टाइगर से सलमान तक… लॉरेंस का नाम आने पर क्यों ‘मजबूर’ है मुंबई पुलिस?

बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान, दिवंगत एनसीपी नेता बाबा सिद्दीकी, फिल्म निर्माता रोहित शेट्टी और अब अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हाल ही में हुए हमले। इन सभी हाई-प्रोफाइल आपराधिक वारदातों के तार किसी न किसी रूप में कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और उसके भाई अनमोल बिश्नोई से जुड़ रहे हैं।
इसके बावजूद एक बड़ा सवाल लगातार उठ रहा है कि गुजरात की साबरमती जेल में बंद लॉरेंस और दिल्ली की तिहाड़ जेल में कैद अनमोल को मुंबई पुलिस कस्टडी (हिरासत) में लेकर पूछताछ क्यों नहीं कर पा रही है? मुंबई की अदालतों में चल रहे मामलों में चार्जशीट में इनके नाम वांछित आरोपियों के रूप में दर्ज हैं, लेकिन इन्हें आरोपी नहीं बनाया गया है।
लॉरेंस और अनमोल को कस्टडी में न ले पाने की असली वजह क्या है?
इन दोनों भाइयों को कस्टडी में न ले पाने का मुख्य कारण केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) का एक विशेष आदेश है।
क्या है यह आदेश? अगस्त 2023 में गृह मंत्रालय ने क्रिमिनल प्रोसीजर कोड (CrPC) की धारा 268 के तहत एक आदेश जारी किया था, जिसके अनुसार लॉरेंस बिश्नोई को किसी भी काम या पूछताछ के लिए जेल से बाहर ले जाने पर सख्त पाबंदी लगा दी गई थी। शुरुआत में यह आदेश एक साल के लिए था।
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अगस्त 2024 में इस आदेश को एक और साल के लिए बढ़ा दिया गया। अब यह नए कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 303 के तहत लागू है।
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5 दिसंबर 2025 को अनमोल बिश्नोई (जिसे नवंबर 2025 में अमेरिका से डिपोर्ट किया गया था) के लिए भी तिहाड़ जेल प्रशासन को ऐसा ही आदेश जारी कर दिया गया।
कानून क्या कहता है? (धारा 303 BNSS)
नए आपराधिक कानून BNSS की धारा 303 के तहत केंद्र या राज्य सरकारें सामान्य या विशेष आदेश के जरिए यह निर्देश दे सकती हैं कि किसी व्यक्ति को उस जेल से बाहर न निकाला जाए जहां वह बंद है।
यह पाबंदी तीन आधार पर लगाई जा सकती है:
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अपराध की गंभीर प्रकृति।
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सार्वजनिक व्यवस्था (Public Order) बिगड़ने की संभावना।
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व्यापक जनहित और कैदी की सुरक्षा का खतरा।
जब तक गृह मंत्रालय का यह आदेश लागू रहता है, तब तक किसी भी अदालत का वह आदेश प्रभावी नहीं हो सकता जिसमें पुलिस को इन भाइयों की फिजिकल कस्टडी (शारीरिक हिरासत) लेने को कहा गया हो। यदि मुंबई पुलिस को पूछताछ करनी है, तो अदालत से अनुमति लेकर पूछताछ जेल के भीतर ही करनी होगी।
पुलिस के लिए जेल में पूछताछ की सीमाएं
जांच एजेंसियों का तर्क है कि जेल के अंदर पूछताछ करने की अपनी सीमाएं होती हैं:
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एक बार में केवल एक या दो अधिकारियों को ही जाने की अनुमति मिलती है।
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पूछताछ कुछ घंटों के लिए ही की जा सकती है।
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मुख्य आरोपी के सामने दूसरे आरोपियों को बिठाकर क्रॉस-पूछताछ (Cross-examination) संभव नहीं हो पाती।
बाबा सिद्दीकी मामले में कोर्ट की फटकार और पुलिस का जवाब
12 अक्टूबर 2024 को हुई बाबा सिद्दीकी की हत्या मामले में पुलिस ने 27 लोगों को गिरफ्तार किया है और अनमोल को वांछित आरोपी बताया है। 3 जुलाई को सिद्दीकी की पत्नी ने अदालत से मांग की थी कि अनमोल को कस्टडी में लिया जाए। अदालत ने पुलिस को फटकार लगाते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया।
एसीपी ने दिया गृह मंत्रालय के आदेश का हवाला: पुलिस की ओर से एक एसीपी ने अदालत को बताया कि गृह मंत्रालय के आदेश के कारण उनकी फिजिकल कस्टडी लेने पर पूर्ण कानूनी रोक है। इसी वजह से पुलिस ने अब तक अनमोल से पूछताछ नहीं की है। जुलाई में दिल्ली की एक विशेष अदालत ने भी इसी आदेश का हवाला देते हुए मुंबई पुलिस के प्रोडक्शन वारंट को खारिज कर दिया था।
सलमान खान और टाइगर श्रॉफ मामले पर असर
सलमान खान के घर के बाहर हुई गोलीबारी के मामले में अनमोल ने खुद सरेंडर करने और अदालती कार्यवाही में शामिल होने की अर्जी दी है, जिस पर फैसला होना बाकी है।
हाल ही में रविवार को टाइगर श्रॉफ पर हुए जानलेवा हमले की जिम्मेदारी लेने वाले पोस्ट में भी लॉरेंस बिश्नोई गैंग का नाम सबसे ऊपर था। यदि इस हमले में भी गिरोह की संलिप्तता पूरी तरह साबित होती है, तब भी गृह मंत्रालय के इसी आदेश (BNSS की धारा 303) के कारण दोनों भाई मुंबई पुलिस की पहुंच और फिजिकल कस्टडी से दूर ही रहेंगे।

