खंभात की खाड़ी में बनेगी दुनिया की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील

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साक्षी चतुर्वेदी
साक्षी चतुर्वेदी

भारत सरकार और गुजरात सरकार मिलकर खंभात की खाड़ी में ‘कल्पसर प्रोजेक्ट’ के जरिए एक बड़े इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट को आकार देने जा रही हैं। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत समुद्र के एक हिस्से को बांधकर दुनिया की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील बनाई जाएगी। इसका मुख्य उद्देश्य साबरमती, माही, धाधर और नर्मदा जैसी प्रमुख नदियों के मीठे पानी को समुद्र में बहकर व्यर्थ होने से रोकना और उसे रिजर्व कर इस्तेमाल में लाना है।

1.25 लाख करोड़ रुपये की अनुमानित लागत

कल्पसर प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 1.25 लाख करोड़ से 1.33 लाख करोड़ रुपये के बीच आंकी गई है। इस विशाल निर्माण कार्य के लिए केंद्र सरकार के साथ-साथ नीदरलैंड्स से तकनीकी सहायता ली जा रही है। नीदरलैंड की कंसल्टेंसी कंपनी NEDECO (नीदरलैंड्स इंजीनियरिंग कंसल्टेंट्स) इसके फ्रेमवर्क और टेक्निकल सपोर्ट में मदद कर रही है। प्रोजेक्ट के सचिव केबी राबड़िया को इस 64 किलोमीटर लंबे बांध और 1600 से 2000 वर्ग किलोमीटर में फैली आर्टिफिशियल झील के निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

7800 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी होगा रिजर्व

इस कृत्रिम झील के अंदर 7800 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी को स्टोर करने की क्षमता होगी। अब तक नदियों के भारी जलस्तर को समुद्र में जाने से रोकना व्यावहारिक रूप से लगभग असंभव माना जाता रहा है, लेकिन इस प्रोजेक्ट के जरिए सरकार पानी को रिजर्व कर बड़े आर्थिक और ढांचागत फायदे उठाने की तैयारी में है।

सौराष्ट्र के 9 जिलों का खत्म होगा सूखा

इस प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा फायदा जल संकट से जूझ रहे गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र को मिलेगा।

  • सौराष्ट्र के 9 जिलों के 42 तालुकों में 10 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि तक सिंचाई का पानी पहुंचेगा।

  • पानी की कमी से फसलों को होने वाले नुकसान में कमी आएगी और कृषि उत्पादन को सीधा बढ़ावा मिलेगा।

  • सिंचाई के साथ-साथ आम जनता और स्थानीय इंडस्ट्री-फैक्ट्रियों के लिए भी पेयजल की निर्बाध सप्लाई संभव हो सकेगी।

परिवहन और ऊर्जा उत्पादन को रफ्तार

खंभात की खाड़ी पर 64 किलोमीटर लंबा बांध बनने के बाद इसके ऊपर एक नया सड़क और रेल कॉरिडोर भी विकसित किया जाएगा। यह कॉरिडोर भावनगर और सूरत के बीच की दूरी को काफी हद तक कम कर देगा, जिससे माल ढुलाई में लगने वाले समय और ईंधन दोनों की बचत होगी। इसके अलावा, बांध और झील के विशाल बुनियादी ढांचे का इस्तेमाल ऊर्जा क्षेत्र के लिए भी किया जाएगा, जहां 2470 मेगावाट सौर और पवन ऊर्जा पैदा करने का लक्ष्य रखा गया है।