बेटियों के लिए मुलायम सरकार की 5 पहल, जानिए क्या था पूरा खाका

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गौरव त्रिपाठी
गौरव त्रिपाठी

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने अपने तीन कार्यकालों (1989-91, 1993-95 और 2003-07) में सामाजिक न्याय की राजनीति को आगे बढ़ाया। महिलाओं, खासकर गरीब और पिछड़े वर्ग की बेटियों के शिक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण पर उन्होंने विशेष ध्यान दिया। उनके शासनकाल की सबसे चर्चित और प्रभावशाली योजना कन्या विद्या धन योजना रही, जिसके साथ कई अन्य कल्याणकारी कदम भी उठाए गए।

1. कन्या विद्या धन योजना (2004)

यह मुलायम सिंह यादव की सबसे महत्वपूर्ण महिला केंद्रित योजना थी।

शुरुआत और प्रावधान:
अगस्त 2003 में सत्ता संभालने के बाद 2004 में इस योजना की घोषणा की गई। Intermediate (कक्षा 12) पास करने वाली लड़कियों को उच्च शिक्षा के लिए एकमुश्त 20,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती थी। शुरू में यह राशि गरीबी रेखा से नीचे (BPL) के परिवारों की बेटियों के लिए प्राथमिकता के आधार पर दी गई। बाद में दायरा बढ़ाया गया।

आंकड़े और प्रभाव:

2003-06 के दौरान लगभग 5.87 लाख लड़कियों को इस योजना का लाभ मिला। एक वर्ष में ही योजना के लिए 600 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया। योजना का मकसद लड़कियों के स्कूल ड्रॉपआउट को कम करना और उन्हें कॉलेज स्तर तक पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना था।
मुस्लिम लड़कियों को भी शामिल करने के लिए अरबी-फारसी बोर्ड की “आलिया” परीक्षा पास करने वाली छात्राओं को भी पात्र बनाया गया, जिससे लाभार्थियों की संख्या बढ़ाकर तीन लाख तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया।

यह योजना बाद में मायावती सरकार में बंद हुई, लेकिन 2012 में अखिलेश यादव सरकार ने इसे फिर से शुरू किया और राशि बढ़ाकर 30,000 रुपये कर दी।

2. लड़कियों के लिए मुफ्त शिक्षा का विस्तार

2004 में मुलायम सरकार ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया। सरकार द्वारा संचालित और सहायता प्राप्त कॉलेजों में लड़कियों को डिग्री स्तर तक मुफ्त शिक्षा देने का प्रावधान किया गया।

इससे करीब चार लाख लड़कियों को लाभ पहुंचने का अनुमान था। पहले यह सुविधा इंटरमीडिएट तक सीमित थी, जिसे आगे बढ़ाया गया।
345 सहायता प्राप्त स्कूलों और 108 सरकारी डिग्री कॉलेजों में यह लागू किया गया।

3. गरीब परिवारों की बेटियों के विवाह के लिए सहायता

2006 में कैबिनेट ने फैसला लिया कि गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों को बेटी की शादी के लिए 10,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी।

एक परिवार को अधिकतम दो बेटियों की शादी के लिए यह राशि मिल सकती थी। सालाना लगभग 22,500 परिवारों को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया। इलाज के लिए भी BPL परिवारों को प्रति सदस्य सालाना 2,000 रुपये तक की मदद का प्रावधान किया गया।

4. साड़ी वितरण योजना

BPL परिवारों की महिलाओं को साड़ी वितरण की योजना चलाई गई। चुनावी सालों में इसे खास तौर पर बढ़ावा दिया गया। मुलायम सिंह यादव खुद कई कार्यक्रमों में साड़ियां और कन्या विद्या धन के चेक बांटते दिखे।

5. महिला नीति (Women Policy) 2006

नवंबर 2006 में मुलायम सरकार ने प्रदेश की महिला नीति को मंजूरी दी।

राष्ट्रीय महिला नीति 2001 को ध्यान में रखकर इसे तैयार किया गया। उद्देश्य था महिलाओं का सामाजिक, आर्थिक और अन्य क्षेत्रों में उत्थान।
प्रमुख महिलाओं और एनजीओ को सलाहकार की भूमिका दी गई। उस समय उत्तर प्रदेश में महिलाओं की अनुमानित संख्या 7.86 करोड़ थी।

कुल मिलाकर प्रभाव और सीमाएं

मुलायम सिंह यादव की योजनाओं का मुख्य फोकस शिक्षा और तत्काल आर्थिक सहायता पर था। कन्या विद्या धन योजना ने हजारों गरीब परिवारों की बेटियों को कॉलेज पहुंचने में मदद की। कई महिलाओं ने बाद में स्वीकार किया कि अगर यह राशि न मिलती तो वे आगे पढ़ाई नहीं कर पातीं।

आज जब महिला केंद्रित योजनाओं की बात होती है, तो मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल की कन्या विद्या धन योजना को अक्सर याद किया जाता है। यह उनके शासनकाल की एक महत्वपूर्ण विरासत है, जिसने बेटियों की शिक्षा को प्रोत्साहन देने की दिशा में ठोस कदम उठाया।