, जहां भाजपा ने 2017 और 2022 में लगातार जीत दर्ज की।
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2017 और 2022 के नतीजे: भाजपा के कपिल देव अग्रवाल ने दोनों बार इस सीट से जीत दर्ज की। 2017 में उन्होंने सपा के गौरव स्वरूप को लगभग 14 हजार वोटों से हराया था और 2022 में भी अपनी सीट बचाने में सफल रहे। 2027 में भी कपिल देव और भाजपा के सामने इस किले को महफूज रखने की चुनौती होगी।
2. पुरकाजी (सुरक्षित): सत्ता परिवर्तन का केंद्र
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2017 के नतीजे: भाजपा के प्रमोद ऊंटवाल ने कांग्रेस के दीपक कुमार को 11,253 वोटों से हराया था।
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2022 के नतीजे: रालोद के अनिल कुमार ने 92,672 वोट हासिल कर भाजपा के प्रमोद ऊंटवाल (86,140 वोट) को 6,532 वोटों से शिकस्त दी। 2027 में रालोद के NDA के साथ होने से पुरकाजी सीट के समीकरण पूरी तरह नए सिरे से लिखे जाएंगे।
3. चरथावल: करीबी मुकाबले वाली सीट
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2017 के नतीजे: भाजपा के विजय कश्यप ने सपा के मुकेश चौधरी को 23,231 वोटों से हराया था।
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2022 के नतीजे: समाजवादी पार्टी के पंकज मलिक ने 97,363 वोट हासिल कर भाजपा की सपना कश्यप (92,029 वोट) को 5,334 वोटों के करीबी अंतर से मात दी। सपा के लिए चरथावल की सीट बरकरार रखना एक बड़ी चुनौती होगी।
4. बुढ़ाना: रालोद ने दर्ज की थी बड़ी जीत
बुढ़ाना विधानसभा सीट 2022 में जिले के सबसे बड़े उलटफेर की गवाह बनी थी।
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2017 के नतीजे: भाजपा के उमेश मलिक ने सपा के प्रमोद त्यागी को 13,201 वोटों से हराया था।
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2022 के नतीजे: रालोद के राजपाल बालियान ने 1,31,093 वोट हासिल किए और भाजपा के उमेश मलिक को 28,310 वोटों के बड़े अंतर से हरा दिया। अब रालोद के भाजपा के साथ आने से इस सीट पर एनडीए का पलड़ा भारी दिख सकता है।
5. खतौली: गठबंधन की लहर में भी बची रही भाजपा
खतौली सीट का रिकॉर्ड भाजपा के लिए राहत भरा रहा है।
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2017 के नतीजे: भाजपा के विक्रम सैनी ने सपा के चंदन चौहान को 31,374 वोटों से हराया।
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2022 के नतीजे: सपा-रालोद की लहर के बावजूद विक्रम सैनी (1,00,651 वोट) ने रालोद के राजपाल सैनी को 16,345 वोटों से हराया। हालांकि 2022 के उपचुनाव में यह सीट रालोद के मदन भैया ने जीत ली थी।
6. मीरापुर: 193 वोटों से हार-जीत और बड़ा उलटफेर
मीरापुर विधानसभा सीट पर पिछले दो चुनावों में 360 डिग्री का बदलाव दिखा है।
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2017 के नतीजे: भाजपा के अवतार सिंह भड़ाना ने सपा के लियाकत अली को महज 193 वोटों के बारीक अंतर से हराया था।
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2022 के नतीजे: रालोद के चंदन चौहान ने 1,07,421 वोट हासिल कर भाजपा के प्रशांत चौधरी को 27,380 वोटों के बड़े अंतर से मात दी। हालिया 2024 उपचुनाव में भी यह सीट रालोद की मिथिलेश पाल ने जीती है।
‘शुगर बाउल’ की किसान राजनीति और 2027 के मुद्दे
मुजफ्फरनगर को पश्चिमी यूपी का ‘शुगर बाउल’ कहा जाता है। यहां गन्ना भुगतान, फसलों का एमएसपी (MSP) और किसानों की स्थिति सबसे बड़े चुनावी मुद्दे रहते हैं। 2013 के सांप्रदायिक दंगों के बाद जिले की राजनीति में भारी ध्रुवीकरण देखने को मिला था, लेकिन किसान आंदोलन ने बाद में जाट और मुस्लिम समुदायों को कई साझा मुद्दों पर फिर से एक मंच पर ला दिया।
2024 के लोकसभा चुनाव में मुजफ्फरनगर सीट पर सपा के हरेंद्र सिंह मलिक ने भाजपा के संजीव बालियान को हराकर यह साबित कर दिया है कि जिले का मिजाज स्थिर नहीं है। 2027 के चुनाव में सपा की चुनौती अपने प्रदर्शन को दोहराने की होगी, जबकि भाजपा-रालोद गठबंधन का पूरा जोर अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने पर होगा।

