हॉस्टल में पढ़ाई या खाना बनाने की टेंशन? झारखंड सरकार ने निकाला रास्ता

झारखंड के कल्याण विभाग (Kalyan Vibhag) द्वारा संचालित छात्रावासों में रहकर पढ़ाई करने वाले हजारों छात्र-छात्राओं के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। अब इन विद्यार्थियों को राशन जुटाने और खुद खाना पकाने की जद्दोजहद से हमेशा के लिए मुक्ति मिलने जा रही है।
झारखंड सरकार ने फैसला किया है कि इन छात्रावासों में रहने वाले सभी विद्यार्थियों को अब सरकार की ओर से मुफ्त, पौष्टिक और नियमित रूप से गर्म भोजन (Free Food Scheme) उपलब्ध कराया जाएगा। कल्याण विभाग ने इसके लिए तैयारियां तेज कर दी हैं और सभी जिलों के उपायुक्तों (DC) को टेंडर प्रक्रिया जल्द पूरी करने का निर्देश दिया है। उम्मीद है कि इस साल के अंत (दिसंबर) या जनवरी के पहले सप्ताह से छात्रों की थाली में सरकार की ओर से भोजन परोसा जाने लगेगा।
25 हजार से अधिक विद्यार्थियों को सीधा लाभ
वर्तमान में पूरे राज्य में कल्याण विभाग द्वारा लगभग 540 छात्रावास संचालित किए जा रहे हैं।
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इन छात्रावासों में मुख्य रूप से अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और पिछड़ा वर्ग (OBC) से आने वाले करीब 25,000 से अधिक विद्यार्थी रहकर अपनी पढ़ाई कर रहे हैं।
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अब तक इन छात्रों को केवल रहने के लिए कमरा मिलता था, जबकि खाने का पूरा इंतजाम और खर्च उन्हें खुद उठाना पड़ता था। इससे छात्रों का कीमती समय खाना बनाने में बर्बाद होता था और गरीब परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ भी पड़ता था।
हर छात्र पर 3,000 रुपये का मासिक बजट
योजना के प्रारूप के मुताबिक, सरकार ने छात्रों की सेहत और पोषण का पूरा ध्यान रखा है:
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बजट: प्रत्येक विद्यार्थी के खान-पान के लिए सरकार हर महीने 3,000 रुपये की राशि खर्च करेगी।
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भोजन का मेन्यू: छात्रों को दिन में तीन बार भरपेट भोजन दिया जाएगा। सुबह पौष्टिक नाश्ता मिलेगा, जबकि दोपहर और रात के खाने में दाल, चावल, रोटी और हरी सब्जियां शामिल होंगी।
जिला स्तर पर होगा टेंडर, 100 छात्रों पर 3 कर्मी
इस व्यवस्था को पारदर्शी और सुचारू बनाने के लिए राज्य मुख्यालय की जगह अब जिला स्तर पर टेंडर (Tender) किए जाएंगे। जिला उपायुक्त निजी एजेंसियों का चयन करेंगे जो भोजन की पूरी व्यवस्था संभालेंगी।
रसोई और साफ-सफाई की जिम्मेदारी के लिए भी कड़े नियम बनाए गए हैं:
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प्रत्येक 100 विद्यार्थियों पर 3 कर्मियों की तैनाती की जाएगी (1 प्रबंधक, 1 कुशल रसोइया और 1 सफाई कर्मी)।
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इन कर्मचारियों के मानदेय का भुगतान सरकार अलग से करेगी, इसका असर छात्रों के 3,000 रुपये के भोजन बजट पर नहीं पड़ेगा।
देरी क्यों हुई? मंत्री चमरा लिंडा ने बताया कारण
कल्याण मंत्री चमरा लिंडा ने स्पष्ट किया कि पहले राज्य स्तर पर टेंडर निकाला गया था, लेकिन पर्याप्त एजेंसियों के शामिल न होने के कारण प्रक्रिया रद्द करनी पड़ी। इस वजह से योजना को लागू करने में देरी हुई। उन्होंने बताया कि अब प्रक्रिया को विकेंद्रीकृत कर जिलों को सौंप दिया गया है, जहां तेजी से काम हो रहा है। मंत्री ने भरोसा जताया है कि नए साल की शुरुआत (जनवरी) से हर छात्रावास में भोजन की यह बेहतरीन व्यवस्था अनिवार्य रूप से लागू कर दी जाएगी।

