समुद्री हवाएं भी नहीं दिला पा रहीं राहत, दिल्ली पीछे, मुंबई का AQI 322

अक्टूबर के महीने में जहां दिल्ली की वायु गुणवत्ता में पिछले कुछ वर्षों की तुलना में अप्रत्याशित सुधार दिखा है, वहीं देश की आर्थिक राजधानी मुंबई स्मॉग की मोटी चादर में लिपट गई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 167 (मध्यम) दर्ज किया गया है। इसके ठीक विपरीत, समुद्र तट पर बसे होने के बावजूद मुंबई का AQI 322 के ‘बेहद खराब’ स्तर को पार कर गया है, जिसने प्रशासन और पर्यावरणविदों की चिंता बढ़ा दी है।
निर्माण कार्य, ट्रैफिक और धूल बने मुख्य विलेन
मुंबई में प्रदूषण के इस खतरनाक स्तर के पीछे शहर में बड़े पैमाने पर चल रहे बुनियादी ढांचे के निर्माण कार्य, वाहनों का धुआं और उड़ती धूल मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं। 2020 के एक अध्ययन के आंकड़ों के मुताबिक, शहर के कुल PM10 प्रदूषण में वाहनों के धुएं की हिस्सेदारी 19.6 प्रतिशत, हवा में उड़ने वाली सड़क की धूल की 19.4 प्रतिशत और औद्योगिक गतिविधियों की 18.9 प्रतिशत है। भारी ट्रैफिक जाम और मलबे के कारण ये प्रदूषक कण हवा में लगातार बने रहते हैं, जिससे वायु गुणवत्ता तेजी से गिर रही है।
मौसम का मिजाज और बीएमसी की चुनौतियां
आमतौर पर समुद्र के किनारे बसे होने का फायदा मुंबई को मिलता रहा है, लेकिन मौजूदा समय में हवा की गति धीमी होने से प्रदूषक तत्व फैल नहीं पा रहे हैं। बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) की रिपोर्ट के अनुसार, हवा में मौजूद नमी और समुद्री नमक के कण (सोडियम क्लोराइड) प्रदूषकों के साथ मिलकर घनी धुंध पैदा कर रहे हैं। प्रशासन ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए कई नए उपायों की घोषणा जरूर की है, लेकिन जमीनी स्तर पर इनकी निगरानी, क्रियान्वयन और प्रदूषण के मुख्य स्रोतों पर लगाम कसने को लेकर अब भी गंभीर सवाल कायम हैं।

